न्यूज डेस्क, भोपाल
गौहरगंज में मासूम के साथ दरिंदगी के आरोपी सलमान ने पुलिस और स्थानीय लोगों को गुमराह करने के लिए हर संभव कोशिश की, लेकिन अंततः भोपाल में उसकी चालें धरी की धरी रह गईं। पकड़े जाने के बाद करीब डेढ़ घंटे तक वह अपने असली नाम, पहचान और पते को लेकर झूठ बोलता रहा। खुद को ‘अंसार’ बताते हुए वह दावा करता रहा कि वह आष्टा का रहने वाला है। यहां तक कि वह यह तक कहता रहा कि उसे रायसेन में किसी भी प्रकार की रेप की घटना की उसे कोई जानकारी नहीं है।
गुरुवार रात गांधी नगर इलाके में कुछ युवकों ने उसे सबसे पहले रोका था। उन्हीं में से एक रिजवान बताते हैं कि उन्हें इस संदिग्ध युवक की जानकारी दोस्त राजा ने दी थी। सोशल मीडिया पर आरोपी की तस्वीरें वायरल थीं और इसी वजह से उसे पहचानना ज्यादा मुश्किल नहीं था। मौके पर पहुंचकर रिजवान ने सबसे पहले पुलिसकर्मी राहुल गुरु को सलमान की तस्वीर भेजी, जिन्होंने रायसेन पुलिस से पुष्टि कर मामले की गंभीरता बताई। थोड़ी देर बाद पुलिस दल वहां पहुंच गया और सलमान को हिरासत में ले लिया गया।

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कमरा ढूंढते ही सलमान फंसा, युवकों की सतर्कता से बच नहीं पाया
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झूठा नाम, झूठा पता—सलमान की आधे घंटे की कहानी ध्वस्त
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डीआईजी बंगले पर मजदूरी करता रहा रेप आरोपी, रातें फुटपाथ पर बिताईं
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हमीदिया में भर्ती सलमान, पैर में संक्रमण बढ़ा; रिमांड आगे बढ़ सकती है
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हिंदू संगठन ने मांगी पनाह देने वालों पर कार्रवाई, पुलिस जांच कर रही
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गौहरगंज से गांधी नगर तक सलमान की फरारी—जंगल रास्तों से छलता रहा पुलिस को
पूछताछ के दौरान सलमान न तो आधार कार्ड दिखा पाया, न कोई पहचान पत्र। वह लगातार दावा करता रहा कि उसका किसी अपराध से कोई संबंध नहीं। रायसेन पुलिस के पहुंचने तक युवक उसी स्थान पर स्थानीय लोगों के बीच बैठा रहा, क्योंकि भीड़ बढ़ने लगी थी। हिंसा की आशंका से बचने के लिए पुलिस ने उसे चुपचाप वहां से ले जाकर रायसेन के लिए रवाना कर दिया।
22 नवंबर को पहुंचा था भोपाल
वारदात के बाद सलमान की फरारी काफी योजनाबद्ध दिखाई देती है। बच्ची से दुष्कर्म करने के अगले ही दिन 22 नवंबर को वह भोपाल पहुंच गया था। यहां आने के बाद वह अलग-अलग स्थानों पर भटकता रहा। कभी 12 नंबर बस स्टॉप के आसपास बैठा रहा, तो रात उसने कब्रिस्तान क्षेत्र में बिताई। पैसों की कमी होने के बावजूद उसने काजी कैंप में खाना खरीदकर खुद को संभाला। अगले तीन दिनों तक वह डीआईजी बंगले के पास मजदूरी करता रहा और रात में मॉडल ग्राउंड की पीली बिल्डिंग के सामने सोता रहा। गिरफ्तारी से एक दिन पहले उसने मिनाल क्षेत्र से शराब खरीदी और वही से निकलकर गांधी नगर पहुंच गया।

इसी दौरान वह किराए पर कमरा ढूंढता नजर आया, जिससे युवकों का शक और पुख्ता हो गया। सलमान, अब्दुल और आसिफ नाम के युवकों ने उसे रोककर रिजवान को सूचना दी। फोटो मिलान के बाद पुलिस को उसकी लोकेशन भेजी गई और गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू हो गई।

