रिपोर्ट-राकेश जैन
रायसेन, मध्य प्रदेश | जिले में स्थित पीएम श्री विवेकानंद महाविद्यालय अपनी नामी पहचान के बावजूद अव्यवस्थाओं का शिकार हो रहा है। शिक्षा का यह प्रमुख केंद्र व्यवस्थागत खामियों के कारण विद्यार्थियों की जरूरतों को पूरा करने में विफल दिखाई दे रहा है।

-
90000 महीना खर्च, फिर भी बस खाली!
-
गंदे शौचालय, पानी नहीं : छात्र बेहाल!
-
स्वच्छता मिशन को ठेंगा दिखा रहा कॉलेज!
-
छात्रों के लिए बस या सफेद हाथी?
-
विधायक बोले – हल निकालेंगे, लेकिन कब?
-
शिक्षा का मंदिर या समस्याओं का अड्डा?
महाविद्यालय प्रबंधन पर भारी पड़ रही अनुबंधित बस
शिक्षा के क्षेत्र में सुविधाओं को बढ़ाने के उद्देश्य से महाविद्यालय ने एक बस का संचालन किया है, लेकिन यह योजना अब सफेद हाथी साबित हो रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बस का मासिक किराया ₹90,000 है, जबकि विद्यार्थियों से प्रति माह ₹1 किराया लिया जाता है।
नाम न छापने की शर्त पर एक कर्मचारी ने “तेजस रिपोर्टर” को बताया कि बस में औसतन 15-20 छात्र ही रोजाना यात्रा करते हैं। यदि यह बस महीने में 25 दिन भी चलती है, तो प्रबंधन को प्रतिदिन ₹3,600 का खर्च उठाना पड़ता है। सूत्रों के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया में भारी वित्तीय अनियमितताओं की संभावना भी जताई जा रही है।

इस मुद्दे पर जब “तेजस रिपोर्टर” ने पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एवं स्थानीय विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी से सवाल किया गया, तो उन्होंने आश्वासन दिया कि वे कॉलेज प्रशासन से चर्चा कर इस समस्या का समाधान निकालेंगे। वहीं, शिक्षकों का कहना है कि यदि यह बस रायसेन के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों, खासतौर पर देहगांव से चलाई जाए, तो इसका लाभ करीब 300 विद्यार्थी उठा सकते हैं, जो निजी साधनों से महाविद्यालय पहुंचते हैं। इससे न केवल विद्यार्थियों को राहत मिलेगी, बल्कि कॉलेज को हो रहे नुकसान से भी मुक्ति मिल सकती है।
स्वच्छता अभियान के बावजूद गंदगी से जूझ रहा महाविद्यालय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जहां स्वच्छ भारत मिशन के जरिए पूरे देश में स्वच्छता को बढ़ावा दे रहे हैं, वहीं पीएम श्री विवेकानंद महाविद्यालय की स्थिति इसके ठीक विपरीत नजर आती है।









