डिजिटल सिस्टम में सेंध : साइबर तहसील के सहारे करोड़ों की जमीन हड़पने का सनसनीखेज खेल

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शिवपुरी । जिले की पोहरी तहसील के ग्राम जाखनौद में फर्जी रजिस्ट्री का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और डिजिटल सिस्टम की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पारदर्शिता और त्वरित सेवाओं के उद्देश्य से शुरू की गई “साइबर तहसील” प्रक्रिया को ही शातिर आरोपियों ने अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर लिया।

फर्जी दस्तावेजों से रचा गया पूरा षड्यंत्र

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गांव निवासी मुकेश आदिवासी ने कथित रूप से अपने पिता का नाम बदलकर खुद को जमीन का वैध मालिक दर्शाया। इसके बाद सुवरन आदिवासी, रवि धाकड़ और मनोज धाकड़ के साथ मिलकर एक सुनियोजित योजना बनाई गई। आरोप है कि 25 सितंबर 2025 को सर्वे नंबर 206, रकबा 1.62 हेक्टेयर भूमि का कूटरचित विक्रय पत्र तैयार कर उसे मात्र 12 लाख रुपये में बेचना दिखाया गया।

साइबर तहसील से कराया नामांतरण, सिस्टम पर सवाल

हैरानी की बात यह है कि 28 अक्टूबर 2025 को इसी फर्जी दस्तावेज के आधार पर “साइबर तहसील” के माध्यम से नामांतरण आदेश भी प्राप्त कर लिया गया। यानी फर्जी रजिस्ट्री के साथ-साथ सरकारी ऑनलाइन सिस्टम से नामांतरण भी हो गया, जो पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है।

सब-रजिस्ट्रार कार्यालय की भूमिका संदिग्ध

इस मामले में सब-रजिस्ट्रार कार्यालय की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। बिना पर्याप्त जांच-पड़ताल के संदिग्ध दस्तावेजों का पंजीयन होना गंभीर लापरवाही या संभावित मिलीभगत की ओर इशारा करता है। बताया जा रहा है कि दस्तावेजों में लगे फोटो और हस्ताक्षर तक संदिग्ध हैं, इसके बावजूद रजिस्ट्री होना जांच व्यवस्था की कमजोरी को उजागर करता है।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

गौरतलब है कि यसूत्रों के अनुसार, फर्जी नामांतरण के बाद अब संबंधित भूमि को आगे बेचने की कोशिश की जा रही है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो असली हकदार के लिए न्याय पाना और भी मुश्किल हो सकता है।

यह कोई पहला मामला नहीं है। कुछ माह पूर्व भी पोहरी क्षेत्र में इसी तरह की फर्जी रजिस्ट्री का मामला सामने आया था, लेकिन जांच के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई गई। ठोस कार्रवाई के अभाव में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति प्रशासन की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगा रही है।

जमीन को आगे बेचने की तैयारी, बढ़ी चिंता

सूत्रों के अनुसार, फर्जी नामांतरण के बाद अब संबंधित भूमि को आगे बेचने की कोशिश की जा रही है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो असली हकदार के लिए न्याय पाना और भी मुश्किल हो सकता है।

प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे बड़े सवाल

इस पूरे मामले में प्रशासन की चुप्पी सबसे बड़ा सवाल बनकर सामने आई है। आखिर बिना ठोस सत्यापन के इस तरह की रजिस्ट्री और नामांतरण कैसे संभव हो रहे हैं? क्या यह महज लापरवाही है या फिर कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय है?

पीड़ित पक्ष पहुंचा न्यायालय, कार्रवाई की मांग

पीड़ित पक्ष ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का निर्णय लिया है। साथ ही प्रशासन से मांग की है कि संबंधित भूमि पर किसी भी नए विक्रय पत्र के निष्पादन पर तत्काल रोक लगाई जाए और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

सिस्टम की विश्वसनीयता पर खतरा

यह मामला केवल एक जमीन विवाद नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की साख से जुड़ा हुआ है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो “साइबर तहसील” जैसी डिजिटल व्यवस्था पर जनता का भरोसा कमजोर पड़ सकता है।
इनका कहना है
“मेरी जमीन को कुछ लोगों ने हड़पने का प्रयास किया है, मेने प्रशासन से निष्पक्ष जांच करने की मांग की है, मेने प्रशासन से मांग की है कि जिन लोगों ने भी मेरे साथ ऐसा काम किया है, उन लोगों पर सख्त से सख्त कार्यवाही की जाए, थाने में एफआईआर की जाए।”
मुकेश आदिवासी, शिकायत कर्ता
मामला मेरे संज्ञान में आया है में दिखवा लेता हूं, यदि फर्जी तरीके से रजिस्ट्री हुई है तो मामले की जांच करवाकर दोषियों पर कार्यवाही की जाएगी।
अनुपमशर्मा, एसडीएम

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Atul Kumar Jain
Author: Atul Kumar Jain

अतुल कुमार जैन निरंतर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मध्यप्रदेश के शिवपुरी क्षेत्र की जमीनी खबरों, स्थानीय मुद्दों और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर इनकी विशेष पकड़ है। क्षेत्र की हर छोटी-बड़ी हलचल पर इनकी पैनी नजर रहती है। वर्तमान में तेजस रिपोर्टर के साथ जुड़कर शिवपुरी क्षेत्र की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और निष्पक्ष एवं प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से अपनी सशक्त पहचान बना रहे हैं।

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