गिरफ्तारी के कुछ घंटों बाद सलमान को हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया, क्योंकि भागने की कोशिश में पुलिस की गोली उसके पैर में लगी थी। डॉक्टरों के अनुसार उसके पैर में बारूद की वजह से संक्रमण बढ़ गया था। सर्जरी के बाद डॉक्टर उसे निगरानी में रखे हुए हैं। पूरी तरह स्वस्थ होने में अभी समय लगेगा। पुलिस उसे दस दिन की रिमांड पर ले चुकी है और आवश्यकता पड़ने पर रिमांड अवधि बढ़ाई भी जा सकती है।

इस बीच हिंदू संगठनों ने भी सलमान को मदद देने वालों पर कार्रवाई की मांग की है। मां भवानी संगठन के कार्यकर्ताओं ने एसीपी उमेश तिवारी को ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि सलमान को साईं बोर्ड इलाके में रहने वाले कुछ लोगों ने पनाह दी थी। उन्होंने मांग की कि इन लोगों की भूमिका की जांच की जाए और दोष पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जाए।

पूछताछ में सलमान ने कबूल किया कि बच्ची उसे आसान शिकार लगी थी। उसे यह अंदाजा नहीं था कि बच्ची की हालत बिगड़ जाएगी और मामला पूरी तरह खुल जाएगा। बच्ची के शोर मचाने पर उसने मारपीट की और घबराकर जंगल की ओर भाग निकला। वह लगातार मास्क लगाकर चलता रहा और फुटपाथों पर रात गुजारकर पुलिस को चकमा देने की कोशिशें करता रहा। आउटर रूट से घूमते हुए वह दोबारा गांधी नगर पहुंचा, जहां उसकी पहचान उजागर हो गई।

इसी बीच जांच में यह भी पता चला कि सलमान पहले से बुदनी थाना क्षेत्र का स्थायी वारंटी था। 2019 में घर में घुसकर मोबाइल चोरी करने के मामले में उसे गिरफ्तार किया गया था, लेकिन वह कोर्ट की सुनवाई से लगातार गायब रहता रहा। 2023 में बुदनी न्यायालय ने उसे स्थायी वारंटी घोषित कर दिया था। वर्षों से फरार चल रहे इस आरोपी को पकड़ने में पुलिस को भारी चुनौती का सामना करना पड़ा।

घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया और पुलिस को कानून-व्यवस्था संभालने में भारी मशक्कत करनी पड़ी। टाइमलाइन बताती है कि 21 नवंबर की रात बच्ची की तलाश शुरू हुई, 22 से 26 नवंबर तक लगातार प्रदर्शन और चक्काजाम हुए, जिसके चलते पुलिस का एक बड़ा हिस्सा प्रदर्शनकारियों को काबू में करने में लगा रहा। इसी वजह से आरोपी की तलाश पर असर पड़ा और सलमान कई दिनों तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा।

27 नवंबर की रात 11:15 बजे भोपाल की गांधी नगर पुलिस ने सलमान को पकड़ा और अगले दिन सुबह करीब 3:30 बजे वह भागने की कोशिश में पुलिस से भिड़ गया, जिसके बाद उसका शॉर्ट एनकाउंटर हुआ।

