खनियाधाना बीईओ कार्यालय में गबन का मामला: छह पर FIR, 1100 शिक्षक वेतन से वंचित शिक्षक परेशान

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रिपोर्ट – अतुल कुमार जैन
शिवपुरी | बीईओ कार्यालय खनियाधाना में सामने आए करोड़ों रुपये के गबन मामले ने न केवल शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि इससे 1100 से अधिक शिक्षक आर्थिक संकट में फंस गए हैं। भोपाल से मामले का फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद प्रशासन ने जांच कराई और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए 6 कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज कराई है। लेकिन इनकी जगह किसी की नियुक्ति नहीं होने से शिक्षकों का अप्रैल 2025 का वेतन अटक गया है।
गबन मामले में जिन कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई है, उनमें सहायक संचालक प्रकाश सूर्यवंशी, रिटायर बीईओ सतीश कुमार गुप्ता, लेखापाल सुखनंदन रसगैया, सहायक लिपिक ओमकार सिंह धुर्वे, लिपिक महेंद्र कगरिया और माध्यमिक शिक्षक यशपाल सिंह बघेल शामिल हैं। इन्हें निलंबित कर दिया गया है, लेकिन अब तक बीईओ कार्यालय की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे पूरे विकासखंड के शिक्षकों के वेतन, भत्ते, क्रमोन्नति, और गृह भाड़ा से जुड़ी तमाम फाइलें लंबित हैं।
शिक्षकों पर टूटा आर्थिक संकट
वेतन रुकने से शिक्षक न केवल मानसिक तनाव में हैं, बल्कि उन्हें अब बैंक पेनल्टी और सिविल स्कोर खराब होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षक राहुल देव पुरोहित बताते हैं कि उन्होंने व्यक्तिगत लोन लिया हुआ है, जिसकी किस्तें समय पर नहीं कट पा रहीं। शिक्षक किमोथियुस तिकों, जो छत्तीसगढ़ से हैं, बताते हैं कि उनकी कार लोन की 21 हजार रुपये की किस्त नहीं भर पाने से उन्हें अब बैंक से नोटिस आ गया है।
दशरथ रजक, जो गंभीर स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं, कहते हैं कि उन्हें किडनी में पथरी है और ऑपरेशन कराना है, लेकिन वेतन न मिलने से इलाज भी रुक गया है। प्राथमिक शिक्षक सोहनसिंह लोधी ने बताया कि उन्होंने 8 लाख रुपये का लोन ले रखा है, जिसकी हर माह 35 हजार की किश्त है, जो अब पेनल्टी सहित बढ़ती जा रही है।
प्रशासन का दावा: जल्द हल निकलेगा
इस गंभीर स्थिति को लेकर डीईओ समर सिंह राठौड़ ने बताया कि गबन मामले में छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई है। खनियाधाना में सहायक संचालक शालिनी दिनकर को अब डीडीओ पावर सौंपे गए हैं। शिक्षकों का वेतन शीघ्र ही बनाकर भुगतान कराया जाएगा।
फिलहाल, जब तक वैकल्पिक प्रबंध नहीं किए जाते और वित्तीय प्रक्रिया बहाल नहीं होती, तब तक शिक्षकों की समस्याएं जस की तस बनी रहेंगी। यह मामला न केवल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि एक सरकारी कार्यालय की लापरवाही कैसे सैकड़ों परिवारों को आर्थिक संकट में डाल सकती है।

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Raju Atulkar
Author: Raju Atulkar

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