रिपोर्ट – अतुल कुमार जैन
शिवपुरी | जिले के शहर खनियाधाना में बीती रात एक भीषण अग्निकांड ने न सिर्फ एक परिवार की वर्षों की मेहनत और उम्मीदों को खाक कर दिया, बल्कि पूरे मोहल्ले को दहशत और दर्द से भर दिया। यह हादसा बिजली विभाग और प्रशासन की घोर लापरवाही का नतीजा माना जा रहा है।

घटना देर रात लगभग 12 बजे की है, जब खनियाधाना नगर के मुख्य बाजार में स्थित विवेक सोनी के साड़ी शोरूम में अचानक आग भड़क उठी। शुरूआती जानकारी के अनुसार, आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी। दुकान के ठीक ऊपर मकान की दूसरी मंजिल पर पूरा परिवार निवास करता है, ऐसे में आग ने विकराल रूप लेने में देर नहीं की।
बिजली विभाग की उदासीनता से और भड़की आग
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते बिजली विभाग फोन उठाता और मुख्य लाइन बंद की जाती, तो शायद नुकसान इतना बड़ा न होता। कॉल करने पर न तो फोन उठा और न ही कोई मदद समय पर पहुंची। इस लापरवाही ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया – हैक्या आम जनता की सुरक्षा और सपनों की कोई कीमत नहीं है?
मकान और दुकान दोनों चपेट में, 50 लाख का नुकसान

घटना के समय विवेक की माँ और घर के पिछले हिस्से में रह रहीं उनकी बुआ अंदर ही थीं। मोहल्लेवालों की सूझबूझ और हिम्मत से उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया। साथ ही घर में रखे चार गैस सिलेंडर भी बाहर निकाले गए, जिससे एक बड़ी अनहोनी टली।
शोरूम में कुछ दिन पहले ही करीब 10 लाख रुपये की साड़ियाँ स्टॉक की गई थीं। एक साल पहले बड़े अरमानों से खोली गई दुकान देखते ही देखते जलकर खाक हो गई। मकान, सामान और साजो-सामान सहित कुल 50 लाख रुपये से अधिक का नुकसान आंका जा रहा है।
स्थानीय मदद से बुझाई आग, फायर ब्रिगेड पहुँची देर से
बिजली गुल होने के कारण पानी की आपूर्ति नहीं हो सकी। ऐसे में मोहल्लेवालों ने बोरिंग से पानी निकालकर आग पर काबू पाने की कोशिश की। राकेश सोनी समेत कई पड़ोसी मदद के लिए आगे आए और अपना सामान भी बाहर कर लिया।
खनियाधाना, पिछोर और चंदेरी से फायर ब्रिगेड की टीमें बुलाई गईं, लेकिन जब तक वह पहुँचीं, तब तक आग पूरे भवन को अपनी चपेट में ले चुकी थी। पूरी रात मोहल्लेवासी जागते रहे, आग बुझाने में लगे रहे। सुबह करीब 3 बजे जाकर आग पर काबू पाया जा सका।
प्रशासन और बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर से प्रशासन और बिजली विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि विभागीय लापरवाही के कारण एक परिवार की वर्षों की मेहनत पलभर में राख हो गई।
क्या कहती है जनता?
“अगर बिजली विभाग फोन उठाकर तुरंत लाइट बंद कर देता, तो शायद ये तबाही रोकी जा सकती थी। क्या हमारे सपनों की सुरक्षा इतनी सस्ती है?”
“संतोष रजक, स्थानीय निवासी“
“हमने अपने स्तर पर जो कर सकते थे किया, लेकिन प्रशासन की ओर से जो मदद मिलनी चाहिए थी, वो समय पर नहीं पहुंची।”
“राकेश सोनी, पड़ोसी“
जाँच और मुआवज़े की माँग

मोहल्लेवासियों और पीड़ित परिवार ने प्रशासन से तत्काल जाँच की माँग की है। साथ ही परिवार को आर्थिक मदद और मुआवजा देने की अपील की है।
इस भयावह आगजनी की घटना ने न केवल एक परिवार की कमाई और भविष्य को लील लिया, बल्कि यह साफ कर दिया कि अगर प्रशासन और बिजली विभाग सतर्क रहते, तो शायद इस दुर्घटना से बचा जा सकता था। यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की चुप्पी पर एक बड़ा तमाचा है।

नायब तहसीलदार ने भी घटना स्थल पर पहुंचकर नुकसान आंककर पंचनामा बनाकर लगभग एक करोड़ से ऊपर के नुकसान आंका है। साथ ही उन्होंने हितग्राही को ज्यादा से ज्यादा मदद का आश्वासन दिया है।
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Author: Raju Atulkar
"पत्रकारिता सिर्फ पेशा नहीं, जिम्मेदारी भी है…" साल 2015 से कलम की स्याही से सच को उजागर करने की यात्रा जारी है। समसामयिक मुद्दों की बारीकियों को शब्दों में ढालते हुए समाज का आईना बनने की कोशिश। — राजू अतुलकर, तेजस रिपोर्टर डिजिटल







