“मां की बगिया” के नाम पर बच्चों का खेल मैदान जोता! – शिक्षिका ने स्कूल को बना दिया खेत

SHARE:

रिपोर्ट – अतुल कुमार जैन
शिवपुरी | जब शिक्षक ही बच्चों के अधिकार रौंदने लगे…
जिस मैदान में बच्चों की हंसी गूंजनी चाहिए, वहां अब मूंग की हरियाली लहरा रही है। जिस जमीन पर दौड़ते-कूदते सपने पंख फैलाते हैं, वहां अब खेती की रेखाएं खिंच चुकी हैं। यह कोई कहानी नहीं, बल्कि शिवपुरी जिले की एक सरकारी स्कूल की हकीकत है, जिसने सभी को चौंका दिया है।
पूरा मामला – खेल का मैदान बना खेत
ग्राम झूतरी के शासकीय माध्यमिक विद्यालय में पदस्थ प्रधानाध्यापिका रजनी पचौरी ने विद्यालय के करीब दो बीघा के खेल मैदान में ट्रैक्टर से जुताई करवाकर मूंग की फसल बो दी। यह वही मैदान है जो बच्चों की खेल गतिविधियों और शारीरिक विकास का एकमात्र साधन था।
इस हरकत से स्कूल के सैकड़ों बच्चों का खेलने का हक छिन गया, और ग्रामीणों का सब्र टूट गया।
ग्रामीणों ने किया विरोध, तो मिला अहंकार भरा जवाब
जब ग्रामीणों ने शिक्षिका से इस पर सवाल किए, तो उन्होंने न केवल जवाबी तंज कसा बल्कि
,पत्रकारों से भी अभद्र भाषा में बात करते हुए कहा:

“थोड़ी सी जगह सब्जी बो ली तो क्या बुरा कर दिया? बाकी मैदान तो पड़ा है। ये जगह तो मैंने मां की बगिया के नाम से ली है, इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।”
क्या सरकारी ज़मीन अब ‘मां की बगिया’ कहलाएगी?
क्या प्रधानाध्यापिका को यह अधिकार है कि वह बच्चों के भविष्य से यूं खेलें?
शिकायत के बाद प्रशासन सक्रिय, DPC ने दिए जांच के आदेश
ग्रामीणों की लिखित शिकायत के बाद कलेक्टर कार्यालय और शिक्षा विभाग हरकत में आया। जिला परियोजना समन्वयक (DPC) दफेदार सिंह सिकरवार ने मामले को गंभीर मानते हुए तत्काल जांच के निर्देश दिए और बीआरसीसी को भेजकर पंचनामा तैयार करवाया।
DPC सिकरवार ने स्पष्ट कहा:
“स्कूल का खेल मैदान, स्कूल का ही रहेगा। इस पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण नहीं होने दिया जाएगा। जांच के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
महत्वपूर्ण बिंदु एक नजर में:
  • स्कूल की प्रधानाध्यापिका ने खेल मैदान में मूंग बोई
  • बच्चों के खेलने का मैदान छीना गया
  • ग्रामीणों ने कलेक्टर को की शिकायत
  • शिक्षिका का जवाब – “थोड़ी जगह ली है, क्या बुरा कर दिया?”
  • DPC ने बीआरसीसी से जांच कराई, कार्रवाई की तैयारी
कानून क्या कहता है?
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और RTE कानून के तहत प्रत्येक विद्यालय में खेल मैदान का होना अनिवार्य है। स्कूल परिसर का किसी भी तरह का व्यक्तिगत उपयोग नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है और यह दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।
खेल से वंचित बच्चे, भविष्य पर खतरा
खेल मैदान केवल खेलने की जगह नहीं, वह बच्चों की शारीरिक, मानसिक और सामाजिक वृद्धि का आधार है। जब यही जगह निजी स्वार्थ के लिए हथिया ली जाए, तो यह एक पीढ़ी के सपनों को कुचलने जैसा है।
शिक्षा का अपमान या नियमों की अनदेखी?
इस घटना ने सिर्फ एक स्कूल नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। क्या अब शिक्षक ही सरकारी ज़मीन पर कब्जा करेंगे? क्या प्रशासन दिखाएगा सख्ती, या यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा?

ये ख़बर आपने पढ़ी देश के तेजी से बढ़ते लोकप्रिय हिंदी आज तेजी से बदलते परिवेश में जहां हर क्षेत्र का डिजिटलीकरण हो रहा है, ऐसे में
दैनिक तेजस रिपोर्टर
www.tejasreporter.com सटीक समाचार और तथ्यात्मक रिपोर्ट्स लेकर आधुनिक तकनीक से लैस अपने डिजिटल प्लेटफार्म पर प्रस्तुत है। अपने निडर, निष्पक्ष, सत्य और सटीक लेखनी के साथ…24X7
मैं पंकज जैन ✍️और मेरे सहयोगी अब आप तक देश विदेश की महत्वपूर्ण खबरों को पहुंचाने के लिए कटिबद्ध हैं।
ऐसी ही ताज़ा और अहम ख़बरों के लिए जुड़े रहें!
सभी अपडेट्स व नोटिफिकेशन प्राप्ति के लिए नीचे दिए गए बेल आइकन पर क्लिक कर अभी सब्सक्राइब करें।
Raju Atulkar
Author: Raju Atulkar

"पत्रकारिता सिर्फ पेशा नहीं, जिम्मेदारी भी है…" साल 2015 से कलम की स्याही से सच को उजागर करने की यात्रा जारी है। समसामयिक मुद्दों की बारीकियों को शब्दों में ढालते हुए समाज का आईना बनने की कोशिश। — राजू अतुलकर, तेजस रिपोर्टर डिजिटल

Join us on:

सबसे ज्यादा पड़ गई
Marketing Hack4u