भाजपा विधायक सुरेंद्र पटवा का गिरफ्तारी वारंट जारी

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रिपोर्ट – राजू अतुलकर
भोपाल/इंदौर – भोजपुर से भाजपा विधायक और मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री सुरेंद्र पटवा की कानूनी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।
मिडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इंदौर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने मंगलवार को उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (एमएलए कोर्ट) ने पटवा पर धारा 420 (धोखाधड़ी), 409 (आपराधिक विश्वासघात) और 120B (आपराधिक साजिश) के तहत यह वारंट जारी करते हुए पुलिस को आदेश दिया है कि उन्हें 16 सितंबर को अदालत में पेश किया जाए।
बैंक से लिया था 36 करोड़ का लोन
मामला 15 सितंबर 2014 से जुड़ा है। पटवा की कंपनी ने बैंक से 36 करोड़ रुपये का लोन लिया था, लेकिन समय पर किस्तें जमा नहीं कीं। बैंक की शिकायत पर यह केस दर्ज हुआ। आरोप है कि लोन की राशि का दुरुपयोग किया गया और भुगतान टालने की लगातार कोशिश की गई।
70 से ज्यादा चेक बाउंस केस लंबित
पटवा के खिलाफ 70 से ज्यादा चेक बाउंस के मामले भी अलग-अलग अदालतों में लंबित हैं। इनमें से ज्यादातर केस हाईकोर्ट तक पहुंच चुके हैं। कुछ मामलों में उन्हें राहत मिली, लेकिन कई मामलों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। अदालत के बार-बार नोटिस भेजने के बावजूद पटवा पेश नहीं हो रहे थे, जिसके चलते कोर्ट को गिरफ्तारी वारंट जारी करना पड़ा।

CBI ने भी दर्ज किया था केस
यह पहला मौका नहीं है जब पटवा कानूनी शिकंजे में आए हैं। अक्टूबर 2021 में सीबीआई ने सुरेंद्र पटवा और उनकी पत्नी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था। यह केस बैंक ऑफ बड़ौदा की इंदौर शाखा की शिकायत पर हुआ था। आरोप था कि पटवा परिवार ने बैंक से जुड़े वित्तीय लेन-देन में गड़बड़ी की।
सुप्रीम कोर्ट से भी लगा झटका
अप्रैल 2025 में सुरेंद्र पटवा को सुप्रीम कोर्ट से भी बड़ा झटका लगा था। मामला अलग-अलग बैंकों में फर्जी खाते खोलने से जुड़ा था। सीबीआई ने पटवा, विजय सोनी और राजीव सोनी के नाम पर संदिग्ध खातों की जांच के बाद FIR दर्ज की थी।
25 जुलाई 2023 को हाईकोर्ट ने FIR को निरस्त कर दिया था, लेकिन 25 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश पलट दिया। अदालत ने कहा कि आपराधिक मामलों में FIR दर्ज करने से पहले आरोपी का पक्ष सुनना जरूरी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने FIR को बहाल करते हुए इसे दोबारा हाईकोर्ट को भेज दिया।
राजनीतिक हलकों में हलचल
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के भतीजे होने के कारण यह मामला केवल कानूनी ही नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी गंभीर माना जा रहा है। पार्टी के भीतर और बाहर इस घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार अदालतों से पटवा को झटके मिलना उनकी राजनीतिक साख पर सीधा असर डाल सकता है।

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Raju Atulkar
Author: Raju Atulkar

"पत्रकारिता सिर्फ पेशा नहीं, जिम्मेदारी भी है…" साल 2015 से कलम की स्याही से सच को उजागर करने की यात्रा जारी है। समसामयिक मुद्दों की बारीकियों को शब्दों में ढालते हुए समाज का आईना बनने की कोशिश। — राजू अतुलकर, तेजस रिपोर्टर डिजिटल

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