📰 सौरभ जैन मंडीदीप | नालियों से गुजरती पेयजल पाइपलाइन औद्योगिक नगर मंडीदीप के लिए अब गंभीर खतरे की घंटी बन चुकी है। यही वजह है कि सोमवार को वार्ड क्रमांक 1, 5, 8, 9 और 17 में एसडीएम चंद्रशेखर श्रीवास्तव ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया। यह निरीक्षण हाल ही में इंदौर में दूषित पानी पीने से 15 लोगों की मौत के बाद कलेक्टर के निर्देश पर किया गया, जिसने पूरे प्रदेश में पेयजल व्यवस्था की पोल खोल दी है।
निरीक्षण के दौरान जो तस्वीर सामने आई, उसने नगर पालिका परिषद मंडीदीप की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। कई कॉलोनियों में वर्षों पुरानी और जर्जर पाइपलाइनें सीधे नालियों और सीवेज के बीच से गुजरती पाई गईं।
जगह-जगह टूटे पाइपों के आसपास गंदा पानी जमा है, जिससे पेयजल में सीवेज मिलने की आशंका लगातार बनी हुई है। यह हालात किसी एक दिन में पैदा नहीं हुए, बल्कि लंबे समय से चले आ रहे हैं, जिन पर स्थानीय निकाय अब तक आंखें मूंदे बैठा रहा। सवाल यह भी है कि आखिर गंदगी और नालियों के बीच से पेयजल पाइपलाइन बिछाने की अनुमति किसने दी और समय रहते इन्हें बदला क्यों नहीं गया।
चिंता यहीं खत्म नहीं होती। पेयजल आपूर्ति के लिए लगाए गए वाटर टैंकों की नियमित सफाई न होने की आशंका भी सामने आई है। यदि टैंकों की समय-समय पर सफाई नहीं हुई तो स्वच्छ पानी की आपूर्ति का दावा केवल कागज़ी साबित होता है। यह लापरवाही सीधे-सीधे हजारों शहरवासियों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ का संकेत देती है।
गौरतलब है कि इससे पहले प्रभारी एसडीएम अंकित जैन और तहसीलदार हेमंत शर्मा भी बेतवा कॉलोनी में इसी तरह के हालात देख चुके हैं। रहवासियों ने तब भी बताया था कि सड़कों पर सीवेज भरा रहता है, जहरीले कीड़े घरों में घुस आते हैं और नलों से मटमैला व बदबूदार पानी आता है, जिसे पीने के लिए वे मजबूर हैं।
इसी पृष्ठभूमि में प्रदेश सरकार द्वारा शुरू किया गया ‘स्वच्छ जल अभियान’ मंडीदीप जैसे औद्योगिक क्षेत्रों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने साफ कहा है कि अब पेयजल व्यवस्था की निगरानी सिर्फ कागज़ों तक सीमित नहीं रहेगी। रोबोटिक तकनीक से पाइपलाइन लीकेज की जांच, जीआईएस मैपिंग से पेयजल और सीवेज लाइनों का चिन्हांकन, जल टंकियों की नियमित सफाई और ‘जल सुनवाई’ जैसे कदम इस बात का संकेत हैं कि इंदौर जैसी त्रासदी दोहराने से रोकने के लिए सरकार गंभीर है।
स्वच्छ जल अभियान पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री डॉ मोहन
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या मंडीदीप में सामने आई लापरवाहियों पर भी उसी गंभीरता से कार्रवाई होगी, जैसा स्वच्छ जल अभियान (Swachh Jal Abhiyan) में दावा किया जा रहा है, या फिर यह मामला भी निरीक्षण और आश्वासनों तक सीमित रह जाएगा। शहरवासियों की निगाहें अब इस पर टिकी हैं कि प्रदेश स्तर पर शुरू हुआ यह अभियान मंडीदीप की ज़मीन पर कब और कितना असर दिखाता है, क्योंकि यहां की लापरवाही किसी बड़े स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है।
इनका कहना…
“आज निरीक्षण के दौरान मंडीदीप के कुछ वार्डों में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था में गंभीर खामियां सामने आई हैं। कई स्थानों पर पाइपलाइन नालियों के बीच से गुजर रही है, संबंधितों को तत्काल पाइपलाइन की जांच, मरम्मत और आवश्यक सुधार के निर्देश दिए गए हैं। आगे भी इसी तरह जांच की जाएगी किसी भी हालत में दूषित पानी की सप्लाई नहीं होने दी जाएगी और इस संबंध में लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
चंद्रशेखर श्रीवास्तव, एसडीएम-गौहरगंज
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“दैनिक तेजस रिपोर्टर“
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