कलम का संघर्ष | हमारे समाज में अक्सर आवाज़ उठाने वाले लोगों को नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। खासकर, जब यह आवाज़ किसी हाशिए पर खड़े समुदाय से आती हो। यह कहानी भावना मंगलमूर्ति की है—एक ट्रांसजेंडर लेखिका, जो समाज, राजनीति, और रूढ़िवाद के खिलाफ़ सवाल उठाने का साहस रखती हैं। राजस्थान से निकलकर महाराष्ट्र के दहानू में रहने वाली भावना जी ने अपने लेखन और तर्कशीलता से एक नई पहचान बनाई। लेकिन उनकी यह यात्रा सिर्फ संघर्षों की दास्तां है।

भावना जी को उम्मीद थी कि उनकी यह रचनाएं उन्हें आत्मनिर्भर बनाएंगी। लेकिन न तो मीडिया ने उनके साहसिक लेखन को मंच दिया, न ही उनकी पुस्तकों ने बाज़ार में जगह पाई।






