📰 स्थानीय संवाददाता
मंडीदीप | शहर में घरेलू गैस की परेशानी के बीच कालाबाजारी का मामला सामने आया है। खाद्य विभाग ने वार्ड क्रमांक 23 स्थित बिंदिया कॉलोनी (रेलवे अंडर ब्रिज के पास) में संचालित एक गैस प्वाइंट पर छापा मारकर अवैध रिफिलिंग का खुलासा किया।

जांच के दौरान पाया गया कि घरेलू एलपीजी सिलेंडरों से गैस निकालकर छोटे सिलेंडरों में भरी जा रही थी और करीब ₹250 प्रति किलो की दर से बेची जा रही थी। कार्रवाई में टीम ने मौके से 5 सिलेंडर जब्त किए, जिनमें 4 भरे हुए थे, जबकि एक सिलेंडर से गैस का ट्रांसफर जारी था। इसके अलावा गैस ट्रांसफर में उपयोग होने वाले उपकरण, तौल कांटा और अन्य सामग्री भी बरामद की गई।

खाद्य विभाग के अनुसार इस अवैध कारोबार में शामिल अवध नारायण विश्वकर्मा और कर्मचारी संदीप ठाकुर के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई स्थानीय शिकायतों के आधार पर की गई।
हालांकि इस कार्रवाई के बाद एक बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है—
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क्या सिर्फ एक दुकानदार पर कार्रवाई काफी है?
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क्या अधिकारियों को इस नेटवर्क की गहराई तक जाकर यह पता नहीं लगाना चाहिए कि घरेलू गैस की कालाबाजारी किस स्तर पर और किन-किन लोगों की मिलीभगत से हो रही है?
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क्या इस छोटे स्तर की कार्रवाई से बड़े गैस माफिया तक पहुंचा जा सकेगा?
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि प्रशासन कड़ी दर कड़ी जोड़ते हुए जांच को आगे बढ़ाए, तो इस अवैध कारोबार के पीछे काम कर रहे बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकता है।
गरीब का चूल्हा कैसे जलेगा?
इस कार्रवाई के बाद एक और गंभीर सवाल सामने आता है— जो श्रमिक और कमजोर वर्ग छोटे सिलेंडरों के भरोसे अपना गुजारा करते हैं, उनका चूल्हा कैसे जलेगा?

हकीकत यह है कि औद्योगिक क्षेत्र होने के चलते बड़ी संख्या में मजदूर, किराएदार और अस्थायी कामगार छोटे सिलेंडरों पर निर्भर हैं, क्योंकि उनके पास नियमित घरेलू कनेक्शन नहीं होता। ऐसे में जब अवैध रिफिलिंग पर कार्रवाई होती है, तो इसका सीधा असर इसी वर्ग पर पड़ता है।
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क्या शासन-प्रशासन को इस वर्ग के लिए किफायती और वैध छोटे गैस कनेक्शन उपलब्ध कराने की व्यवस्था नहीं करनी चाहिए?
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क्या बाजारों में खुलेआम बिक रहे अमानक सिलेंडर, पाइप और गैस उपकरणों पर सख्ती से रोक नहीं लगनी चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि,
जब तक वैकल्पिक और सुलभ व्यवस्था नहीं होगी,
तब तक ऐसे अवैध नेटवर्क पनपते रहेंगे

सवाल सीधा है – क्या कार्रवाई केवल छोटे दुकानदारों को पकड़ने तक सीमित रहेगी, या व्यवस्था सुधारकर गरीब की रसोई भी सुरक्षित की जाएगी?
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Author: PANKAJ JAIN
पत्रकारिता में 2009 से सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। "दैनिक अग्निबाण" में लंबी पारी के बाद "SCN NEWS" सहित कई संस्थानों में न्यूज़ डेस्क का नेतृत्व किया। वर्तमान में सा. "क्राइम अगेंस्ट न्यूज", दैनिक "तेजस रिपोर्टर" और कई डिजिटल प्लेटफार्म के संपादकीय प्रमुख हैं। सामाजिक सरोकारों, विशेषकर हाशिए पर खड़े वर्ग और अन्याय के मुद्दों पर लेखन में विशेष रुचि रखते हैं। इसके साथ ही "जिनोदय" और "पंकज का पंच" जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के निदेशक हैं, जो जनचेतना और वैचारिक संवाद को बढ़ावा देने का माध्यम हैं।






