📰 अतुल कुमार जैन
खनियांधाना | धर्मनगरी खनियांधाना ने आज गुरु-भक्ति की ऐसी अनुपम छटा देखी, जिसने पूरे नगर को आध्यात्मिक उल्लास से भर दिया। ऐतिहासिक पंचकल्याणक महोत्सव के सफल समापन के बाद मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ससंघ का नगर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। प्रातः लगभग 6:30 बजे तीर्थोदय क्षेत्र गोलाकोट से विहार आरंभ होते ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। निजी वाहनों, बसों और पदयात्रियों के साथ—बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक—हर आयु वर्ग का उत्साह देखते ही बनता था।
जयकारों से गूंजा नगर, अनुशासन और भव्यता का संगम
नगर सीमा में प्रवेश के साथ ही वातावरण “जय-जय गुरुदेव” के घोष से गूंज उठा। स्वागत जुलूस अनुशासन, सौंदर्य और श्रद्धा का अद्भुत संगम था। अग्रिम पंक्ति में बालिका मंडल की सदस्याएं सुव्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ीं। उनके पीछे ‘जिन शासन रेजिमेंट’ और ‘जिन शासन प्रभावना समूह’ की महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में मंगल कलश धारण किए मंगल गान करती रहीं। ढोल, बैंड-बाजे, दिव्य घोष और मधुर ध्वनियों ने पूरे नगर को उत्सवमय बना दिया।
सर्वसमाज की सहभागिता, सौहार्द की मिसाल
स्वागत में सबसे भावपूर्ण दृश्य वह था, जब जैन समाज के साथ-साथ सर्वसमाज ने एकजुट होकर गुरुवर का अभिनंदन किया। नगर को दुल्हन की तरह सजाया गया था; मार्ग में रंगोलियां, पुष्पवर्षा और चरण-पखार की परंपरा ने श्रद्धा की ऊंचाइयों को छू लिया। हर गली, हर चौक पर लोगों ने नमन कर आशीर्वाद लिया—मानो पूरा नगर ही गुरु चरणों में समर्पित हो गया हो।
पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में मंगल पदार्पण
नगर भ्रमण के पश्चात मुनि संघ का पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में मंगल पदार्पण हुआ। यहां मुनिश्री ससंघ विराजमान हुए और प्रवचनों की अमृतवर्षा से उपस्थित जनसमूह को आध्यात्मिक दिशा मिली। गुरुवर के सान्निध्य ने नगर में धर्म-प्रभावना को नई गति दी है।
आगामी आयोजनों को मिली नई ऊर्जा
मुनिश्री के आगमन से खनियांधाना में भावी धार्मिक आयोजनों की तैयारियों को संबल मिला है। नगरवासियों में हर्ष, श्रद्धा और आत्मिक उत्साह स्पष्ट दिखाई दे रहा है—हर ओर धर्म, संयम और सद्भाव का संदेश प्रसारित हो रहा है।







