खाकी की शेरनी! कौन हैं लेडी सिंघम SDOP शीला सुराना, एक तेज-तर्रार पुलिस ऑफिसर की प्रेरणादायी कहानी

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📰 पंकज जैन ‘प्रखर’ 
भोपाल | कुछ लोग जीवन में बड़ी तनख्वाह और आरामदायक करियर को सफलता मानते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो अपने सपनों को समाज की सेवा से जोड़ देते हैं। “खाकी का गौरव” कॉलम में आज हम ऐसी ही एक प्रेरणादायी कहानी लेकर आए हैं— मध्यप्रदेश पुलिस की तेज-तर्रार अधिकारी वर्तमान में रायसेन जिले के ओबेदुल्लागंज डिवीजन की एसडीओपी शीला सुराना की, जिन्होंने आकर्षक कॉर्पोरेट पैकेज को ठुकराकर समाज सेवा का रास्ता चुना।

मैं खाकी हूं… इसीलिए अपनों को रोता छोड़कर आई हूं…
यह सिर्फ एक शायरी नहीं, बल्कि एसडीओपी शीला सुराना के जीवन का सच है।
वो साफ कहती हैं —
“मैं नियम और कानून के अनुसार ही काम करती हूं, चाहे किसी का कितना भी दबाव क्यों न हो।”

उनके लिए खाकी सिर्फ वर्दी नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है —
जहां परिवार, भावनाएं और निजी जीवन से ऊपर कर्तव्य को रखा जाता है।

इंदौर की रहने वाली शीला सुराना बचपन से ही जैन संस्कारों, अनुशासन और सेवा भाव के वातावरण में पली-बढ़ीं। परिवार में मिले अहिंसा, संयम और समाज के प्रति जिम्मेदारी जैसे मूल्यों ने उनके व्यक्तित्व को गहराई से प्रभावित किया। यही संस्कार आगे चलकर उनके जीवन का मार्गदर्शन बने।

माइक्रोसॉफ्ट का ऑफर ठुकराकर चुनी सिविल सेवा

एमटेक (आईटी) की पढ़ाई पूरी करने के बाद शीला सुराना को माइक्रोसॉफ्ट जैसी प्रतिष्ठित कंपनी से साल 2009 में 13.5 लाख रुपये का पैकेज ऑफर हुआ। यह अवसर किसी भी युवा के लिए सपने जैसा होता है। लेकिन शीला के मन में एक अलग सपना था — समाज के लिए काम करने का, न्याय व्यवस्था का हिस्सा बनने का।

उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के यह बड़ा ऑफर ठुकरा दिया और सिविल सेवा की कठिन राह चुन ली। इस सफर में आने वाली चुनौतियों का उन्होंने पूरी दृढ़ता और मेहनत के साथ सामना किया और अपने समर्पण से हर बाधा को पार करते हुए अंततः पुलिस सेवा में अपना एक अलग स्थान बनाया।

संघर्ष, धैर्य और दृढ़ संकल्प की कहानी

2012 से उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी शुरू की। यह सफर आसान नहीं था, लेकिन उनके दृढ़ संकल्प और मेहनत ने उन्हें लगातार आगे बढ़ाया।
इस दौरान उनका चयन कई महत्वपूर्ण पदों पर हुआ —
                                         मध्य में एसडीओपी शीला सुराना
  • 2013 में भू-अभिलेख रजिस्ट्रार,
  • 2014 में लेबर ऑफिसर भोपाल,
  • और बाद में भोपाल, बड़वानी व देपालपुर में जेल सुपरिटेंडेंट के पद पर भी उन्होंने सेवाएं दीं।
  • यहां तक कि उनका चयन एसडीएम पद के लिए भी हुआ, लेकिन उनका सपना पुलिस सेवा में जाकर समाज की रक्षा करना था।
आखिरकार 13 फरवरी 2018 को उन्होंने पुलिस सेवा ज्वाइन की और डीएसपी के रूप में अपने कर्तव्य की शुरुआत की।

साहस और सेवा का दूसरा नाम

पुलिस सेवा में आने के बाद शीला सुराना ने हर चुनौती को पूरे साहस और जिम्मेदारी के साथ स्वीकार किया। अपने सख्त लेकिन संवेदनशील नेतृत्व के कारण वे लोगों के बीच “लेडी सिंघम” के नाम से भी जानी जाने लगीं।

