
जीवन भर की धर्मसाधना का उत्कर्ष: बूंदी की मनोरमा देवी बनीं आर्यिका 105 वासपूज्य मति माताजी
📰 पारस जैन ‘पार्श्वमणि’ कोटा जयपुर | धर्म केवल ग्रंथों का अध्ययन नहीं, बल्कि उसे आचरण में उतारना ही सच्ची साधना है। जैन दर्शन का मूल संदेश—“जीव अलग है, पुद्गल अलग है”—केवल शास्त्रीय वाक्य नहीं, बल्कि आत्मबोध की दिशा में पहला कदम है। यही तत्वज्ञान बूंदी निवासी श्रीमति मनोरमा देवी

























































