एक युग का अंत: स्वामी परमहंस सच्चिदानंद जी महाराज ब्रह्मलीन, संत समाज में शोक की लहर

SHARE:

रिपोर्ट:डॉ कमलेश मीना
धारकुंडी/मुंबई। आध्यात्मिक जगत के लिए आज अत्यंत दुखद दिन है। चित्रकूट के प्रसिद्ध धारकुंडी आश्रम के संस्थापक, परम पूज्य स्वामी परमहंस सच्चिदानंद जी महाराज (102 वर्ष) का मुंबई में निधन हो गया। स्वामी जी के ब्रह्मलीन होने की खबर मिलते ही संत समाज और उनके लाखों श्रद्धालुओं में शोक की लहर दौड़ गई। स्वामी परमहंस सच्चिदानंद जी महाराज लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और मुंबई में उपचाररत थे, जहाँ उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके देहावसान से आध्यात्मिक जगत ने अपना एक महान मार्गदर्शक खो दिया है।

हेलीकॉप्टर से धारकुंडी लाया गया पार्थिव शरीर

स्वामी जी के पार्थिव शरीर को विशेष हेलीकॉप्टर द्वारा मुंबई से चित्रकूट स्थित धारकुंडी आश्रम लाया गया है। यहाँ देश-विदेश से श्रद्धालु अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। आश्रम परिसर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है।

 

तपस्या से खड़ा किया आस्था का केंद्र

स्वामी जी ने वर्ष 1956 में घने जंगलों के बीच गुरु के आशीर्वाद और कठोर तपस्या से धारकुंडी आश्रम की स्थापना की थी। आज यह आश्रम लाखों लोगों की आस्था, सेवा और साधना का प्रमुख केंद्र बन चुका है।

हाल ही में मनाया गया था जन्मोत्सव

हाल ही में 1 जनवरी 2025 को आश्रम में स्वामी जी का भव्य जन्मोत्सव मनाया गया था। इस अवसर पर देशभर से संत, महात्मा और श्रद्धालु पहुंचे थे। वह आयोजन उनके जीवन का ऐतिहासिक क्षण माना गया।

श्रद्धालुओं में शोक, सेवा कार्य रहेंगे अमर

स्वामी परमहंस सच्चिदानंद जी महाराज का जाना एक युग का अंत माना जा रहा है, लेकिन उनके द्वारा स्थापित सेवा, साधना और मानव कल्याण के कार्य समाज को सदैव मार्गदर्शन देते रहेंगे।

SURAJ MEHRA
Author: SURAJ MEHRA

साल 2022 से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत "सूरज मेहरा" आज भी निरंतर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मध्यप्रदेश की राजनीति, करंट अफेयर्स में विशेष रुचि है , साथ ही ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव है , यहाँ मध्यप्रदेश की हर छोटी बड़ी हलचल पर नज़र रहती है

Join us on:

सबसे ज्यादा पड़ गई
Marketing Hack4u