MP के रायसेन में मिली दुर्लभ जैन धरोहर, जामगढ़ के घने जंगलों में छिपा था 1000 साल पुराना रहस्य

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📰 पंकज जैन “प्रखर”
रायसेन | मध्यप्रदेश का रायसेन जिला एक बार फिर इतिहास और आध्यात्मिक विरासत की राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बन गया है। जिले के जामगढ़ गांव के घने जंगलों में पत्थरों पर उकेरे गए लगभग 1000 वर्ष पुराने मानव पदचिह्नों की दुर्लभ पगडंडी मिली है, जिसे पुरातत्वविद जैन संत के मोक्ष गमन मार्ग से जोड़कर देख रहे हैं।

करीब 800 मीटर लंबी इस रहस्यमयी पत्थरीली पगडंडी की खोज इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (INTACH) भोपाल शाखा की पुरातत्वविद नैन्सी शर्मा और उनके सहयोगी मिलनाथ पेटले ने स्थानीय ग्रामीणों की मदद से की है।

पत्थरों पर उकेरे मिले सैकड़ों पदचिह्न

घने जंगलों और पथरीले क्षेत्र के बीच मिले इन पदचिह्नों को देखकर विशेषज्ञ भी हैरान हैं। कई स्थानों पर समय और मानवीय हस्तक्षेप के कारण निशान धुंधले हो चुके हैं, लेकिन अधिकांश पदचिह्न आज भी स्पष्ट दिखाई देते हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ये पदचिह्न एक निश्चित दिशा में आगे बढ़ते हैं और फिर गुफाओं के पास अचानक समाप्त हो जाते हैं।

शिलालेखों ने खोला 1000 साल पुराना रहस्य

पहले प्रमुख पदचिह्न के पास मिले दो पंक्तियों के प्राचीन शिलालेख ने इस खोज को और महत्वपूर्ण बना दिया है। शिलालेख में ‘सिद्ध’, ‘पद’, ‘पंडित’ और ‘कृत’ जैसे शब्द अंकित पाए गए हैं।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पूर्व पुरालेख निदेशक रविशंकर ने इसकी जांच के बाद पुष्टि की कि यह शिलालेख 10वीं-11वीं शताब्दी के परमार काल का है और इसमें प्रारंभिक नागरी लिपि का उपयोग किया गया है।

क्या यह जैन मुनि की अंतिम यात्रा का मार्ग था?

इतिहासकारों और जैन शोधकर्ताओं का मानना है कि परमार काल में मध्यप्रदेश जैन संस्कृति का बड़ा केंद्र था। भोजपुर और आसपास के क्षेत्रों में जैन मंदिरों और अवशेषों के प्रमाण पहले भी मिल चुके हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार शिलालेख में प्रयुक्त ‘सिद्ध’ और ‘पंडित’ जैसे शब्द किसी उच्च आध्यात्मिक अवस्था प्राप्त जैन मुनि की ओर संकेत करते हैं। यही वजह है कि अब यह संभावना जताई जा रही है कि यह पगडंडी किसी जैन संत की “मोक्ष समाधि” या अंतिम आध्यात्मिक यात्रा का मार्ग रही हो सकती है।

रायसेन की धरती फिर बनी इतिहास का केंद्र

यह खोज केवल पुरातात्विक महत्व की नहीं, बल्कि जैन इतिहास और भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपराओं के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

स्थानीय लोगों और इतिहास प्रेमियों का मानना है कि यदि इस स्थल का वैज्ञानिक अध्ययन और संरक्षण किया गया, तो यह आने वाले समय में देश की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों में शामिल हो सकता है।
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PANKAJ JAIN
Author: PANKAJ JAIN

पत्रकारिता में 2009 से सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। "दैनिक अग्निबाण" में लंबी पारी के बाद "SCN NEWS" सहित कई संस्थानों में न्यूज़ डेस्क का नेतृत्व किया। वर्तमान में सा. "क्राइम अगेंस्ट न्यूज", दैनिक "तेजस रिपोर्टर" और कई डिजिटल प्लेटफार्म के संपादकीय प्रमुख हैं। सामाजिक सरोकारों, विशेषकर हाशिए पर खड़े वर्ग और अन्याय के मुद्दों पर लेखन में विशेष रुचि रखते हैं। इसके साथ ही "जिनोदय" और "पंकज का पंच" जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के निदेशक हैं, जो जनचेतना और वैचारिक संवाद को बढ़ावा देने का माध्यम हैं।

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