रिपोर्ट-राजेश जैन ‘दद्दू’
इंदौर, मध्य प्रदेश | जैन धर्म के महान संत, धरती के देवता कहे जाने वाले आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी का पट्टाचार्य पदारोहण महोत्सव आगामी 30 अप्रैल 2025 को इंदौर के तीर्थ स्वरूप सुमति धाम जिनालय में अपार श्रद्धा और भव्यता के साथ संपन्न होगा। यह महोत्सव 27 अप्रैल से 2 मई 2025 तक आयोजित किया जाएगा, जिसमें 500 से अधिक आचार्य, उपाध्याय, साधु-साध्वीगण, आर्यिका माताएं, ऐलक, छुल्लक, ब्रह्मचारी एवं लाखों श्रद्धालु सहभागिता करेंगे।

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इंदौर में 65 एकड़ भूमि पर होगा भव्य जैन धर्म महासमागम!
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जैन संतों का विराट संगम – 500 से अधिक संतों की पावन उपस्थिति!
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विशुद्ध सागर जी का पट्टाचार्य पद प्रतिष्ठान – इतिहास रचने को तैयार!
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ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य – बिना बारकोड स्कैनिंग प्रवेश नहीं!
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2 मई को गणाचार्य विराग सागर जी की जयंती पर विशेष अनुष्ठान!
श्रमण संस्कृति के महान संतों का मिलन – सुमति धाम बनेगा भक्ति का केंद्र!
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि श्रमण संस्कृति के महान संत गणाचार्य श्री विराग सागर जी की अंतिम देशना के अनुरूप यह ऐतिहासिक आयोजन संपन्न होगा। इस समारोह में देशभर से श्रद्धालुगण भाग लेंगे, जिसके लिए 65 एकड़ भूमि में भव्य व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
भव्य आयोजन की प्रमुख झलकियां
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27 अप्रैल 2025: देशभर के विभिन्न संघों का सुमति धाम में एक साथ भव्य प्रवेश।
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30 अप्रैल 2025 (अक्षय तृतीया): प्रातः कालीन विशेष विधान के साथ आचार्य विशुद्ध सागर जी को पट्टाचार्य पद पर प्रतिष्ठित किया जाएगा।
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2 मई 2025: श्रमण संस्कृति के दिवंगत गणाचार्य श्री विराग सागर जी की 61वीं जन्म जयंती विशेष अनुष्ठानों एवं धार्मिक कार्यक्रमों के साथ मनाई जाएगी।
ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य
श्रद्धालुओं की सुविधा व सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन एंट्री प्रणाली लागू की गई है। प्रवेश के लिए बारकोड स्कैनिंग आवश्यक होगी।
महोत्सव में होगी ऐतिहासिक उपस्थिति
इस विराट आयोजन में न केवल जैन समाज के संत-गण बल्कि देशभर से लाखों श्रद्धालु, समाजसेवी, विद्वान, और धर्म प्रेमी शामिल होंगे। कार्यक्रम स्थल को तीर्थ स्वरूप सुमति धाम में परिवर्तित कर इसे एक विशाल आध्यात्मिक उत्सव स्थल के रूप में तैयार किया जा रहा है।

इस ऐतिहासिक महोत्सव में देशभर से लाखों श्रद्धालु और साधु-संत सम्मिलित होकर इस महान धार्मिक परंपरा का साक्षी बनेंगे। अक्षय तृतीया 2025 को आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी पट्टाचार्य पद से विभूषित होंगे, जो जैन धर्म के इतिहास में एक गौरवशाली क्षण होगा। इंदौर का सुमति धाम इस पावन अवसर का मुख्य केंद्र बनकर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाएगा।









