विधायक लिखी थार का कहर : छात्राओं को टक्कर, आरोपी विधायक पुत्र पर केस… प्रीतम लोधी बोले—जनता सर्वोपरि। लेकिन क्या मिलेगा न्याय?

SHARE:

📰 अतुल कुमार जैन
शिवपुरी । जिले के करेरा क्षेत्र में गुरुवार को एक विवादित सड़क हादसा सामने आया, जहां विधायक लिखी थार गाड़ी से स्कूल जा रही छात्राओं के दुपहिया वाहन को टक्कर मार दी गई। मामले में पुलिस ने पिछोर विधायक प्रीतम लोधी के पुत्र दिनेश लोधी के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है।
जानकारी के अनुसार, करेरा के मुख्य बाजार में छात्राएं दुपहिया वाहन से स्कूल जा रही थीं, तभी पीछे से आ रही थार गाड़ी ने उन्हें टक्कर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, वाहन पर नंबर प्लेट की जगह “विधायक” लिखा था और शीशे पर विधायक प्रीतम लोधी का नाम अंकित था।

घटना के बाद छात्राओं ने पुलिस से शिकायत की। बताया गया कि आरोपी दिनेश लोधी भी थाने पहुंचा और उसने छात्राओं पर ही लापरवाही से वाहन चलाने का आरोप लगाया।

विधायक का बयान: “पुत्र से पहले जनता”

घटना के बाद विधायक प्रीतम लोधी ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि—
“चाहे मेरा पुत्र हो या परिवार, जनता सर्वोपरि है। पीड़ित को न्याय मिलना चाहिए और पुलिस निष्पक्ष कार्रवाई करे।”
उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया पर घटना को लेकर “पापा विधायक हैं हमारे” लिखते हुए सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता के प्रभाव में कानून की अनदेखी हो रही है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने लिखा –
पापा विधायक हैं हमारे !
मध्यप्रदेश के पिछोर विधानसभा, शिवपुरी से भाजपा विधायक प्रीतम लोधी के सुपुत्र ने अपनी गाड़ी से कई लोगों को कुचला, जिसमें सभी लोग गंभीर रूप से घायल हैं। सत्ता के मद में चूर विधायक पुत्र का कानून को ताक पर रखने का रवैया बेहद शर्मनाक है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि घटना के बाद आरोपी का बेखौफ होकर सामान्य दिनचर्या में लौट जाना यह दर्शाता है कि उसे कानून का कोई डर नहीं है। क्या सत्ता का संरक्षण ही अब कानून से ऊपर होने का प्रमाण बन गया है?

यह पहली बार नहीं है पूर्व में भी ऐसे मामलों में नाम सामने आ चुका है। आखिर कब तक रसूख के दम पर आम जनता की जान से खिलवाड़ होता रहेगा ?

कानून का माखौल

तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि गाड़ी की नंबर प्लेट पर नंबर की जगह पार्टी सिंबल के साथ “विधायक” लिखा हुआ है—और यही दृश्य अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।
यह सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं…
यह सत्ता के नशे में कानून को खुली चुनौती देने जैसा है। जहाँ आम आदमी एक छोटी सी गलती पर चालान भरता है,

वहीं सत्ता से जुड़े लोग नियमों को अपनी सुविधा के अनुसार मोड़ते नजर आते हैं। नंबर प्लेट, जो पहचान और जवाबदेही का प्रतीक होती है,
उसे रौब और पहचान का माध्यम बना दिया गया—
  • क्या यह कानून की धज्जियां उड़ाना नहीं है?
  • क्या सड़क पर चलने के नियम अब “समान” नहीं रहे?
  • क्या रसूख रखने वालों के लिए कानून सिर्फ एक औपचारिकता बन गया है?
यह दृश्य सिर्फ एक गाड़ी का नहीं…
यह उस मानसिकता का आईना है, जिसमें सत्ता खुद को कानून से ऊपर समझने लगती है।
और यही सबसे बड़ा खतरा है—
क्योंकि जब कानून किताबों में रह जाए और सड़क पर “पावर” चले, तो आम आदमी की सुरक्षा सिर्फ किस्मत के भरोसे रह जाती है।

जांच में जुटी पुलिस

पुलिस ने मामले में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घटना के बाद क्षेत्र में काफी चर्चा बनी हुई है और लोग कार्रवाई पर नजर बनाए हुए हैं।

ये ख़बर आपने पढ़ी देश के तेजी से बढ़ते लोकप्रिय हिंदी न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म 🖱️www.tejasreporter.com पर
📱आज तेजी से बदलते परिवेश में जहां हर क्षेत्र का डिजिटलीकरण हो रहा है, ऐसे में
📰 “दैनिक तेजस रिपोर्टर
🌐 www.tejasreporter.com सटीक समाचार और तथ्यात्मक रिपोर्ट्स लेकर आधुनिक तकनीक से लैस अपने डिजिटल प्लेटफार्म पर प्रस्तुत है। अपने निडर, निष्पक्ष, सत्य और सटीक लेखनी के साथ…
मैं पंकज जैन ✍🏻 और मेरे सहयोगी अब ⏱️24X7 आप तक देश विदेश की महत्वपूर्ण खबरों को पहुंचाने के लिए कटिबद्ध हैं।
ऐसी ही ताज़ा और अहम ख़बरों के लिए जुड़े रहें! सभी अपडेट्स व नोटिफिकेशन प्राप्ति के लिए नीचे दिए गए बेल आइकन पर क्लिक कर अभी सब्सक्राइब करें।
PANKAJ JAIN
Author: PANKAJ JAIN

पत्रकारिता में 2009 से सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। "दैनिक अग्निबाण" में लंबी पारी के बाद "SCN NEWS" सहित कई संस्थानों में न्यूज़ डेस्क का नेतृत्व किया। वर्तमान में सा. "क्राइम अगेंस्ट न्यूज", दैनिक "तेजस रिपोर्टर" और कई डिजिटल प्लेटफार्म के संपादकीय प्रमुख हैं। सामाजिक सरोकारों, विशेषकर हाशिए पर खड़े वर्ग और अन्याय के मुद्दों पर लेखन में विशेष रुचि रखते हैं। इसके साथ ही "जिनोदय" और "पंकज का पंच" जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के निदेशक हैं, जो जनचेतना और वैचारिक संवाद को बढ़ावा देने का माध्यम हैं।

Join us on:

सबसे ज्यादा पड़ गई