रिपोर्ट-बीपीआर
कुचामन सिटी, डीडवाना रोड | भारत की आध्यात्मिक परंपरा के एक महान संत, दिगंबर जैनाचार्य १०८ श्री विद्यासागर जी महामुनिराज के प्रथम समाधि स्मृति दिवस पर श्रद्धालुओं ने भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। आचार्य श्री ने 18 फरवरी 2024 को छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में सल्लेखना पूर्वक समाधि धारण की थी। इस पावन अवसर पर महावीर मंदिर, डीडवाना रोड पर भक्तों की भावनाओं से ओत-प्रोत एक विशेष अनुष्ठान का आयोजन किया गया।
समारोह का शुभारंभ प्रातः 7 बजे भव्य कलशाभिषेक से हुआ, जिसे नवीकुमार काला (प्रेमपुरा) और विकास काला (जिलिया) ने शांतिधारा के साथ संपन्न किया। इसके बाद देव-शास्त्र-गुरु पूजन के अंतर्गत आचार्य श्री की संगीतमय पूजा विधान आयोजित हुई। श्रद्धालुओं ने जल, चंदन, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, दीप और धूप के माध्यम से अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
समर्पण की भावना से ओतप्रोत श्रद्धालु
समारोह में लालचंद, विमलचंद, रमेशचंद, महेंद्र, ललीलकुमार, नीरज, पवन, विनय, विकास, आकाश, पारस पहाड़िया, सुरेश, राजेश, राजकुमार, संदीप पाड्या, तेजकुमार बड़जात्या, माणक काला, राजेश गगवाल और अमित पाटोदी सहित अनेक श्रद्धालु परिवारों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
ऐतिहासिक कृति स्तंभ : श्रद्धा का प्रतीक
समिति अध्यक्ष लालचंद पहाड़िया ने बताया कि आचार्य श्री के 50वें दीक्षा दिवस के अवसर पर पहाड़िया परिवार द्वारा मंदिर परिसर में जिले का पहला 31 फीट ऊंचा भव्य कृति स्तंभ स्थापित किया गया था। यह स्तंभ न केवल उनकी स्मृति को अमर करता है, बल्कि जिले के इतिहास में एक महत्वपूर्ण योगदान भी है।
संध्या आरती और गुणानुवाद के साथ भक्ति संध्या
सायंकाल 7:30 बजे श्रद्धालुओं ने संगीतमय भक्ति में लीन होकर देव-शास्त्र-गुरु की महाआरती की। इस दौरान आचार्य श्री के महान गुणों का गुणानुवाद किया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्ति और श्रद्धा के रंग में रंग गया।






