सिंधिया के नाम पर फर्जी लेटरहेड से सरकारी तंत्र को गुमराह करने की साजिश बेनकाब, कंट्रोल दुकान आवंटन की अनुशंसा का पर्दाफाश

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रिपोर्ट-अतुल कुमार जैन
शिवपुरी जिले में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम का दुरुपयोग करते हुए फर्जी दस्तावेज तैयार करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस प्रकरण में दो व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। बताया जा रहा है कि मंत्री सिंधिया के नाम पर जारी किए गए दो पत्रों ने अधिकारियों को हैरान कर दिया, क्योंकि दोनों पत्रों पर एक ही जावक नंबर अंकित था।

  • फर्जी लेटर कांड : केंद्रीय मंत्री के नाम से अनुशंसा का पर्दाफाश
  • शिवपुरी में बड़ा फर्जीवाड़ा, सिंधिया के पत्र की नकल से उठी सनसनी
  • जांच में खुलासा : फर्जी पत्र से कंट्रोल की दुकान आवंटन की साजिश
  • केंद्रीय मंत्री के नाम का दुरुपयोग, दो आरोपियों पर केस दर्ज
  • सिंधिया के फर्जी लेटरहेड का मामला, चाचा-भतीजे की मिलीभगत उजागर
एक पत्र में पिछोर क्षेत्र में शराब की दुकान बंद करने की बात कही गई थी, जबकि उसी पत्र के आधार पर दूसरा फर्जी पत्र तैयार कर प्राथमिक वनोपज सहकारी समिति लखारी खनियांधाना को सौंपा गया। इस फर्जी पत्र में लोकपाल लोधी को कंट्रोल की दुकान आवंटित करने की अनुशंसा की गई थी। जब इस पत्र को खाद्य विभाग में प्रस्तुत किया गया, तो जांच में इसका फर्जी होना उजागर हुआ। इसके बाद थाना बामौरकलां में आरोपियों करन सिंह लोधी और लोकपाल लोधी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। ये दोनों आपस में चाचा-भतीजे हैं और नयागांव बिजरावन खनियांधाना के निवासी हैं।

कैसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा?

मामला तब शुरू हुआ जब 22 जुलाई 2024 को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से एक पत्र जारी हुआ, जिसमें पिछोर थाना क्षेत्र में शराब की दुकान बंद करने और सौरभ ठेकेदार से दुकान वापस लेने का निर्देश दिया गया था। इस पत्र के आधार पर आबकारी विभाग को कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। लेकिन इसके कुछ समय बाद उसी पत्र के जावक नंबर का उपयोग कर एक फर्जी पत्र तैयार किया गया, जिसमें समिति प्रबंधक से लोकपाल लोधी को कंट्रोल की दुकान आवंटित करने की सिफारिश की गई।
जब समिति प्रबंधक ने यह पत्र खाद्य विभाग को सौंपा, तो अधिकारियों को इस पर शक हुआ। उन्होंने कलेक्टर कार्यालय से जावक नंबर की पुष्टि की, जिसमें फर्जीवाड़े की पोल खुल गई। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि मंत्री सिंधिया द्वारा जारी कोई भी पत्र सीधे समिति प्रबंधक को नहीं भेजा जाता है; इसे केवल कलेक्टर के माध्यम से संबंधित विभाग को भेजा जाता है।

आरोपियों पर कार्रवाई

इस मामले में आरोपियों करन सिंह लोधी और लोकपाल लोधी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 318 (4), 338, और 336 (3) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और आरोपियों से इस मामले में गहन पूछताछ की जा रही है।

विशेषज्ञों की राय

जानकारों का कहना है कि इस प्रकार का फर्जीवाड़ा न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया को कमजोर करता है, बल्कि मंत्री की छवि को भी नुकसान पहुंचाता है। अधिकारियों ने सतर्कता बरतने और ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई करने की बात कही है।
इनका कहना है…
“उक्त मामला हमारे संज्ञान में आया है। जिसके तहत हमने आरोपियों करन सिंह लोधी एवं लोकपाल लोधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर बीएनएस की धारा 318 चार , 338, 336 तीन के तहत मामला पंजीवद्ध कर लिया है। अभी मामले मेें जांच जारी है। शीघ्र ही आगे की कार्यवाही की जावेगी। “
नीतूसिंह धाकड, थाना प्रभारी, बामौरकला

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