जिन शासन एकता संघ का क्षेत्रीय सम्मेलन : गोलाकोट में उमड़ा समाज, एकता का दिया गया संदेश

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📰 अतुल कुमार जैन
खनियांधाना | शिवपुरी जिले की सीमा से लगे ऐतिहासिक तीर्थोदय अतिशयकारी गोलाकोट जैन मंदिर में जिन शासन एकता संघ का भव्य क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित हुआ। सम्मेलन की अध्यक्षता दिल्ली पुलिस के पूर्व डीजीपी शांत कुमार ने की। यह आयोजन गत वर्ष अशोकनगर में हुए संघ के प्रथम राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद संभाग स्तर पर संगठनात्मक विस्तार की दिशा में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है।

गांव-गांव तक संगठन, समाज की समृद्धि का मार्ग :
सम्मेलन में निर्यापक श्रमण मुनि पुगंव राष्ट्रसंत श्री सुधासागरजी महाराज ने एकता को जीवन और समाज की मूल शक्ति बताया। उन्होंने कहा,
“एकता ही बल है। परमार्थ हो या संसार—हर क्षेत्र में संगठन अनिवार्य है। जब तक मन, वचन और काय एक नहीं होंगे, सिद्धि प्रकट नहीं होगी।”
मुनिश्री ने आचार्यश्री की उस भावना को रेखांकित किया, जिसके अनुरूप देश ‘भरत का भारत’ बने—और इसी भाव से जिन शासन एकता संघ का गठन हुआ है। उनका आह्वान था कि संगठन की शक्ति को गांव-गांव तक पहुंचाकर समाज की उन्नति और सम्पन्नता सुनिश्चित की जाए।

आत्मशुद्धि से ही समाज-संरचना

अपने प्रवचन में मुनिश्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा,
“अपने आप को सोना बना लो, संसार का कीचड़ तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। गंदगी हटाने में समय मत गंवाओ, अपने बचाव पर ध्यान दो।”

उन्होंने जैन धर्म के मूल सिद्धांतों को रेखांकित करते हुए बताया कि यह पंथ हिंसा नहीं, बल्कि आत्मरक्षा और आत्मशुद्धि का संदेश देता है। “यदि सत्य नहीं बोल सकते तो मौन रहो, पर असत्य से दूर रहो”—यह संदेश सभा में उपस्थित जनसमूह के लिए जीवन-मंत्र बना।

रत्नत्रय की वंदना से हुई शुरुआत

सभा आरंभ से पूर्व मुनिश्री ने रत्नत्रय की वंदना का भावार्थ समझाया—
वंदे सम्यक दर्शनम् : दोनों हाथ जोड़कर श्रद्धा,
वंदे सम्यक ज्ञानम् : हाथ जोड़ते हुए मस्तक नमन,
वंदे सम्यक चारित्रम् : समर्पण भाव के साथ पूर्ण नमन।
इस सरल विधि ने आध्यात्मिक अनुशासन और एकाग्रता का भाव सुदृढ़ किया।

जनसंख्या पर चेतावनी: ‘जागो, चेतो’

पूर्व डीजीपी शांत कुमार ने समाज के सामने जनसंख्या का गंभीर प्रश्न रखा। उन्होंने कहा,
“जैन समाज की चुनौतियों में एक बड़ा कारण विवाह में अनावश्यक विलंब है। 21 वर्ष के बाद विवाह को लेकर गंभीरता आवश्यक है।”
उन्होंने जनगणना में उपजाति के स्थान पर केवल ‘जैन’ लिखने की अपील की और जैन समाज की भाषाई समृद्धि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्कृत और प्राकृत का संस्कार हर जैन में विद्यमान है। साथ ही, हर विश्वविद्यालय में प्राकृत भाषा के पाठ्यक्रम प्रारंभ करने की मांग भी रखी।

संभागीय सहभागिता, संगठन की मजबूती

सम्मेलन में अशोकनगर, मुंगावली, शाढ़ौरा, पिपरई, चंदेरी, ईसागढ़, कदवाया सहित गुना, शिवपुरी, ग्वालियर, सागर और ललितपुर से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे।
जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि पंचकल्याणक महोत्सव से पूर्व यह सम्मेलन पूरे अंचल की एकजुटता का सशक्त संकेत है।
कार्यवाहक राकेश गोयल (भोपाल) ने संगठनात्मक रणनीति साझा करते हुए कहा कि छोटी-छोटी इकाइयों के माध्यम से संघ को जमीनी स्तर पर मजबूत किया जा रहा है, ताकि समाज के हर वर्ग तक एकता का संदेश पहुंचे।

ध्वज स्थापना और दीप प्रज्वलन

सम्मेलन के दौरान सर्वप्रथम ध्वज स्थापना की गई। इसके बाद महामंत्री राकेश अमरोद, मंत्री विजय धुर्रा, सांसद प्रतिनिधि संजीव भारल्लिया, जिला कोषाध्यक्ष मनोज रन्नौद सहित विभिन्न संभागों के प्रतिनिधियों ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की।

गोलाकोट का यह सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि जैन समाज के लिए आत्ममंथन और आत्मसंघटन का मंच बना। प्रश्न अब यही है—क्या यह एकता दैनिक जीवन में भी उतरेगी और समाज को नई दिशा दे पाएगी?

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