वंदे मातरम् के 150 वर्ष: सेवा समिति ने 150 दीपों से जगाई देशभक्ति की लौ

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रिपोर्ट – राजू अतुलकर
मंडीदीप | औद्योगिक नगरी में शनिवार की शाम देशभक्ति और सांस्कृतिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला। अवसर था — राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम्” की 150वीं वर्षगांठ का। इस ऐतिहासिक मौके पर सेवा समिति ने बास्केटबॉल मैदान पर 150 दीप प्रज्ज्वलित कर एक अनोखी रंगोली बनाई, जो “वंदे मातरम्” के अक्षरों में सजी थी। दीपों की उजास और वातावरण में गूंजते देशभक्ति गीतों ने पूरे परिसर को राष्ट्रप्रेम की भावना से आलोकित कर दिया।
वंदे मातरम् – शब्द नहीं, भावना है
कार्यक्रम की अध्यक्षता सेवा समिति के अध्यक्ष जीवन सिंह पाल ने की। उन्होंने कहा कि “वंदे मातरम्” केवल एक गीत नहीं, बल्कि हमारे स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा है। इसकी गूंज ने उस दौर में लाखों भारतीयों के दिलों में स्वतंत्रता की ज्वाला प्रज्वलित की थी।
पाल ने बताया कि समिति द्वारा इस वर्ष को ‘वंदे मातरम् वर्ष’ के रूप में मनाया जाएगा। इसके तहत विद्यालयों, महाविद्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर देशभक्ति गीत, निबंध लेखन, चित्रकला और वाद-विवाद प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। उद्देश्य है — इस गीत की भावना और महत्व को नई पीढ़ी तक पहुंचाना, ताकि युवाओं में राष्ट्र के प्रति गौरव और कर्तव्यबोध जागृत हो।
यह दिन एक गीत नहीं, राष्ट्रीय चेतना का उत्सव है”

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नगर कार्यवाह सुधीर खरे ने अपने उद्बोधन में कहा —
“भारत का राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ इस वर्ष अपनी रचना के 150वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। यह दिन केवल एक गीत की वर्षगांठ नहीं, बल्कि उस राष्ट्रीय चेतना का उत्सव है जिसने सोए हुए भारत को जगाया था। यह गीत शब्दों से परे एक भावना है, जिसने पराधीनता की रात में आशा का दीप जलाया था।”
वंदे मातरम् भारत की आत्मा का स्वर है”
भाजपा मंडल अध्यक्ष पवन श्रीवास्तव, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष पूर्णिमा जैन, भाजपा जिला मंत्री प्रार्थना चौहान, महिला मोर्चा अध्यक्ष रेखा पाल और पूर्व जिला मंत्री पूजा मिश्रा ने संयुक्त रूप से कहा —
“वंदे मातरम् वह स्वर है जो साहित्य से आगे बढ़कर भारत की आत्मा बन गया। इसने हर भारतीय के भीतर यह विश्वास जगाया कि मातृभूमि ही सर्वोच्च आराध्या है। यह गीत बताता है कि सच्चा देशप्रेम केवल नारों में नहीं, कर्म में है।”
उन्होंने कहा कि जब भी युवा पीढ़ी “सुजलाम सुफलाम, मलयजशीतलाम, शस्यशामलाम मातरम्” के शब्दों को सुनती है, तो उसे वही प्रेरणा महसूस होती है जो खुदीराम बोस, सुभाषचंद्र बोस या बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय को मिली थी। यही कारण है कि वंदे मातरम् आज भी भारत की धड़कन है — एक ऐसा मंत्र जो धर्म, भाषा और क्षेत्र की सीमाओं से परे 140 करोड़ भारतीयों को एक सूत्र में पिरोता है।
दीपोत्सव में उमड़ा जनसैलाब
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नगरवासी, समाजसेवी और युवाओं ने भाग लिया। दीपों की रोशनी और वंदे मातरम् की ध्वनि के बीच माहौल अत्यंत भावनात्मक और प्रेरणादायक हो उठा। उपस्थित जनसमूह ने एक स्वर में “वंदे मातरम्” के जयघोष लगाए।
इस अवसर पर पूर्व नगर पालिका उपाध्यक्ष जगदीश शर्मा, सेवा समिति उपाध्यक्ष संजय जैन, अशोक जैन, आकाश रघुवंशी, श्रीकांत मीना, लालू पाल, दीपक शर्मा, राजू चौहान, जितेंद्र मैना सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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Raju Atulkar
Author: Raju Atulkar

"पत्रकारिता सिर्फ पेशा नहीं, जिम्मेदारी भी है…" साल 2015 से कलम की स्याही से सच को उजागर करने की यात्रा जारी है। समसामयिक मुद्दों की बारीकियों को शब्दों में ढालते हुए समाज का आईना बनने की कोशिश। — राजू अतुलकर, तेजस रिपोर्टर डिजिटल

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