मीडिया की आज़ादी पर मंडराता संकट : शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलने वाले पत्रकार के खिलाफ FIR, सच्चाई को दबाने की साजिश

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रिपोर्ट-अतुल कुमार जैन
शिवपुरी | लोकतंत्र में मीडिया को चौथा स्तंभ कहा जाता है, लेकिन जब इसी स्तंभ की स्वतंत्रता पर हमला हो, तो यह पूरे समाज के लिए चिंता का विषय बन जाता है। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के पिछोर में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां गणतंत्र दिवस से दो दिन पहले कवरेज करने गए पत्रकार पर शासकीय कार्य में बाधा डालने का मामला दर्ज किया गया।
आरोप है कि पत्रकार ने एक सरकारी हाई स्कूल में छात्रों से सामान्य ज्ञान के कुछ बुनियादी प्रश्न पूछे, जो हर सरकारी स्कूल की दीवारों पर लिखे होते हैं। लेकिन इस रिपोर्ट के प्रसारित होते ही स्कूल प्रशासन ने राजनीतिक दबाव का सहारा लेते हुए पत्रकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी।

  • बच्चों से सवाल पूछना बना जुर्म, पत्रकार पर सरकारी कार्य में बाधा का केस!
  • शिक्षा की बदहाली उजागर होते ही पत्रकार पर FIR, क्या है सच्चाई?
  • पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर खतरा : सवालों से घबराया प्रशासन!
  • शिवपुरी में मीडिया पर हमला, पत्रकार पर फर्जी मुकदमा दर्ज!
  • राजनीति के दबाव में प्रशासन? पत्रकार के खिलाफ दर्ज हुआ विवादित केस!
  • पत्रकारिता पर हमला या प्रशासन की नाकामी छुपाने की साजिश?

क्या था पूरा मामला?

पिछोर के पत्रकार सचिन भट्ट 24 जनवरी को मल्हावनी स्थित शासकीय हाई सेकेंडरी स्कूल में रिपोर्टिंग के लिए पहुंचे थे। उस समय कुछ छात्र गणतंत्र दिवस की तैयारियों में लगे थे, जबकि कुछ स्कूल परिसर में इधर-उधर घूम रहे थे। स्कूल के प्रधानाचार्य देवेंद्र शर्मा मौके पर मौजूद नहीं थे।

रिपोर्टिंग के दौरान सचिन भट्ट ने 10वीं कक्षा के विद्यार्थियों से कुछ बुनियादी सवाल पूछे— भारत के राष्ट्रपति कौन हैं? प्रधानमंत्री का नाम क्या है? मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कौन हैं? हैरानी की बात यह रही कि अधिकतर छात्र इन सवालों का उत्तर नहीं दे पाए। यह पूरी घटना कैमरे में रिकॉर्ड हुई और जब यह खबर चैनल पर प्रसारित हुई, तो स्कूल प्रशासन की पोल खुल गई।

खराब शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल बने गिरफ्तारी का कारण?

इस रिपोर्ट का मकसद यह दिखाना था कि लाखों रुपये का वेतन लेने वाले प्रधानाचार्य और शिक्षक छात्रों को किस स्तर की शिक्षा दे रहे हैं। गौरतलब है कि इस स्कूल का 2023-24 का 10वीं बोर्ड का परीक्षा परिणाम मात्र 10% से भी कम रहा, जो प्रशासन की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
खबर के प्रसारित होते ही प्रधानाचार्य देवेंद्र शर्मा भड़क उठे। आरोप है कि उन्होंने राजनीतिक संबंधों का उपयोग कर पत्रकार के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने का मामला दर्ज करा दिया। जबकि सवाल पूछना, खासकर सार्वजनिक हित के विषयों पर, किसी भी पत्रकार का अधिकार है।

मामले पर पत्रकारों की प्रतिक्रिया और न्याय की मांग

इस घटना को लेकर शिवपुरी के पत्रकार समुदाय में भारी आक्रोश है। जिले के पत्रकारों ने पुलिस अधीक्षक के नाम अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। पत्रकारों का कहना है कि यह कार्रवाई मीडिया की स्वतंत्रता को दबाने और सच्चाई को छिपाने का प्रयास है।
वहीं, इस मुद्दे को लेकर पत्रकारों ने शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात की, जिन्होंने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है। अब यह देखना होगा कि इस प्रकरण में न्याय मिलेगा या फिर राजनीतिक दबाव के चलते सच को दबा दिया जाएगा।
यह मामला सिर्फ एक पत्रकार पर दर्ज एफआईआर का नहीं, बल्कि लोकतंत्र और प्रेस की स्वतंत्रता पर मंडराते खतरे का संकेत है। सवाल पूछना अपराध नहीं, बल्कि जनता को सच्चाई दिखाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। यह देखना दिलचस्प होगा कि न्यायपालिका और प्रशासन इस प्रकरण में निष्पक्ष कार्रवाई करते हैं या फिर राजनीतिक दबाव में पत्रकारों को चुप कराने का सिलसिला जारी रहता है।

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