राजधानी में बड़ा खुलासा: बरखेड़ा बोन्दर पंचायत में बिना हस्ताक्षर के भुगतान! सचिव बोले – “गलती हुई है, इसे नकारा नहीं जा सकता”

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भोपाल | राजधानी के फ़ंदा ब्लॉक की बरखेड़ा बोन्दर ग्राम पंचायत में सामने आया भ्रष्टाचार का मामला स्थानीय शासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पंचायत में सीसी रोड निर्माण के लिए मजदूरी भुगतान के जिन वाउचरों की जांच की गई, उनमें से कई बिल बिना सरपंच कैलाश कुशवाहा और पंचायत के सचिव रहे रतनलाल मीना के हस्ताक्षर व मुहर के पाए गए।

इतना ही नहीं, दस्तावेज़ों की पड़ताल के दौरान अन्य कई खर्चों की रसीदें भी मिलीं जिन पर किसी जिम्मेदार अधिकारी के हस्ताक्षर तक नहीं थे। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि सरकारी धन खर्च करने की प्रक्रिया में भारी अनियमितताएँ बरती गई हैं।

राजधानी की पंचायत, और इतने बड़े सवाल

यह मामला किसी दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र का नहीं बल्कि मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल का है – वही शहर जहाँ राज्य के मुख्यमंत्री, मंत्री और शीर्ष अधिकारी रोज बैठकों में विकास की समीक्षा करते हैं। राजधानी की सीमा में घटित यह फर्जीवाड़ा बताता है कि निगरानी तंत्र कितना लचर है और पंचायत स्तर पर उत्तरदायित्व का अभाव कितना गंभीर रूप ले चुका है।
                 मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव (फाइल फोटो)
बिना जांच के पास हुए ये वाउचर यह संकेत देते हैं कि यह केवल किसी एक कर्मचारी की लापरवाही नहीं, बल्कि एक संगठित कार्यप्रणाली का हिस्सा भी हो सकता है। सवाल यह भी उठा है कि जनपद और जिला स्तर के अधिकारी इन अनियमितताओं को क्यों नहीं देख पाए – या फिर क्या वे भी इस चुप्पी की कड़ी का हिस्सा हैं?

सचिव संतोष कुमार का बयान: “मैं सिर्फ चार महीने से यहाँ हूँ, गलती हुई है – सोशल ऑडिट की भी चूक”
जब वर्तमान पंचायत सचिव संतोष कुमार से इस मामले में बात की गई, तो उन्होंने कई अहम बातें स्वीकार कीं। अपने बचाव में उन्होंने कहा –
मैं इस पंचायत में सिर्फ चार महीने पहले आया हूँ। इससे पहले यहाँ सचिव रतनलाल मीना पदस्थ थे, जिन्हें अब खेजड़ा देव पंचायत में ट्रांसफर किया गया है। गलती हुई है, इसे नकारा नहीं जा सकता। सोशल ऑडिट करने वालों की भी बड़ी चूक है।”
सचिव के इस बयान ने कई नई परतें खोल दी हैं – क्या पूर्व सचिव के कार्यकाल में अनियमितताएँ हुईं? क्या सोशल ऑडिट टीम अपनी भूमिका में असफल रही? और क्या यह गड़बड़ सिर्फ दिखी उतनी छोटी है या इसके पीछे और भी बड़े खेल छिपे हैं?

तेजस रिपोर्टर की पड़ताल जारी

दैनिक अखबार “तेजस रिपोर्टर”की टीम इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। सचिव, पूर्व सचिव, सोशल ऑडिट टीम, और पंचायत के अन्य संबंधित अधिकारियों तक सभी के पक्ष और कागज़ी रिकॉर्ड की तथ्यात्मक पड़ताल की जा रही है।
यह रिपोर्टिंग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पंचायत स्तर पर मिलने वाले सरकारी अनुदान गाँव के विकास और जनता की भलाई के लिए होते हैं-लेकिन अगर इन्हीं योजनाओं में हेराफेरी की परंपरा जड़ें जमा ले, तो विकास नाम मात्र रह जाता है।

क्या आय से अधिक संपत्ति की जांच होगी?

सचिव और संबंधित कर्मचारियों की घोषित आय और वास्तविक संपत्ति में अंतर का विश्लेषण भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह जांच बताएगी कि कहीं सरकारी धन किसी निजी संपत्ति में तो नहीं बदल रहा।
साथ ही जिला प्रशासन और जनपद अधिकारियों से भी जवाब मांगा जाएगा कि इतने स्पष्ट बिलों की अनियमितता क्यों अनदेखी की गई।

क्या होगी कार्रवाई – या यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा?

यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही की परीक्षा है।
अगर राजधानी के पास स्थित पंचायत में भ्रष्टाचार के इतने प्रमाण मिलते हैं और फिर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, तो यह संदेश जाएगा कि सिस्टम की खामियां खत्म करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति अभी भी कमजोर है।

अब बड़ा सवाल यह है

क्या दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी, या बरखेड़ा बोन्दर भी उन अनगिनत घोटालों की सूची में शामिल हो जाएगा जिनकी गूंज कुछ दिनों बाद खो जाती है?

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SURAJ MEHRA
Author: SURAJ MEHRA

साल 2022 से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत "सूरज मेहरा" आज भी निरंतर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मध्यप्रदेश की राजनीति, करंट अफेयर्स में विशेष रुचि है , साथ ही ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव है , यहाँ मध्यप्रदेश की हर छोटी बड़ी हलचल पर नज़र रहती है

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