सहरिया क्रांति स्थापना दिवस पर आदिवासी अस्मिता का विस्फोट: हज़ारों की रैली, राष्ट्रपति को सौंपा गया 18 सूत्रीय मांगपत्र

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रिपोर्ट – अतुल कुमार जैन
शिवपुरी | सहरिया आदिवासी समाज के आत्मसम्मान, अधिकार और अस्तित्व की आवाज एक बार फिर शिवपुरी की सड़कों पर गूंजी। अवसर था सहरिया क्रांति सामाजिक आंदोलन के स्थापना दिवस का, लेकिन यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता का जागरण बन गया। जिले भर के हज़ारों सहरिया पुरुष, महिलाएं और युवा एकजुट होकर “सहरिया क्रांति ज़िंदाबाद” और “हमें चाहिए हमारा हक़” जैसे नारे लगाते हुए माधव चौक से कलेक्टर कार्यालय तक रैली निकालते नजर आए।
रैली के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम 18 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा गया, जिसमें ज़मीन वापसी, रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सुरक्षा जैसी मूलभूत और निर्णायक मांगें शामिल थीं।
संघर्ष की शुरुआत: श्रद्धांजलि से संकल्प तक
रैली की शुरुआत सहरिया क्रांति के संयोजक संजय बेचैन के निवास से हुई, जहां दिवंगत साथी अनिल आदिवासी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। यह भावुक क्षण था – आंदोलनकारियों की आंखों में आंसू थे, पर उनमें पूर्वजों के संघर्षों को आगे बढ़ाने की दृढ़ता भी झलक रही थी।
संजय बेचैन ने स्पष्ट किया –
“हम प्रदर्शन नहीं कर रहे, हम समाधान मांग रहे हैं। हमारी पीड़ा को न सुना गया, न समझा गया। अब सहरिया समाज खुद बोलेगा और संविधान में दिए हक लेकर रहेगा।”
नारे, नगाड़े और नई चेतना
रैली के दौरान आदिवासी महिलाएं पारंपरिक परिधानों में, पुरुष ढोल-नगाड़ों के साथ, और युवा हाथों में झंडा व मांगपत्र लेकर क़दमताल करते दिखाई दिए। नारों में आक्रोश था, लेकिन रास्तों में शांति थी।
“हम मांगें हक़ के अधिकार”,
“बांट रहे हैं योजनाएं, लेकिन हमारी ज़मीन नहीं”,
“संविधान का आश्वासन पूरा करो” —
ऐसे नारों से शहर की गलियों में आदिवासी आवाज़ की गूंज थी।
मंच से मिले समर्थन के स्वर

रैली के दौरान आयोजित संक्षिप्त सभा में पूर्व मंत्री के.पी. सिंह ने मंच से आदिवासी संघर्ष को “भारत के लोकतंत्र की जड़ें मजबूत करने वाला आंदोलन” बताया। उन्होंने कहा –
“जब तक अंतिम व्यक्ति को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी। सरकार को चाहिए कि सहरिया समाज की वैध मांगों पर तुरंत अमल करे।”
प्रदेश अध्यक्ष औतार भाई सहरिया ने हुंकार भरी –
“हम अब पीछे नहीं हटेंगे। यह नई पीढ़ी अपनी पहचान से समझौता नहीं करेगी। हमारा युग आना तय है।”
ज्ञापन की प्रमुख मांगें –
ज्ञापन में जिन 18 प्रमुख बिंदुओं को रखा गया, उनमें से कुछ महत्वपूर्ण हैं:
1. पुश्तैनी जमीन की वापसी – दबंगों द्वारा हड़पी गई जमीनों की जांच कर वापसी कराई जाए।
2. राशन और योजनाओं में पारदर्शिता – सरकारी योजनाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगे।
3. रोजगार की गारंटी – स्थानीय कौशल विकास केन्द्रों की स्थापना एवं स्वरोजगार योजनाएं लागू हों।
4. स्वास्थ्य व शिक्षा सुविधाएं – बस्तियों में प्राथमिक उपचार केंद्र, नलकूप, स्कूल भवन बनें।
5. महिला और बाल सुरक्षा – त्वरित न्याय व्यवस्था स्थापित हो।
6. मानव तस्करी व शोषण पर सख्ती – सघन जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग।
7. भ्रष्टाचार रोकथाम – आदिवासी क्षेत्रों में अधिकारी-कर्मचारियों की जवाबदेही तय हो।
महिलाओं की मजबूत भागीदारी

रैली में आदिवासी महिलाओं की भागीदारी बेहद सशक्त रही। सिर पर बच्चों को लिए महिलाएं और झुलसती धूप में भी बिना रुके नारे लगाती युवतियां इस बात का प्रतीक थीं कि यह आंदोलन अब आदिवासी परिवारों का संकल्प बन चुका है।
राम्या सहरिया ने तीखे शब्दों में कहा –
“सरकार की घोषणाओं से अब हमारा पेट नहीं भरता। हमें भीख नहीं, हक़ चाहिए।”
प्रशासन का संयम, रैली रही शांतिपूर्ण
रैली के मद्देनज़र प्रशासन ने पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की थी। पुलिस तैनाती के बावजूद, कहीं कोई विवाद नहीं हुआ। संपूर्ण रैली अनुशासित, शांतिपूर्ण और गरिमामय रही। कलेक्टर कार्यालय पहुंचने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने तय समय से पहले ही ज्ञापन सौंप दिया।
राष्ट्रीय स्तर पर उठे स्वर
इस आंदोलन को कांग्रेस, समाजसेवी संगठनों, और कुछ जनप्रतिनिधियों का समर्थन प्राप्त हुआ। वहीं, कुछ अधिवक्ताओं ने इसे जनहित याचिका के रूप में उच्च न्यायालय में प्रस्तुत करने की तैयारी शुरू कर दी है।
कार्यक्रम के समापन पर संजय बेचैन ने घोषणा की –
“यह स्थापना दिवस नहीं, आत्मसम्मान का एलान है। अब हम चुप नहीं रहेंगे, अपनी कहानी खुद लिखेंगे। जब तक संविधान में लिखे अधिकार ज़मीनी हकीकत नहीं बनते, तब तक यह सहरिया क्रांति थमेगी नहीं।”

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Raju Atulkar
Author: Raju Atulkar

"पत्रकारिता सिर्फ पेशा नहीं, जिम्मेदारी भी है…" साल 2015 से कलम की स्याही से सच को उजागर करने की यात्रा जारी है। समसामयिक मुद्दों की बारीकियों को शब्दों में ढालते हुए समाज का आईना बनने की कोशिश। — राजू अतुलकर, तेजस रिपोर्टर डिजिटल

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