स्थानीय संवाददाता
नरसिंहपुर। जनपद चावरपाठा के ग्राम पंचायत टेकापार में शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता द्वारा सीएम हेल्पलाइन पर की गई शिकायत के बाद हल्का पटवारी ने पोर्टल पर प्रतिवेदन देकर दावा किया कि ग्राम की शासकीय भूमि खसरा क्रमांक 314/1 (रकबा 12.75 हे. में से 0.405 हे.) से अतिक्रमण हटाकर भूमि को मुक्त करा दिया गया है। लेकिन ग्रामीणों के बयान और कब्जाधारी से हुई फोन पर बातचीत ने पूरे मामले को उलट कर रख दिया है।
पटवारी का दावा—अतिक्रमण हटाया, जुर्माना लगाया… पर हकीकत उलटी!
पटवारी द्वारा दिए गए प्रतिवेदन के अनुसार: कब्जाधारी प्रहलाद आमप्रसाद द्वारा भूमि पर फसल बोई गई थी। तहसीलदार तेंदुखेड़ा ने 11.03.2025 को कब्जा बेदखली आदेश जारी किया। ₹4000 का जुर्माना लगाया गया। प्रतिवेदन के अनुसार अतिक्रमण हटाकर भूमि “रिक्त” पाई गई। लेकिन ये पूरा दावा ग्रामीणों ने खारिज कर दिया है।

ग्रामीणों का बड़ा खुलासा—“जमीन अभी भी कब्जे में, चने की फसल बोई है”
गांव के लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि: जमीन पर अभी भी अवैध कब्जा जारी है। प्रतिवेदन में लिखी गई कार्रवाई जमीन पर कहीं दिखाई नहीं देती। कब्जाधारी ने अभी हाल ही में चने की बुआई की है।
फोन कॉल से खुला राज—कब्जाधारी ने खुद माना: “अभी चने बोए हैं… शिकायत बंद करा दो”
शिकायतकर्ता के मुताबिक; शिकायतकर्ता को खुद अवैध कब्जाधारी ने फोन पर कहा:
“गांव का मामला है, समझ लेंगे… अभी चने बोए हैं।”“शिकायत बंद कर दो।” “गांव में लगभग एक दर्जन लोग शासकीय भूमि पर कब्जा किए हुए हैं।” इस बातचीत ने पूरे प्रतिवेदन के दावों की पोल खोल दी है।
अब सवालों के घेरे में पटवारी—क्या झूठा प्रतिवेदन किसी ‘डील’ का नतीजा है?
शिकायतकर्ता का कहना है कि जब ग्रामीणों और कब्जाधारी के अनुसार जमीन पर अब भी फसल खड़ी है, और कोई बेदखली की कार्रवाई नहीं हुई,
तो फिर पटवारी ने सीएम हेल्पलाइन पर झूठी रिपोर्ट क्यों भेजी? क्या कब्जाधारी और पटवारी के बीच लेन–देन की संभावनाओं पर सवाल उठना लाजमी नहीं?
वर्तमान सरपंच की भूमिका संदिग्ध – क्या किया शासकीय भूमि बचाने के लिए?
गांव में लोग यह भी पूछ रहे हैं कि: वर्तमान सरपंच ने शासकीय भूमि को मुक्त कराने के लिए क्या कदम उठाए? यदि पूर्व सरपंच पर कब्जा कराने के आरोप हैं,
तो वर्तमान सरपंच की चुप्पी क्या इशारा करती है?
अब सभी की नजरें—हल्का पटवारी अर्जिता पाठक पर
शिकायत, प्रतिवेदन, ग्रामीणों के बयान और कब्जाधारी की स्वीकारोक्ति…
इन सबके बीच अब बड़ा सवाल यह है—क्या हल्का पटवारी अर्जिता पाठक वास्तविक कार्रवाई करेंगी या फाइलों में ही जमीन “मुक्त” दिखाकर मामला रफा-दफा कर दिया जाएगा?
टेकापार की यह घटना बताती है कि शासकीय भूमि संरक्षण के दावे और जमीनी हकीकत में कितना बड़ा अंतर है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस विसंगति पर क्या कदम उठाता है।
इनका कहना –
जो प्रतिवेदन है वो मई-जून में की गई कार्रवाई का है, अभी का नही !
अर्जिता पाठक
पटवारी
इनका कहना-
अगर अभी वर्तमान में करवाई नही की गई, तो पुराना प्रतिवेदन 14/12/2025 को पोर्टल पर डालकर गुमराह क्यों किया जा रहा है
शिकायतकर्ता
Author: SURAJ MEHRA
साल 2022 से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत "सूरज मेहरा" आज भी निरंतर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मध्यप्रदेश की राजनीति, करंट अफेयर्स में विशेष रुचि है , साथ ही ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव है , यहाँ मध्यप्रदेश की हर छोटी बड़ी हलचल पर नज़र रहती है