खाकी का मान, इंसानियत के साथ

शीला सुराना सिर्फ एक सख्त पुलिस अधिकारी नहीं, बल्कि एक संवेदनशील इंसान भी हैं।
चाहे नशे के खिलाफ कार्रवाई हो, महिलाओं की सुरक्षा या भटकी हुई बच्चियों को सही रास्ता दिखाना — उन्होंने हर जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी से निभाया।
उनका मानना है —
“दिन के अंत में सुकून तभी मिलता है, जब लगे कि आज किसी की जिंदगी बेहतर बनाने में योगदान दिया है।”

साहस को मिला सम्मान

कोविड-19 महामारी के कठिन समय में जब पूरा देश संकट से गुजर रहा था, उस समय उन्होंने रतलाम में तैनाती के दौरान अपनी जान की परवाह किए बिना जनता की सेवा की।

उन्होंने डॉक्टरों और प्रशासन के साथ मिलकर लॉकडाउन का प्रभावी पालन करवाया और लोगों को जागरूक किया। उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए राज्य सरकार ने उन्हें “कोरोना योद्धा मेडल” और “उत्कृष्ट सेवा पदक” से सम्मानित किया।

परिवार – उनकी सबसे बड़ी ताकत

शीला सुराना की सफलता के पीछे उनके परिवार का मजबूत साथ भी रहा। तेजस रिपोर्टर से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि उनके पिता समाजसेवा से जुड़े हुए हैं, जिन्होंने उन्हें हमेशा समाज के लिए कुछ करने की प्रेरणा दी। मां ने उन्हें संस्कार और स्नेह दिया।

उनके भाई हाईकोर्ट में वकील हैं, जबकि उनके पति निजी कंपनी में बड़े ओहदे पर पदस्थ हैं, जिन्होंने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया। शीला का मानना है कि जब परिवार विश्वास और समर्थन देता है, तो कोई भी सपना दूर नहीं रहता।
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शीला का मानना है कि जब परिवार विश्वास और समर्थन देता है, तो कोई भी सपना दूर नहीं रहता।

युवाओं और महिलाओं के लिए संदेश

आज शीला सुराना की कहानी केवल एक पुलिस अधिकारी की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस सोच की कहानी है जिसमें संस्कार, संघर्ष, साहस और समाज सेवा का संकल्प एक साथ दिखाई देता है।

वे अक्सर युवाओं और विशेष रूप से महिलाओं को यह संदेश देती हैं —
अगर आपके इरादे मजबूत हैं और लक्ष्य समाज की भलाई है, तो कोई भी चुनौती आपको रोक नहीं सकती।” उनका मानना है कि सशक्त नारी से सशक्त समाज का निर्माण संभव है।

अपने अनुभवों के आधार पर वह महिलाओं व बच्चियों को करियर गाइडेंस देने और शिक्षा के लिए प्रेरित करने के लिए हमेशा तत्पर रहती हैं।

प्रेरणा की एक मिसाल

15 मार्च 2026 को ओबेदुल्लागंज में एसडीओपी के रूप में उनका 2 वर्ष का कार्यकाल पूर्ण हुआ। इस दौरान उन्होंने न केवल कानून व्यवस्था को मजबूत किया बल्कि जनता के दिलों में भी एक विश्वास कायम किया।

शीला सुराना की यह यात्रा हमें यह सिखाती है कि
सच्ची सफलता केवल बड़े वेतन या पद में नहीं, बल्कि उस काम में होती है जिससे समाज को सुरक्षा, न्याय और प्रेरणा मिलती है।

साहस और सूझबूझ से सुलझाया अपहरण का मामला

शीला सुराना के पुलिस करियर में कई चुनौतीपूर्ण मामले आए, लेकिन बाड़ी में एक बच्चे के अपहरण का मामला उनके साहस, सूझबूझ और नेतृत्व क्षमता की बड़ी मिसाल बन गया।

यह मामला बेहद संवेदनशील था। एक मासूम बच्चे के अचानक लापता होने से पूरे इलाके में दहशत और तनाव का माहौल बन गया था। परिवार गहरे सदमे में था और पुलिस पर बच्चे को सुरक्षित वापस लाने का भारी दबाव था।

ऐसे समय में शीला सुराना ने बेहद संयम और रणनीति के साथ पूरी जांच की कमान संभाली। उन्होंने पुलिस टीम के साथ लगातार काम करते हुए अपहरणकर्ताओं तक पहुंच बनाई और बच्चे को सुरक्षित बरामद कर लिया, साथ ही आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

इस सफल ऑपरेशन ने न केवल पीड़ित परिवार को राहत दी, बल्कि पुलिस की कार्यकुशलता और त्वरित कार्रवाई पर आमजन का भरोसा भी मजबूत किया।

