पंचायत दर्पण में ‘धुंधला खेल’ : बरेला पंचायत में धांधली, जानबूझकर धुंधले बिल अपलोड, सचिव का बेटा संभाल रहा पंचायत का पूरा काम

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स्थानीय संवाददाता
शिवपुरी | मध्यप्रदेश सरकार द्वारा पारदर्शिता के उद्देश्य से शुरू किए गए पंचायत दर्पण पोर्टल की बरेला ग्राम पंचायत (जनपद पिछोर, जिला शिवपुरी) में खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। पंचायत द्वारा किए गए कार्यों के भुगतान से जुड़े बिल और दस्तावेज जानबूझकर इतने धुंधले और अपठनीय रूप में अपलोड किए गए हैं कि आम नागरिक यह तक नहीं समझ सके कि किस काम के लिए कितना भुगतान किया गया।

सरकारी निर्देश साफ हैं कि पंचायत दर्पण पर सभी भुगतान बिल और रसीदें स्पष्ट, पढ़ने योग्य और सत्यापन योग्य हों, लेकिन बरेला पंचायत में इन नियमों का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। इससे यह संदेह और गहरा होता है कि कहीं यह सब किसी बड़े भ्रष्टाचार को छिपाने की कोशिश तो नहीं।
पंचायत सचिव का पक्ष जानने के लिए रिपोर्टर द्वारा बार-बार संपर्क किया गया, लेकिन सचिव ने फोन नहीं उठाया। एक दिन बाद एक कॉल आया, जिसमें कॉल करने वाले ने अपना नाम पहले ‘सुभाष लोधी’ बताया और कहा कि पंचायत का काम वही देखता है। बातचीत आगे बढ़ने पर कॉल करने वाले ने खुद को पंचायत सचिव का बेटा सुभाष लोधी बताया।
सबसे चौंकाने वाला बयान तब सामने आया जब उसने कहा—
पंचायत का पूरा काम मैं ही देखता हूं, सरपंच और सचिव दोनों का।
जब उससे पूछा गया कि वह किस पद पर है और क्या उसे पंचायत कार्य देखने का अधिकार है, तो उसका जवाब था—
साहब, ऐसे ही चल रहा है।
यह बयान अपने आप में गंभीर अपराध की ओर इशारा करता है। एक ऐसा व्यक्ति जो न तो सरकारी कर्मचारी है, न निर्वाचित प्रतिनिधि—वह पूरे पंचायत के काम देख रहा है। यह सीधा-सीधा पंचायत अधिनियम और प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन है।

सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम है

यदि पंचायत में सब कुछ नियमों के अनुसार हो रहा है, तो पंचायत दर्पण पोर्टल पर भुगतान के बिल साफ और स्पष्ट क्यों नहीं डाले गए? जानबूझकर धुंधले दस्तावेज अपलोड करने का मकसद क्या है?

इस पूरे मामले में जनपद पंचायत और जिला प्रशासन की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। क्या जिम्मेदार अधिकारियों को यह गड़बड़ी दिखाई नहीं देती, या फिर वे जानबूझकर आंखें मूंदे हुए हैं? क्या पंचायत दर्पण पोर्टल की नियमित निगरानी सिर्फ कागजों तक सीमित है?
यह मामला सिर्फ एक पंचायत तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। अब आवश्यकता है कि इस प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि यह साफ हो सके कि ग्राम पंचायत बरेला में जनता के पैसे का दुरुपयोग तो नहीं किया जा रहा।
जनता के धन का हिसाब छुपाया नहीं जा सकता—और न ही छुपाया जाना चाहिए। पंचायत दर्पण पर फैली इस धुंध के पीछे क्या सच है, इसे उजागर करना अब ज़रूरी हो गया है। बरेला पंचायत में चल रहे इस पूरे खेल की परत-दर-परत पड़ताल तेजस रिपोर्टर लगातार कर रहा है और आने वाले दिनों में इससे जुड़े और भी तथ्य सामने लाए जाएंगे।
SURAJ MEHRA
Author: SURAJ MEHRA

साल 2022 से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत "सूरज मेहरा" आज भी निरंतर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मध्यप्रदेश की राजनीति, करंट अफेयर्स में विशेष रुचि है , साथ ही ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव है , यहाँ मध्यप्रदेश की हर छोटी बड़ी हलचल पर नज़र रहती है

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