दस दिनों से रिहायशी इलाकों में विचरण कर रही मादा टाइगर एमटी-6 को किया गया ट्रेंकुलाइज

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रिपोर्ट – अतुल कुमार जैन
शिवपुरी | माधव टाइगर रिजर्व में हाल ही में लाई गई मादा टाइगर एमटी-6 को आखिरकार ट्रेंकुलाइज कर रेस्क्यू कर लिया गया। बीते करीब दस दिनों से मादा टाइगर जंगल से बाहर निकलकर लगातार ग्रामीण और रिहायशी क्षेत्रों में विचरण कर रही थी, जिससे न केवल ग्रामीणों में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया था, बल्कि स्वयं टाइगर के जीवन पर भी खतरा मंडराने लगा था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह मादा टाइगर की लोकेशन माधव टाइगर रिजर्व के भरकुली गेट के समीप मिली। इसके बाद वन विभाग का अमला दोनों प्रशिक्षित हाथियों पर सवार होकर मौके पर पहुंचा और सावधानीपूर्वक ऑपरेशन चलाकर मादा टाइगर को ट्रेंकुलाइज किया गया। रेस्क्यू के दौरान किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
उल्लेखनीय है कि मादा टाइगर एमटी-6 को 27 दिसंबर को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से माधव टाइगर रिजर्व में लाया गया था। यहां आने के बाद से ही वह अपने निर्धारित क्षेत्र में स्थिर नहीं हो सकी और लगातार जंगल से बाहर निकलकर आसपास के गांवों की ओर बढ़ती रही। बीते दस दिनों में मादा टाइगर ग्राम डोंगर, सरदारपुरा, सुरवाया, मझेरा, मोहम्मदपुर और खुटैला सहित कई गांवों में देखी गई।
31 दिसंबर को ग्राम डोंगर में मादा टाइगर ने एक बुजुर्ग ग्रामीण पर हमला भी कर दिया था। हालांकि सौभाग्यवश वह किसी तरह अपनी जान बचाने में सफल रहा। इसके अलावा इस दौरान मादा टाइगर ने कई पालतू मवेशियों का शिकार भी किया, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश और भय दोनों बढ़ते चले गए।
लगातार रिहायशी इलाकों में टाइगर की मौजूदगी के कारण ग्रामीण अपने घरों से बाहर निकलने में भी डर महसूस कर रहे थे। बीते दिनों ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी थी कि यदि मादा टाइगर को शीघ्र जंगल में सुरक्षित नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह निर्णय पूरी तरह एहतियात और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। एक ओर जहां ग्रामीणों की जान-माल की सुरक्षा आवश्यक थी, वहीं दूसरी ओर लगातार आबादी वाले क्षेत्रों में घूमना मादा टाइगर के लिए भी जानलेवा साबित हो सकता था।
संघर्ष की आशंका ने भी बढ़ाई चिंता
टाइगर रिजर्व से जुड़े विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, मादा टाइगर जिस दिशा में आगे बढ़ रही थी, वहां पहले से अन्य बाघों की टेरिटरी स्थित है। यदि एमटी-6 उस क्षेत्र में प्रवेश करती तो बाघों के बीच आपसी संघर्ष की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती थी, जिससे गंभीर परिणाम सामने आ सकते थे। इसी संभावित खतरे को ध्यान में रखते हुए भी मादा टाइगर को ट्रेंकुलाइज कर सुरक्षित स्थान पर रखने का निर्णय लिया गया। हालांकि इस बिंदु पर वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी आधिकारिक रूप से कुछ भी कहने से बचते नजर आए।
फिलहाल मादा टाइगर एमटी-6 की स्वास्थ्य जांच की जा रही है और आगे की रणनीति विशेषज्ञों की निगरानी में तय की जाएगी, ताकि मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव की स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।

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Raju Atulkar
Author: Raju Atulkar

"पत्रकारिता सिर्फ पेशा नहीं, जिम्मेदारी भी है…" साल 2015 से कलम की स्याही से सच को उजागर करने की यात्रा जारी है। समसामयिक मुद्दों की बारीकियों को शब्दों में ढालते हुए समाज का आईना बनने की कोशिश। — राजू अतुलकर, तेजस रिपोर्टर डिजिटल

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