यह पूरा मामला एक बार फिर दर्शाता है कि अपराधी कितना चलतााक क्यों न हो, स्थानीय नागरिकों की सजगता और पुलिस की लगातार कोशिशें अंततः उसे कानून के कटघरे तक ले ही आती हैं। लेकिन यह घटना पुलिस व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन और जांच प्रक्रिया पर कई गंभीर सवाल भी खड़े करती है—जिनके जवाब अभी आने बाकी हैं।
संक्षिप्त विवरण :
21 नवंबर — घटना की शुरुआत
शाम 7:30 बजे
मासूम बच्ची अचानक घर के बाहर से गायब हो गई। परिवार को उसकी अनुपस्थिति महसूस होते ही बेचैनी बढ़ने लगी।
रात 8:00 बजे
परिजनों ने आसपास की गलियों, सड़कों और खेतों में उसकी खोजबीन तेज कर दी, लेकिन कोई पता नहीं चला।
रात 8:30 बजे
लगभग आधे घंटे बाद बच्ची गंभीर हालत में जंगल के किनारे मिली। उसकी स्थिति देखकर परिवार दहशत में आ गया।
रात 9:00 बजे
घटना की गंभीरता को देखते हुए परिजन बच्ची को तुरंत गौहरगंज थाने लेकर पहुंचे और पुलिस को मामले की जानकारी दी।
रात 10:00 बजे
बच्ची को औबेदुल्लागंज अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां एम्बुलेंस उपलब्ध न होने से इलाज में देरी होती दिखी।
रात 11:30 बजे
परिवार ने खुद इंतजाम कर निजी वाहन से बच्ची को तेजी से एम्स भोपाल रेफर कराया।
22 नवंबर — पहला बड़ा जनआंदोलन
गौहरगंज थाने के बाहर बड़ी संख्या में लोग जमा हुए। गुस्साए नागरिकों ने आरोपी की गिरफ्तारी की मांग करते हुए सड़क जाम कर दिया।
23 नवंबर — उग्र विरोध और हाईवे ब्लॉक
औबेदुल्लागंज–गौहरगंज चौराहे पर स्थानीय लोग एकजुट हुए। भीड़ ने करीब दो घंटे तक लगातार विरोध जताया और राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्काजाम कर दिया, जिससे यातायात ठप हो गया।
24 नवंबर — मंडीदीप बंद और हाईवे पर प्रदर्शन
मंडीदीप में बाजार पूरी तरह बंद रहे। युवाओं ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर उतरकर प्रदर्शन किया और ट्रैफिक रोककर अपना आक्रोश जताया।
25 नवंबर — धरना, राजनीतिक उपस्थिति और प्रशासनिक हलचल
थाने के बाहर एक बार फिर धरना शुरू हुआ। कई कांग्रेस नेताओं ने स्थल पर पहुंचकर विरोध में भागीदारी की। बढ़ते दबाव के बीच आईजी और डीआईजी भी मौके पर पहुंचे।
रात गहराने से पहले ही मुख्यमंत्री ने अफसरों की आपात बैठक बुलाई और उसी रात रायसेन एसपी को हटाने का आदेश जारी कर दिया।
26 नवंबर — अघोषित कर्फ्यू और तनावपूर्ण माहौल
गौहरगंज में दिनभर बाजार बंद रहे और वातावरण कर्फ्यू जैसा बना रहा। सुरक्षा के लिए छह जिलों से 500 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए गए।
कुछ युवक आरोपी को पकड़े जाने तक मुस्लिम बस्ती में मार्च करना चाहते थे, जिसे पुलिस ने रोक लिया।
रोके जाने पर तनाव बढ़ा, पथराव हुआ और जवाब में पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी।
27 नवंबर — भोपाल में आरोपी की गिरफ्तारी
रात 11:15 बजे गांधी नगर पुलिस ने संदिग्ध की लोकेशन ट्रेस कर अयोध्या नगर इलाके से सलमान को धर-दबोचा।
28 नवंबर — फरार होने की कोशिश और ‘शॉर्ट एनकाउंटर’
तड़के करीब 3:30 बजे रायसेन ले जाते समय आरोपी ने पुलिस से हथियार छीना और भागने का प्रयास किया। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने उसके पैर में गोली मारी और उसे दोबारा हिरासत में ले लिया।
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Author: PANKAJ JAIN
पत्रकारिता में 2009 से सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। "दैनिक अग्निबाण" में लंबी पारी के बाद "SCN NEWS" सहित कई संस्थानों में न्यूज़ डेस्क का नेतृत्व किया। वर्तमान में सा. "क्राइम अगेंस्ट न्यूज", दैनिक "तेजस रिपोर्टर" और कई डिजिटल प्लेटफार्म के संपादकीय प्रमुख हैं। सामाजिक सरोकारों, विशेषकर हाशिए पर खड़े वर्ग और अन्याय के मुद्दों पर लेखन में विशेष रुचि रखते हैं। इसके साथ ही "जिनोदय" और "पंकज का पंच" जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के निदेशक हैं, जो जनचेतना और वैचारिक संवाद को बढ़ावा देने का माध्यम हैं।





