रिपोर्ट – विशेष संवाददाता
भोपाल | देशभर में मेडिकल शिक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं – गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कुशल डॉक्टर और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं। लेकिन जब जमीनी हकीकत से पर्दा उठता है, तो तस्वीर डरावनी हो जाती है। भोपाल स्थित एनआरआई आयुर्वेद कॉलेज का मामला ठीक यही दर्शाता है — शिक्षा नहीं, बल्कि शोषण और धोखे का खेल।
बिना प्रैक्टिस के डॉक्टर? मरीजों की जान से खिलवाड़!
इस कॉलेज की सबसे खतरनाक सच्चाई यह है कि यहां प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पूरी तरह से नदारद है।ओपीडी में कोई मरीज मौजूद नहीं,
गेट पर ताला जड़ा मिला ,आईपीडी पूरी तरह खाली, मरीज नदारत छात्रों को असली मरीज से संवाद तक का अवसर नहीं ऐसे में छात्र बिना किसी प्रैक्टिकल अनुभव के बीएएमएस (BAMS) की डिग्री ले रहे हैं। सोचिए — एक ऐसा डॉक्टर जो एक भी मरीज को छुए बिना डिग्री लेकर निकला हो, वह इलाज के नाम पर समाज के लिए कितना बड़ा खतरा बन सकता है।
जानकारों का कहना है
“डॉक्टर की असली ट्रेनिंग किताबों में नहीं, मरीजों के बिस्तर के पास होती है। ऐसी शिक्षा न सिर्फ अधूरी है, बल्कि घातक है।”
छात्रों का भविष्य और मरीजों की जान — दोनों दांव पर
एनआरआई आयुर्वेद कॉलेज में 60 सीटों की मान्यता है। नियमानुसार:
रोजाना 120 ओपीडी और 36 आईपीडी मरीज अनिवार्य हैं।
साथ ही, 60 छात्रों के लिए 36 बैचलर एजुकेटेड फैकल्टी का होना आवश्यक है।

सूत्रों की माने तो इन मानकों का न केवल उल्लंघन हो रहा है, बल्कि मरीजों की गैरमौजूदगी में छात्रों को सिर्फ थ्योरी पढ़ाई जा रही है। इसका सीधा असर न केवल छात्रों की दक्षता पर पड़ता है, बल्कि भविष्य में आम जनता की सुरक्षा पर भी गंभीर खतरा बन सकता है।
हमारी विशेष मांग: तत्काल जांच और ठोस कार्रवाई
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बिना मरीजों वाले कॉलेजों की मान्यता तत्काल प्रभाव से रोकी जाए।
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प्रैक्टिकल अनुभव को मेडिकल शिक्षा का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाए।
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नियमों की अनदेखी करने वाले कॉलेजों पर कठोर कार्रवाई कर आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
यह खबर सिर्फ एक कॉलेज की नहीं — यह सवाल है उस भरोसे का, जो हम डॉक्टरों पर करते हैं। क्या मेडिकल डिग्री की आड़ में समाज को झूठा भरोसा दिया जा रहा है?
क्या ऐसे डॉक्टरों को हम अपने परिवार की जान सौंपने को तैयार हैं?
हमारी टीम आने वाले दिनों में इस प्रकरण से जुड़ी और भी परतें उजागर करेगी।
जिम्मेदार संस्थाओं और सरकार से अपेक्षा है कि इस गंभीर मुद्दे पर त्वरित और कठोर कदम उठाए जाएं।
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Author: SURAJ MEHRA
साल 2022 से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत "सूरज मेहरा" आज भी निरंतर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मध्यप्रदेश की राजनीति, करंट अफेयर्स में विशेष रुचि है , साथ ही ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव है , यहाँ मध्यप्रदेश की हर छोटी बड़ी हलचल पर नज़र रहती है
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