रिपोर्ट-अतुल कुमार जैन
खनियाधाना में शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने के उद्देश्य से नवचयनित शिक्षकों ने ‘सुपर 100 ग्रुप’ की स्थापना की है। यह समूह न केवल सरकारी विद्यालयों के सुधार का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहा है, बल्कि एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करते हुए शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की नई कहानी लिखने का प्रयास कर रहा है।
शहर में आयोजित इस विशेष बैठक में जिला परियोजना समन्वयक दफेदार सिंह सिकरवार ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा, “शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव लाने के लिए हमें समर्पण और ईमानदारी से काम करना होगा। बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने और उनकी शैक्षिक गुणवत्ता को सुधारने में शिक्षकों की भूमिका अहम है। अभिभावकों के साथ सकारात्मक संवाद स्थापित करना भी शिक्षकों का प्रमुख कर्तव्य है।”

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एफएलएन प्रभारी रितिका प्रजापति ने जानकारी देते हुए बताया कि 11 जनवरी को प्रदेश के सभी प्राथमिक विद्यालयों में ‘एफएलएन मेला’ आयोजित होगा। इस आयोजन का उद्देश्य छोटे बच्चों और उनके अभिभावकों को शिक्षा के प्रारंभिक स्तर पर प्रगति का आकलन करना है। उन्होंने बताया कि मेले में कक्षा 1 और 2 के छात्रों को रिपोर्ट कार्ड भी प्रदान किए जाएंगे, जो उनकी सीखने की प्रक्रिया को उजागर करेंगे।
एपीसी हरीश शर्मा ने शिक्षकों को प्रेरणा देते हुए कहा, “प्रेरणादायक साहित्य पढ़ने और उसे अपने जीवन में अपनाने से हम उत्कृष्ट कार्य कर सकते हैं। शिक्षकों को हमेशा नये विचारों और नवाचारों को अपनाने के लिए तत्पर रहना चाहिए।”
बीआरसीसी संजय भदोरिया ने कहा, “हर शिक्षक के पास गांव की शिक्षा को बेहतर बनाने का दायित्व है। शिक्षकों को नवाचारों के माध्यम से शिक्षा में उत्कृष्टता लाने का प्रयास करना चाहिए।” उन्होंने जीवन को कुछ विशेष हासिल करने का अवसर बताते हुए नवाचार को शिक्षा में एक अनिवार्य पहलू बताया।
इस बैठक में उपस्थित संवादमित्र राजेश देव पांडे ने जीवन के तीन प्रमुख पहलुओं – ग्रोथ, प्रोग्रेस, और सक्सेस – पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “शारीरिक और आर्थिक वृद्धि ग्रोथ है, लेकिन इसमें अनुशासन, ईमानदारी, और सिद्धांत जोड़ने से प्रोग्रेस होती है। वहीं, जब प्रोग्रेस में नैतिकता और लोक कल्याण शामिल होता है, तो सक्सेस की प्राप्ति होती है। शिक्षकों को इन मूल्यों को आत्मसात कर शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल करनी चाहिए।”









