रिपोर्ट – राजू अतुलकर
रायसेन | अक्षय तृतीया जैसे शुभ अवसर पर विवाह संस्कार में भागीदारी से पहले वर और वधु की आयु जांचना अब केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी बन गई है। बाल विवाह जैसी कुप्रथा को जड़ से समाप्त करने के उद्देश्य से एक्सेस टू जस्टिस परियोजना के अंतर्गत कार्यरत कृषक सहयोग संस्थान ने सोमवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय स्थित स्वाद संगम परिसर में एक प्रेस वार्ता का आयोजन कर इस दिशा में महत्वपूर्ण अपील की। संस्था के निदेशक डॉ. एच. बी. सेन ने कहा कि शासन और प्रशासन के सहयोग से बाल विवाह पर रोक लगाना समाज के हर व्यक्ति का कर्तव्य है।
डॉ. सेन ने बताया कि अक्षय तृतीया, जो इस वर्ष 30 अप्रैल को है, अबूझ मुहूर्त होने के कारण विवाह आयोजनों के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। लेकिन इसी शुभ दिन के पीछे बाल विवाह की आशंका भी मंडराती है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि विवाह से पूर्व वर और वधु की उम्र का प्रमाण अवश्य देखें। यदि कहीं संदेह हो कि लड़की 18 वर्ष से कम और लड़का 21 वर्ष से कम आयु का है, तो तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 या आपातकालीन सेवा 112 पर शिकायत करें।
धर्मगुरुओं से भी सहयोग का आह्वान
संस्था के जिला समन्वयक अनिल भवरे ने बताया कि बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म करने के लिए धर्मगुरुओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। “विवाह संस्कार में पवित्रता तभी आती है जब वह समाज के नियमों और कानूनों के अनुरूप हो,” उन्होंने कहा। धर्मगुरुओं से अपील की गई है कि वे विवाह कराने से पहले वर-वधु के उम्र प्रमाण पत्र अवश्य देखें और बाल विवाह न होने दें।
गांव-गांव तक पहुँच रही जागरूकता
कृषक सहयोग संस्थान द्वारा जिले में प्रचार रथ चलाया जा रहा है, जो गांव-गांव जाकर बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में लोगों को जागरूक कर रहा है। इस रथ के माध्यम से बालकों के अधिकारों, शिक्षा और स्वास्थ्य पर बाल विवाह के नकारात्मक प्रभावों को सरल भाषा में समझाया जा रहा है।
संस्था के अनुसार, पिछले दो वर्षों से एक्सेस टू जस्टिस परियोजना के तहत जिले में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं ताकि भारत को 2030 तक बाल विवाह मुक्त बनाया जा सके।
कानूनी प्रावधान और शिकायत की प्रक्रिया
डॉ. सेन ने जानकारी दी कि बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के अनुसार, यदि लड़की की उम्र 18 वर्ष से कम या लड़के की उम्र 21 वर्ष से कम है, तो उनका विवाह कानूनन अमान्य माना जाएगा। यदि किसी को भी इस तरह के विवाह की सूचना मिले, तो वह न केवल 1098 और 112 पर सूचना दे सकता है, बल्कि संबंधित बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, स्थानीय पुलिस अथवा कृषक सहयोग संस्थान से भी संपर्क कर सकता है।
समाज का सहयोग जरूरी
डॉ. सेन ने कहा कि “बाल विवाह केवल एक परिवार की समस्या नहीं, बल्कि पूरे समाज का प्रश्न है। इससे बच्चों का बचपन, उनका स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य प्रभावित होता है। इसलिए हर नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह सतर्क रहे और बाल विवाह को रोकने में सक्रिय भूमिका निभाए।”
उन्होंने आगे कहा कि विवाह आयोजकों, पंडितों, मौलवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों की सजगता से ही इस कुप्रथा पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
2030 तक भारत को बनाना है बाल विवाह मुक्त
एक्सेस टू जस्टिस परियोजना का प्रमुख लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक भारत को बाल विवाह मुक्त देश बनाया जाए। इसके लिए सिर्फ सख्त कानून ही नहीं, बल्कि जन-जागरूकता का भी विशेष महत्व है। “जितना अधिक हम लोगों को उनके अधिकारों और कानूनों के प्रति जागरूक करेंगे, उतनी जल्दी हम इस बुराई से मुक्ति पा सकते हैं,” डॉ. सेन ने कहा।
अक्षय तृतीया जैसे पावन अवसर पर बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई को रोकना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। वर-वधु की आयु की पुष्टि कर, सही विवाह संस्कार कराना न केवल भविष्य को सुरक्षित करता है, बल्कि समाज को भी मजबूत बनाता है। आइए, इस अक्षय तृतीया पर हम सब मिलकर बाल विवाह के खिलाफ एकजुट होकर संकल्प लें।
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Author: Raju Atulkar
"पत्रकारिता सिर्फ पेशा नहीं, जिम्मेदारी भी है…" साल 2015 से कलम की स्याही से सच को उजागर करने की यात्रा जारी है। समसामयिक मुद्दों की बारीकियों को शब्दों में ढालते हुए समाज का आईना बनने की कोशिश। — राजू अतुलकर, तेजस रिपोर्टर डिजिटल







