रिपोर्ट – इंदौर ब्यूरो
इंदौर | देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता उस समय राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गई, जब मंच पर इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव के बेटे संघमित्र भार्गव ने बेबाकी से रेलवे की खामियों पर सवाल उठाए। उनके भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे न केवल रेलवे की विफलताओं की पोल खोलते नजर आ रहे हैं, बल्कि सरकार की घोषणाओं और हकीकत के बीच की गहरी खाई को भी उजागर कर रहे हैं।
सबसे खास बात यह रही कि संघमित्र का यह भाषण उस मंच पर हुआ जहां खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर जैसे वरिष्ठ नेता मौजूद थे। उनके तीखे शब्दों पर जहां पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा, वहीं बड़े नेता भी मुस्कुराए बिना नहीं रह सके। लेकिन मंच पर बैठे उनके पिता, इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव के चेहरे पर असहजता साफ झलक रही थी।
रेलवे में “दलालों का साथ, जनता का विनाश”
संघमित्र ने अपने भाषण की शुरुआत ही एक करारी टिप्पणी से की। उन्होंने कहा:
“सरकार कहती है ‘सबका साथ, सबका विकास’, लेकिन रेलवे में हो रहा है दलालों का साथ और जनता का विनाश।”
उन्होंने आंकड़ों के साथ बताया कि हर साल लगभग 50 लाख यात्री टिकट बुक कराने के बावजूद यात्रा नहीं कर पाते, क्योंकि वेटिंग लिस्ट खत्म ही नहीं होती। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बुलेट ट्रेन के नाम पर जनता को “पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन” से बहलाया जा रहा है, जबकि जमीन अधिग्रहण में घोटाले हो चुके हैं और परियोजना का कोई ठोस परिणाम अब तक सामने नहीं आया है।
“कवच तकनीक नहीं बचा पाई जानें”
संघमित्र ने सरकार की ‘कवच तकनीक’ की भी तीखी आलोचना की, जिसके तहत दावा किया गया था कि रेल हादसों में भारी कमी आएगी। लेकिन उन्होंने बताया कि पिछले 10 वर्षों में 20,000 से अधिक लोग रेल दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवा चुके हैं।
“जब ट्रेन पटरी से उतरती है, तो केवल डिब्बे नहीं टूटते, किसी मां की गोद उजड़ जाती है, किसी बच्चे का भविष्य अंधकार में चला जाता है।”
उनका यह मार्मिक बयान मंच पर बैठे कई लोगों की आंखें नम कर गया।
स्टेशन रीडेवलपमेंट: वादे बड़े, नतीजे छोटे
संघमित्र ने स्टेशन रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने 400 रेलवे स्टेशनों को एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं देने का वादा किया था, लेकिन अब तक सिर्फ 20 स्टेशनों पर ही आंशिक काम हो पाया है।
“चमकते बोर्ड ज़रूर लगे हैं, लेकिन पीने का पानी महंगा है और भीड़ जस की तस।”
अधूरी योजनाएं और फंड डायवर्जन पर सवाल
अपने भाषण के अंत में संघमित्र ने CAG रिपोर्ट का हवाला देते हुए खुलासा किया कि रेलवे को सवा लाख करोड़ रुपये का बजट मिला था, लेकिन 80% से अधिक परियोजनाएं अब तक अधूरी हैं। उन्होंने दावा किया कि 78% सुरक्षा फंड को दूसरे कार्यों में डायवर्ट कर दिया गया और एक निजी कंपनी को अकेले 300 करोड़ रुपये का निवेश सौंप दिया गया।
“ऐसे में कैसे होगा सबका विकास? या सिर्फ कुछ लोगों का विकास?”
सीएम और मेयर की प्रतिक्रियाएं भी बनीं चर्चा का विषय
संघमित्र के इस तीखे भाषण के बाद मंच पर मौजूद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हल्के-फुल्के अंदाज़ में कहा:
“मुझे नहीं पता कि किसने इसकी तैयारी कराई, पर एक कहावत है – चोर की दाढ़ी में तिनका। मैं ये आपके लिए नहीं कह रहा।”
वहीं महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मुस्कुराते हुए कहा:
“इस भाषण की तैयारी मैंने नहीं कराई थी।”
हालांकि उनके चेहरे पर छुपी असहजता को वहां मौजूद सभी लोगों ने महसूस किया।
क्या यह सिर्फ वाद-विवाद था या युवा आवाज़ का संकेत?
संघमित्र भार्गव का यह भाषण सिर्फ एक प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं रहा। यह सिस्टम पर एक युवा की नाराजगी, आंकड़ों के जरिए सवाल, और एक जिम्मेदार नागरिक की चिंता का आईना बन गया। मंच पर नेताओं की मौजूदगी में इस तरह की बेबाक आलोचना ने यह स्पष्ट कर दिया कि आज का युवा सिर्फ भाषण नहीं देना चाहता, वह बदलाव की भी मांग कर रहा है।
संघमित्र भार्गव के इस भाषण ने एक बार फिर यह साबित किया है कि आज के युवाओं के पास तथ्य भी हैं, सोच भी है और सवाल उठाने का साहस भी। अब देखना यह होगा कि ये सवाल महज़ प्रतियोगिता के मंच तक सीमित रह जाते हैं या वाकई कोई सकारात्मक बहस और सुधार की दिशा में कदम उठते हैं।
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Author: Raju Atulkar
"पत्रकारिता सिर्फ पेशा नहीं, जिम्मेदारी भी है…" साल 2015 से कलम की स्याही से सच को उजागर करने की यात्रा जारी है। समसामयिक मुद्दों की बारीकियों को शब्दों में ढालते हुए समाज का आईना बनने की कोशिश। — राजू अतुलकर, तेजस रिपोर्टर डिजिटल