इस साहसिक और सफल पुलिस कार्रवाई के लिए शीला सुराना को पुलिस विभाग द्वारा DGCR (Director General Commendation Roll) अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। यह सम्मान पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को विशेष बहादुरी, उत्कृष्ट कार्य, साहस, सूझबूझ और उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए प्रदान किया जाता है।

दरअसल, यह पुरस्कार उन पुलिसकर्मियों को दिया जाता है, जिन्होंने अपनी सामान्य ड्यूटी से आगे बढ़कर असाधारण कार्य करते हुए समाज और कानून व्यवस्था की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया हो।

कम उम्र और अपेक्षाकृत कम सेवाकाल में इस तरह का सम्मान प्राप्त करना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। यह न केवल शीला सुराना की कार्यकुशलता और साहस का प्रमाण है, बल्कि पुलिस सेवा के प्रति उनकी निष्ठा, समर्पण और कर्तव्यपरायणता को भी दर्शाता है।

निश्चित रूप से शीला सुराना का साहस, समर्पण और नेतृत्व उन सभी युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है, जो केवल बड़े पैकेज और आकर्षक नौकरियों के पीछे भागने की बजाय समाज के लिए कुछ सार्थक करना चाहते हैं। उनकी जीवन यात्रा यह साबित करती है कि सच्ची सफलता केवल व्यक्तिगत लाभ में नहीं, बल्कि समाज की भलाई और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में छिपी होती है।

अपने समर्पण, साहस और कर्तव्यनिष्ठा से शीला सुराना ने न केवल पुलिस महकमे का मान बढ़ाया है, बल्कि अपने शहर के गौरव को भी बढ़ाते हुए अपने परिवार और कुटुंब का नाम रोशन किया है। उनकी निष्ठा और सेवाभाव से प्रेरित होकर अनेक युवा आज समाज सेवा और प्रशासनिक सेवाओं की ओर कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

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ऐसे ही अधिकारियों की कहानियां यह साबित करती हैं कि खाकी केवल कानून का प्रतीक नहीं, बल्कि सेवा, साहस और संवेदनशीलता का सशक्त संगम है।

इसीलिए, अपने समर्पण, कर्तव्यनिष्ठा और प्रेरणादायक कार्यशैली के कारण
शीला सुराना वास्तव में “खाकी का गौरव” हैं।

तेजस रिपोर्टर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए यह विश्वास व्यक्त करता है कि उनकी कर्तव्यनिष्ठा, ईमानदारी और उत्कृष्ट कार्यशैली को देखते हुए आने वाले समय में उन्हें और बड़ी जिम्मेदारियां मिलेंगी तथा वे पदोन्नति के साथ समाज सेवा की नई ऊंचाइयों को छूती रहेंगी।


खाकी का सम्मान, देश का अभिमान
👉🏻 पढ़ते रहिए “खाकी का गौरव” –
तेजस रिपोर्टर के इस विशेष कॉलम में, जहां खाकी वर्दी के उन जांबाज़ अधिकारियों और कर्मियों की प्रेरणादायक कहानियां सामने लाई जाती हैं, जिन्होंने अपने साहस, सेवा और समर्पण से समाज में सुरक्षा और विश्वास की मिसाल कायम की है।
यहां हम आपको रूबरू कराएंगे उन असली नायकों से, जो दिन-रात अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए हर चुनौती का डटकर सामना करते हैं और खाकी का मान बढ़ाते हैं।
तो जुड़े रहिए “खाकी का गौरव” के साथ – जहां हर कहानी में होता है साहस का जज़्बा, कर्तव्य का सम्मान और प्रेरणा की नई उड़ान।
यदि आपके आसपास भी कोई ऐसा अधिकारी या कर्मी है, जिसकी कहानी लोगों तक पहुंचनी चाहिए, तो हमें जरूर बताएं।
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PANKAJ JAIN
Author: PANKAJ JAIN

पत्रकारिता में 2009 से सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। "दैनिक अग्निबाण" में लंबी पारी के बाद "SCN NEWS" सहित कई संस्थानों में न्यूज़ डेस्क का नेतृत्व किया। वर्तमान में सा. "क्राइम अगेंस्ट न्यूज", दैनिक "तेजस रिपोर्टर" और कई डिजिटल प्लेटफार्म के संपादकीय प्रमुख हैं। सामाजिक सरोकारों, विशेषकर हाशिए पर खड़े वर्ग और अन्याय के मुद्दों पर लेखन में विशेष रुचि रखते हैं। इसके साथ ही "जिनोदय" और "पंकज का पंच" जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के निदेशक हैं, जो जनचेतना और वैचारिक संवाद को बढ़ावा देने का माध्यम हैं।

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