संवाददाता आजम लाला भोपाल, मध्यप्रदेश | एक तरफ भोपाल नगर निगम शहरभर में “स्वच्छता अभियान” के बड़े-बड़े दावे करता नज़र आता है, तो दूसरी तरफ पुराने भोपाल की गलियों में पसरी गंदगी उन दावों की हकीकत बयां करती दिखाई दे रही है। ईद जैसे पाक और मुकद्दस त्योहार से ठीक पहले शहर के कई वार्ड बदइंतज़ामी, सीवेज और कचरे की मार झेल रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अफसरों की कुर्सियों तक शायद इन हालात की बदबू अभी पहुंची नहीं है।

पुराने भोपाल के कई इलाकों में सड़कें सीवेज के गंदे पानी से लबालब हैं, नालियां सड़ते कचरे से उफन रही हैं और जगह-जगह कचरे के ढेरों में आग धधकती दिखाई दे रही है। हालात ऐसे हैं कि लोग त्योहार की तैयारियों से ज्यादा गंदगी और जहरीले धुएं से परेशान हैं।

ऐशबाग की बिस्मिल्लाह कॉलोनी में एक नम्बर रेलवे स्टेशन और रेलवे थाना से चंद कदम दूर बने कचरा घर में लगी आग ने स्थानीय लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दीं। उठती लपटों और जहरीले धुएं से आसपास के मकानों में रहने वाले बच्चे और बुजुर्ग परेशान हैं। लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतों के बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं।

“काग़ज़ों में शहर चमकता रहा रात-दिन,
हक़ीक़त में हर गली गंदगी से कराहती रही…”
स्थानीय लोगों का आरोप है कि निगम प्रशासन सिर्फ फोटो और कागजी सफाई तक सीमित होकर रह गया है। कहीं दो सफाई कर्मचारियों की तस्वीरें खिंच गईं या एक नाली साफ हो गई, तो सोशल मीडिया पर ऐसा प्रचार किया जाता है मानो पूरे वार्ड की तस्वीर बदल गई हो।

ईद से पहले वार्ड 77 में दुकानों और अस्पतालों के सामने बहता गंदा पानी, वार्ड 78 में कचरे के ढेर, वार्ड 41 में बदबू मारती नालियां और वार्ड 19 में सीवेज से डूबी सड़कें निगम के “स्वच्छ भोपाल” अभियान पर बड़े सवाल खड़े कर रही हैं।

सूत्रों के मुताबिक निगम के रिकॉर्ड में सफाई कर्मचारियों की संख्या काफी दिखाई जाती है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर उतने कर्मचारी नजर नहीं आते। आरोप यह भी हैं कि कुछ कर्मचारी सिर्फ हाज़िरी लगाकर गायब हो जाते हैं और निजी कामों में लग जाते हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सवाल जरूर उठ रहे हैं कि अगर कर्मचारी मौजूद हैं तो फिर शहर की हालत ऐसी क्यों है?

“घर की दीवारें अक्सर वो राज़ जानती हैं,
जो दफ़्तरों की फाइलों में कभी दर्ज नहीं होते…”
सबसे बड़ा सवाल उस कचरा घर पर उठ रहा है जहां आग के बेहद करीब बिजली का ट्रांसफार्मर मौजूद है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर आग ट्रांसफार्मर तक पहुंच जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था। जहरीले धुएं से दमे के मरीजों और बच्चों की सेहत पर भी खतरा मंडरा रहा है।

लोगों का आरोप है कि कई बार कचरा उठाने की मशक्कत से बचने के लिए ही कचरे में आग लगा दी जाती है ताकि ढेर जल्दी खत्म हो जाए। हालांकि निगम प्रशासन की ओर से इस पर कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि हर वार्ड और चौराहे पर निगम हेल्पलाइन और व्हाट्सएप नंबर सार्वजनिक किए जाएं ताकि लोग सीधे गंदगी, जाम नालियों और गायब डोर-टू-डोर वाहनों की शिकायत वीडियो और तस्वीरों के जरिए भेज सकें। साथ ही इन शिकायतों की निगरानी सीधे निगम कमिश्नर स्तर से हो ताकि कागजी सफाई और जमीनी हकीकत का फर्क साफ दिखाई दे सके।
“जिस शहर की गलियों में बदबू बस जाए,
वहां नारों से नहीं… नीयत से सफाई होती है…”
Author: SURAJ MEHRA
साल 2022 से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत "सूरज मेहरा" आज भी निरंतर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मध्यप्रदेश की राजनीति, करंट अफेयर्स में विशेष रुचि है , साथ ही ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव है , यहाँ मध्यप्रदेश की हर छोटी बड़ी हलचल पर नज़र रहती है। तेजस रिपोर्टर में प्रबंध संपादक का पदभार संभाल रहे हैं।






