@सौरभ जैन ✍️
पत्रकारिता केवल समाचारों तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह समाज की धड़कन को समझने और उसे नई दिशा देने का एक सशक्त माध्यम है। इस क्षेत्र में यदि कोई निःस्वार्थ भाव से समर्पित होकर कार्य कर रहा हो, तो वह वास्तव में समाज का धरोहर होता है। कोटा, राजस्थान के प्रतिष्ठित पत्रकार पारस जैन “पार्श्वमणि” ऐसी ही एक प्रेरणादायक शख्सियत हैं, जिन्होंने पिछले 35 वर्षों से जैन समाज की आवाज को बुलंद करने में अहम भूमिका निभाई है।
पारस जैन न केवल एक प्रखर पत्रकार हैं, बल्कि जैन समाज के लिए संघर्षशील योद्धा भी हैं। उन्होंने “मेरी भावना” को शिक्षण संस्थानों में शामिल करने की मांग को लेकर देशभर में आवाज उठाई। उनकी लेखनी ने न केवल जैन धर्म की धार्मिक परंपराओं को सहेजने का कार्य किया, बल्कि समाज को जागरूक करने के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।






