📰 अतुल कुमार जैन, बामौर कलां | बामौर कलां क्षेत्र में शुक्रवार को आए भीषण आंधी-तूफान और बेमौसम बारिश ने जमकर कहर बरपाया। इस प्राकृतिक आपदा का सबसे दर्दनाक दृश्य माँ बगला वाली गौशाला में देखने को मिला, जहाँ प्रकृति के रौद्र रूप ने गौशाला के बुनियादी ढांचे को तहस-नहस कर दिया। चंद मिनटों के तूफान ने गौशाला प्रबंधन को लाखों की आर्थिक क्षति पहुँचाई है।

हवा में खिलौनों की तरह उड़े टीनशेड गौशाला अध्यक्ष अभिषेक जैन ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि तूफान इतना शक्तिशाली था कि गौशाला के पीछे बना लगभग 260 फुट लंबा और 10 फुट चौड़ा विशाल टीनशेड जड़ से उखड़ गया। यह भारी-भरकम टीनशेड हवा में उड़कर करीब 200 फीट दूर जाकर पास के महुआ के पेड़ों से टकराया और पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इसके अलावा, शेड क्रमांक-1 और भूसा गोदाम के ऊपर लगे टीन भी उड़ गए, जिससे पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई।
चार से छह लाख के नुकसान का अनुमान
गौशाला प्रबंधन के मुताबिक, इस हादसे में करीब 4 से 6 लाख रुपये के नुकसान का प्रारंभिक अनुमान है। टीनशेड के साथ-साथ वहां लगे सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षा लाइटें और बिजली के पोल भी उखड़ गए हैं। विद्युत व्यवस्था ठप होने के कारण गौशाला देर रात तक अंधेरे में डूबी रही, जिससे सेवादारों को गौवंश की देखरेख में भारी समस्याओं का सामना करना पड़ा।
बड़ा हादसा टला: गौमाता की कृपा रही अपरंपार
गौभक्तों का मानना है कि यह गौमाता का ही आशीर्वाद था कि इतनी बड़ी आपदा के बावजूद किसी भी गौवंश या सेवादार को जानमाल की हानि नहीं हुई। जिस स्थान पर शेड गिरा, वहां आमतौर पर सैकड़ों गायें विश्राम करती हैं। टीनशेड गिरने से तीन स्थानों से बाउंड्रीवाल भी टूट गई है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि यह आपदा दिन के व्यस्त समय में आती, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती थी।
प्रशासन से सहायता की गुहार
घटना के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण और गौसेवकों ने मौके पर पहुँचकर स्थिति का जायजा लिया। गौशाला समिति और क्षेत्रवासियों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द नुकसान का सर्वे कराकर गौशाला को उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि बरसात के मौसम से पहले गौवंश के लिए पुनः सुरक्षित छत का इंतजाम किया जा सके।
इनका कहना है
“हमारी ‘माँ बगला वाली गौशाला’ में आज आई भीषण आंधी ने भारी तबाही मचाई है। आप देख सकते हैं कि लोहे के भारी-भरकम टिन शेड उखड़कर करीब 200 फीट दूर जा गिरे हैं। यदि पीछे महुआ का पेड़ न होता, तो यह और भी दूर जाकर किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते थे। इस शेड में रोजाना 200 से 300 गौवंश आश्रय लेते हैं। ईश्वर की कृपा रही कि इस आपदा में किसी भी गौवंश को चोट नहीं आई है, लेकिन हमारा आर्थिक नुकसान बहुत बड़ा है। क्षेत्र के लोगों ने एक-एक पैसा जोड़कर करीब 4 से 6 लाख की लागत से इसे बनवाया था। अब हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती इन सैकड़ों गौवंशों को सुरक्षित रखने की है, क्योंकि भूसा घर और मुख्य शेड, दोनों ही पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।”
अभिषेक जैन, अध्यक्ष मां बंगला बाली गौशाला
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Author: Atul Kumar Jain
अतुल कुमार जैन निरंतर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मध्यप्रदेश के शिवपुरी क्षेत्र की जमीनी खबरों, स्थानीय मुद्दों और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर इनकी विशेष पकड़ है। क्षेत्र की हर छोटी-बड़ी हलचल पर इनकी पैनी नजर रहती है। वर्तमान में तेजस रिपोर्टर के साथ जुड़कर शिवपुरी क्षेत्र की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और निष्पक्ष एवं प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से अपनी सशक्त पहचान बना रहे हैं।







