✍️ रिपोर्ट : स्थानीय संवाददाता
मंडीदीप, मध्यप्रदेश | औद्योगिक नगर मंडीदीप शुक्रवार की रात अचानक साम्प्रदायिक तनाव की चपेट में आ गया, जब गल्ला मंडी के पास नेशनल हाईवे पर हिन्दू संगठनों से जुड़े लोगों ने एक ट्रक को जबरन रोककर उसमें भरे भैंसों को नीचे उतार दिया और हाईवे पर खुलेआम जय श्रीराम के नारे लगाते हुए तोड़फोड़ और शक्ति प्रदर्शन किया।

बताया जा रहा है कि यह सब तब हुआ जब ट्रक भोपाल के एक बूचड़खाने की ओर जा रहा था और कानूनी रूप से जांच-पड़ताल पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आती है। मगर यहां कुछ लोगों ने पुलिस प्रशासन को सूचना न देकर खुद को न्याय का ठेकेदार समझते हुए कानून अपने हाथ में ले लिया। इस बीच मुस्लिम पक्ष से भी बड़ी संख्या में लोग घटना स्थल पर पहुंचने लगे जिससे माहौल और भी तनावपूर्ण हो गया।
कानून के बजाय लाठी से ‘न्याय’?
प्राप्त जानकारी के अनुसार हिंदू संगठनों के कुछ सदस्यों ने ट्रक की तलाशी ली और खुद ही ‘सजा’ भी तय कर दी।

अपुष्ट सूत्र बताते हैं कि वाहन चालक को बेरहमी से पीटपीटकर अधमरा कर दिया गया। रात होते-होते तनाव इतना बढ़ गया कि दोनों समुदायों के सैकड़ों लोग मंडीदीप थाने के बाहर आमने-सामने आ गए। नारेबाज़ी, प्रदर्शन और सड़क पर भीड़—कानून-व्यवस्था को धता बताते हुए यह सब उस जगह हुआ जहां से हर दिन हजारों वाहन गुजरते हैं।

स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए एडिशनल एसपी कमलेश खरपुसे, एसडीओपी शीला सुराणा और दोनों थानों की फोर्स ने मोर्चा संभाला और रात 3 बजे तक पुलिस बल संवेदनशील इलाकों में तैनात रहा।
बचाव में बयान, पर सवाल बरकरार
घटना को लेकर हिंदू जागरण मंच के जिला संयोजक सुरेश यादव ने सफाई देते हुए कहा कि “किसी हिंदू संगठन ने ट्रक नहीं रोका न ही ट्रक हिंदू समाज के लोगों ने रोका ।

उन्होंने कहा कि हिंदू समाज के संगठनों को टारगेट किया जा रहा है। घटनास्थल पर हिंदू संगठन के लोग उपस्थित नहीं थे।
प्रशासन ने बड़ी मुस्तेदी से दोनों पक्षों को संभाला :

ओकाफ कमेटी के अध्यक्ष शोएब खान ने बताया कि स्थिति तनावपूर्ण थी, लेकिन प्रशासन ने सराहनीय रूप से इस पर नियंत्रण पा लिया।
राष्ट्रीय राजमार्ग बना तनाव का अखाड़ा

यह वही नेशनल हाईवे है, जिससे हजारों लोग रोज़ यात्रा करते हैं। आपातकालीन सेवाएं, रोगियों की एंबुलेंस और माल वाहक ट्रक—सब उस रात घंटों तक फंसे रहे। क्या किसी भी संगठन या समूह को यह हक है कि वह धर्म और संस्कृति की आड़ में शक्ति प्रदर्शन कर अपने मंसूबे पूरा करने के चक्कर में नैतिकता को दरकिनार कर दे।
अब समय है—भीड़ नहीं, संविधान चले
सर्वोदय सामाजिक संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज जैन ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक राष्ट्र है, जहां न्याय, कानून और संविधान सबसे ऊपर हैं। अगर किसी को संदेह है कि कोई कार्य अवैध है, तो पुलिस प्रशासन को सूचित किया जाना चाहिए। लेकिन कानून अपने हाथ में लेने की संस्कृति समाज को अराजकता की ओर ले जाती है। न केवल मंडीदीप की यह घटना बल्कि इस तरह की तमाम घटनाएं एक चेतावनी है—कि हम कहीं फिर से भीड़तंत्र की ओर तो नहीं बढ़ रहे? क्या धर्म और आस्था के नाम पर अब हम सड़क को न्यायालय और जनता को जज बना रहे हैं?
प्रशासन की सतर्कता ने इस बार माहौल को बिगड़ने से बचा लिया, लेकिन यदि समाज समय रहते न जागा, तो अगली बार कीमत और बड़ी हो सकती है।

उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि “यदि किसी को संदेह है, तो पुलिस प्रशासन को सूचित करें, न कि कानून अपने हाथ में लेकर समाज का सौहार्द बिगाड़ें। ऐसे कृत्य न केवल आम जनता को तकलीफ और देश की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं। बल्कि मानवीयता और नैतिकता का भी दमन करते हैं।








