✍️ रिपोर्ट : अतुल कुमार जैन
अशोकनगर | शनिचरी अमावस्या के शुभ अवसर पर, जिला मुख्यालय से 45 किमी दूर स्थित अतिशय क्षेत्र करैया हाट में 700 वर्ष प्राचीन मुनिसब्रतनाथ भगवान की पाषाण प्रतिमा का महामस्तकाभिषेक, महाशांतिधारा एवं विमान महोत्सव हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। यह भव्य आयोजन ब्रह्मचारी मोनू भैया मुंगावली के निर्देशन में संपन्न हुआ।
श्रद्धालुओं का उमड़ा जनसैलाब
भगवान मुनिसब्रतनाथ के अतिशय और चमत्कारों की महिमा सुनकर भोपाल, गंज बासौदा, विदिशा, मंडीबामोरा, बारवाई, कुरवाई, गुना, अशोकनगर, मुंगावली, बगला चौराहा, इंदौर सहित विभिन्न स्थानों से हजारों श्रद्धालु यहाँ पहुंचे और भगवान का अभिषेक कर स्वयं को धन्य किया।
शोभायात्रा और धार्मिक अनुष्ठान
अभिषेक उपरांत भगवान की शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें जैन समाज के साथ-साथ जैनोटर समाज ने भी अपने घरों के बाहर रंगोली सजाकर और आरती कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। इस आयोजन में अनेक श्रद्धालुओं को विभिन्न धार्मिक कार्य करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ :

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प्रथम स्वर्ण कलश समर्पित करने का सौभाग्य राजेंद्र कुमार जी भगा परिवार, अशोकनगर को मिला।
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भगवान पर छत्र समर्पित करने का सौभाग्य नीरज नितिन कंसल, अशोकनगर को प्राप्त हुआ।
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108 रिद्धि मंत्रों से रजत कलशाभिषेक का पुण्य लाभ संजय सिंघई, मुंगावली ने प्राप्त किया।
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शांतिधारा का सौभाग्य संजीव वाँझल एवं ऋषभ वाँझल, बहादुरपुर को प्राप्त हुआ।
भगवान को रजत पालकी में विराजमान कराने एवं विमान महोत्सव में प्रथम विमान लेने का सौभाग्य करैया हाट के अध्यक्ष शरद जैन, बहादुरपुर ने प्राप्त किया।
अतिशय और चमत्कारी स्थल
श्रद्धालुओं का मानना है कि करैया हाट के जैन मंदिर में निरंतर चमत्कार होते रहते हैं, और यहाँ सच्चे मन से की गई हर मनोकामना पूर्ण होती है। खास बात यह है कि गांव में जैन समाज के केवल 2 घर हैं, लेकिन शनिचरी अमावस्या के दिन पूरा गांव महोत्सव में योगदान देता है। यह भी मान्यता है कि भंडारे में कितना भी प्रसाद बने, वह कभी कम नहीं पड़ता।
सांध्यकालीन आराधना
संध्या बेला में 48 रजत दीपों से भगवान की महाआरती की गई, साथ ही भक्तामर पाठ का आयोजन भी हुआ। इस दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भगवान मुनिसब्रतनाथ की आराधना में लीन रहे।
करैया हाट जैन मंदिर की विशेषताएँ
यह मंदिर लगभग 700 वर्ष पुराना है।
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2012 तक मंदिर जीर्ण-शीर्ण अवस्था में था, लेकिन परम पूज्य विज्ञान मति माताजी की शिष्या गरिमा मति माताजी की प्रेरणा एवं ऐलक श्री निशंक सागर महाराज जी के आशीर्वाद से मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया।
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अब यह 60 x 100 फीट का भव्य मंदिर बन चुका है।
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2012 में इस गाँव में 90% कच्चे मकान थे, लेकिन मंदिर निर्माण के बाद पूरा गाँव पक्के मकानों में परिवर्तित हो गया।
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यहाँ रात के समय मंदिर से मंजीरों और झंझर की आवाजें सुनाई देती हैं, जिससे लोग मानते हैं कि देवगण भी यहाँ भगवान की भक्ति करने आते हैं।








