रिपोर्ट-अतुल कुमार जैन
शिवपुरी | मध्यप्रदेश में प्रशासनिक ढांचे के पुनर्गठन का सिलसिला तेजी पकड़ रहा है। राज्य सरकार द्वारा गठित परिसीमन आयोग न केवल जिलों और तहसीलों के पुनर्निर्धारण पर काम कर रहा है, बल्कि नए जिलों के गठन के प्रस्तावों पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इस क्रम में कई बड़े जिलों को विभाजित करने की मांग जोर पकड़ने लगी है। शिवपुरी जिले से पिछोर और खनियाधाना को अलग जिलों के रूप में स्थापित करने की मांग काफी पुरानी और अहम है।
>> खनियाधाना और पिछोर के लिए जिलों का नया सपना!
>> शिवपुरी में प्रशासनिक पुनर्गठन: जनता की आवाज जोर पकड़ रही है।
>> खनियाधाना जिला बनाओ आंदोलन: कब मिलेगी मंजूरी?
>> पिछोर: दो दशक से अधूरी मांग, अब क्या बदलेगी तस्वीर?
>> खनियाधाना और पिछोर के संघर्ष पर उठे सवाल, क्या सुनेंगे सत्ता के कान?
पिछोर: दो दशक पुरानी मांग, अब भी अधूरी :

पिछोर को जिला बनाने की मांग पिछले दो दशकों से चल रही है। 2003 से शुरू हुआ यह आंदोलन समय-समय पर राजनीतिक वादों और घोषणाओं के बावजूद ठंडे बस्ते में जाता रहा। भारतीय जनता पार्टी के कई बड़े नेताओं ने इसे समर्थन दिया है, और 2018 के विधानसभा चुनावों के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस मांग पर सार्वजनिक सहमति भी दी थी। बावजूद इसके, पिछोर को अब तक जिले का दर्जा नहीं मिल सका है।
खनियाधाना: जिला मुख्यालय से 100 किलोमीटर दूर, संघर्ष जारी :

खनियाधाना के निवासी शिवपुरी मुख्यालय से 100 किलोमीटर की दूरी और यात्रा में आने वाली दिक्कतों से जूझते आ रहे हैं। छोटी से छोटी प्रशासनिक जरूरतों के लिए लोगों को इतनी लंबी यात्रा करनी पड़ती है, जिससे समय और संसाधनों की बर्बादी होती है। इन समस्याओं के समाधान के लिए क्षेत्रीय लोगों ने खनियाधाना को जिला बनाने के लिए संगठित आंदोलन शुरू किया है।
हाल ही में टेकरी सरकार मंदिर परिसर में इस मांग को लेकर विशाल जनसभा आयोजित हुई थी, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए। इसके अलावा, खनियाधाना जिला बनाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में कई गतिविधियां जैसे मैराथन दौड़ का आयोजन भी किया गया, जिसमें 100 से अधिक युवाओं ने भाग लिया। आंदोलन में क्षेत्रीय नेताओं के साथ सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रतिनिधि मनीष अग्रवाल ने भी समर्थन दिया।
शिवपुरी जिले का वर्तमान स्वरूप :

शिवपुरी जिला वर्तमान में 10,278 वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्रफल में फैला हुआ है, जिसमें 614 ग्राम पंचायतें और 1,459 गांव शामिल हैं। इनमें से 15 गांव वन क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। जिले की कुल जनसंख्या 2011 की जनगणना के अनुसार 17,25,818 है।
नए जिलों की आवश्यकता पर विचार :








