रिपोर्ट-राजेश जैन दद्दू
इंदौर | जैन धर्म के पवित्र तीर्थ गिरनार की रक्षा और धर्म जागरूकता के उद्देश्य से आयोजित नेमि-गिरनार धर्म पदयात्रा को लेकर इंदौर में विशेष बैठक का आयोजन किया गया। श्रुत संवेगी परम पूज्य मुनिश्री आदित्य सागर जी महाराज ससंघ ने अंजनी नगर में आयोजित इस सभा में पदयात्रा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए समाज को संगठित होने का संदेश दिया।
इस दौरान विश्व जैन संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय जैन ने नई दिल्ली से गिरनार तक की 101 दिवसीय, 1500 किलोमीटर लंबी धर्म यात्रा की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस यात्रा का उद्देश्य भगवान नेमिनाथ की जन्मस्थली शौरीपुर से लेकर उनकी मोक्ष स्थली गिरनार जी तक के पवित्र स्थलों को संरक्षित करना और जैन समाज को जागरूक करना है।
मुनिश्री आदित्य सागर जी का प्रेरणादायक संदेश
सभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री आदित्य सागर जी ने कहा,
“गिरनार जी सिर्फ एक तीर्थ नहीं, बल्कि हमारी आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिक धरोहर का प्रतीक है। इसकी रक्षा के लिए हमें संकल्पबद्ध होना होगा।”
उन्होंने आगे कहा कि संगठन और एकता ही शक्ति का वास्तविक स्रोत है। जब समाज एकजुट होता है, तभी वह अपने धार्मिक स्थलों की रक्षा कर सकता है। उन्होंने गिरनार यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए इसमें अधिक से अधिक लोगों को जुड़ने का आह्वान किया।
इंदौर जैन समाज ने किया समर्थन
इंदौर की सकल जैन समाज ने इस पावन यात्रा का पूर्ण समर्थन व्यक्त किया। इस अवसर पर सांसद शंकर लालवानी ने भी गिरनार यात्रा के प्रति अपना समर्थन जताया और कहा कि जब यात्रा इंदौर पहुंचेगी, तब वे यात्रियों का अभिनंदन करेंगे।
कार्यक्रम के दौरान नेमिनाथ गिरनार पदयात्रा के आधिकारिक पोस्टर का विमोचन भी किया गया। इस विमोचन में मयंक जैन, अभय पाटोदी, स्वप्निल जैन सहित कई गणमान्य उपस्थित थे।
धर्म यात्रा का विस्तृत विवरण
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यात्रा नई दिल्ली के बलवीर नगर से प्रारंभ होगी और विभिन्न तीर्थ स्थलों से होते हुए गिरनार मोक्ष स्थली पर समाप्त होगी।
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पदयात्रा के दौरान जैन समाज को जागरूक करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
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गुजरात उच्च न्यायालय ने 17 फरवरी 2005 को गिरनार तीर्थ स्थल की सुरक्षा के लिए विशेष निर्देश जारी किए हैं, जिसके पालन की आवश्यकता पर जोर दिया गया।







