कलेक्ट्रेट के गलियारों से लेकर खेल के मैदान तक, शहर में हर कोने पर कोई न कोई हलचल रहती है। कभी जनता अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद में अधिकारियों के दरवाजे खटखटाती है, तो कभी नेता जनता से जुड़ने के लिए खेल के मैदान में चौके-छक्के लगाते नजर आते हैं। इस हफ्ते, जनसुनवाई में कलेक्टर साहब की गैरमौजूदगी ने आवेदकों को निराश कर दिया, तो वहीं क्रिकेट के मैदान में विधायक जी की बल्लेबाजी ने समर्थकों में जोश भर दिया। आइए, इन घटनाओं पर एक नजर डालते हैं, कलेक्ट्रेट के गलियारों से!
जनता की उम्मीदों को झटका
जनसुनवाई में अपनी फरियाद लेकर आए लोगों की उम्मीदें उस वक्त धरी की धरी रह गईं जब उन्हें पता चला कि कलेक्टर साहब आज मौजूद नहीं हैं।

लोगों को भरोसा था कि साहब उनकी समस्या सुनेंगे और तत्काल फोन घुमा कर समाधान कर देंगे, लेकिन साहब की गैरमौजूदगी ने उनकी आशाओं को झटका दे दिया। कुछ मायूस लौट गए, तो कुछ उम्मीद लेकर घंटों इंतजार करते रहे।
अफसरों की बल्ले-बल्ले!
जहां जनता निराश थी, वहीं अफसरों के चेहरे पर अजीब सा सुकून नजर आया। आखिर साहब की गैरमौजूदगी का मतलब था—कोई फटकार नहीं, कोई डांट नहीं! रोज़मर्रा के तनाव से मुक्त अफसर, चैन की सांस लेते दिखे। कुछ फाइलों में उलझे तो कुछ चाय की चुस्कियों में मस्त दिखे। कई आवेदक वापस लौट गए, कुछ ने कहा—”चलो, अगले हफ्ते फिर किस्मत आजमाएंगे!”
जब विधायक जी बने बैट्समैन!
रायसेन में विधायक ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले में रोमांच चरम पर था। छठे साल में प्रवेश कर चुकी इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में कई टीमें भिड़ीं, लेकिन असली मुकाबला तब शुरू हुआ जब विधायक जी खुद मैदान में उतरे!

जैसे ही माननीय पहुंचे, ढोल-नगाड़ों की गूंज से पूरा स्टेडियम गूंज उठा। समर्थकों ने जोरदार स्वागत किया, खिलाड़ी जोश में भर गए। मुलाकातों का दौर खत्म होते ही विधायक जी ने बैट थामा और विधायक प्रतिनिधि की गेंद पर एक जबरदस्त शॉट जड़ा। गेंद हवा में गई और समर्थकों ने तालियों से पूरा माहौल सरगर्म कर दिया।
फिर क्या था, विधायक जी के समर्थक भी जोश में आ गए और लगे दनादन पुरस्कारों की घोषणा करने! खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाने के लिए दिल खोलकर इनाम बांटे गए।
कलेक्ट्रेट से क्रिकेट तक—दोनों जगह दिखी निराली तस्वीर







