आदिवासी छात्रावास में बदहाल व्यवस्था : बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से खिलवाड़, टमाटरों में कीड़े और सड़ी-गली सब्जियों ने खोली पोल, जिम्मेदारों पर उठे सवाल

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रिपोर्ट-सूरज मेहरा
छिंदवाड़ा | मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के अमरवाड़ा ब्लॉक के लछुआ गांव में स्थित आदिम जनजाति विभाग द्वारा संचालित सीनियर आदिवासी छात्रावास में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। जब तेजस रिपोर्टर की टीम ने छात्रावास का निरीक्षण किया, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

  • बदहाल छात्रावास व्यवस्थाएं : बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा
  • गंदगी, खराब खाना और सुरक्षा के अभाव में छात्रावास की शर्मनाक स्थिति
  • अधीक्षक नदारद, अग्निशमन उपकरण एक्सपायर्ड: कौन है जिम्मेदार?
  • सरकार की योजनाओं से वंचित आदिवासी छात्र, लचर प्रबंधन से संकट गहराया
  • तेजस रिपोर्टर की विशेष पड़ताल में बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ पर खुलासा

अधीक्षक की गैरमौजूदगी

छात्रावास में पहुंचने पर अधीक्षक दीपक कुमार पगारे मौके पर मौजूद नहीं थे। छात्रावास के चौकीदार ने उन्हें फोन कर बुलाया। अधीक्षक की अनुपस्थिति ने छात्रावास की लचर प्रबंधन व्यवस्था की पोल खोल दी।

खराब खाद्य सामग्री : बच्चों के स्वास्थ्य पर खतरा

रसोई घर में टमाटरों में कीड़े लगे हुए पाए गए। मटर कई दिनों से सूखी और खराब पड़ी थी। सड़ी-गली सब्जियों से भोजन तैयार किया जा रहा था। यह स्थिति बच्चों के स्वास्थ्य को गंभीर बीमारियों की ओर धकेल सकती है। सवाल उठता है कि इन लापरवाहियों का जिम्मेदार कौन है?

स्वच्छता के नाम पर बदइंतजामी

छात्रावास में शौचालय इतने बदबूदार थे कि वहां महीनों से सफाई नहीं हुई लग रही थी। वहीं, पीने के पानी की टंकियां गंदी हालत में नीचे पड़ी मिलीं। यह स्पष्ट है कि बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर घोर लापरवाही बरती जा रही है।

सुरक्षा के अभाव में बढ़ता खतरा

यदि छात्रावास में आग लगने जैसी कोई आपदा हो जाए, तो उसे रोकने के लिए अग्निशमन उपकरण की व्यवस्था नाकाफी है। वहां मौजूद उपकरणों की एक्सपायरी डेट कब की खत्म हो चुकी थी। यह बच्चों के जीवन के साथ खुला खिलवाड़ है।

सीसीटीवी कैमरों का अभाव

छात्रावास में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने का प्रावधान है। लेकिन मौके पर एक भी कैमरा नहीं मिला। यह सुरक्षा के प्रति प्रशासन की उदासीनता को दर्शाता है।

प्रबंधन के सवालों पर गोलमोल जवाब

जब अधीक्षक से इन अनियमितताओं पर सवाल किए गए, तो उन्होंने स्पष्ट जवाब देने के बजाय गोलमोल बातों से स्थिति को टालने का प्रयास किया।

सरकारी योजनाओं से वंचित आदिवासी छात्र

राज्य में नई सरकार को एक साल पूरा हो गया है, लेकिन आदिवासी छात्रों को अब भी मूलभूत सुविधाओं और योजनाओं से वंचित रखा जा रहा है। यह स्थिति न केवल चिंताजनक है, बल्कि सरकार की प्राथमिकताओं पर भी सवाल खड़े करती है।
ऐसे में तेजस रिपोर्टर यह मांग करता है कि आदिवासी छात्रावासों की गहन जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ न हो।
इनका कहना है
“आपके माध्यम से मामला मेरी जानकारी में आया है। जल्द ही जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।”
सहायक आयुक्त, छिंदवाड़ा

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Author: Tejas Reporter

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