रिपोर्ट-राकेश कुमार जैन
रायसेन के जिला कलेक्टर अरुण विश्वकर्मा का सख्त रवैया एक बार फिर चर्चा में है! तेज-तर्रार और जनहितैषी छवि के लिए पहचाने जाने वाले कलेक्टर साहब आज पूरे एक्शन मोड में नजर आए। जनसुनवाई में जब मध्य प्रदेश विद्युत मंडल के DE (डिवीजनल इंजीनियर) नदारद रहे और उनकी जगह एक मातहत को भेज दिया गया, तो कलेक्टर ने बिना देर किए कार्रवाई कर दी।

दरअसल, रायसेन में चल रही जनसुनवाई में जब लोगों ने बिजली से जुड़ी समस्याओं को उठाया, तो उनकी सुनवाई करने के लिए खुद DE साहब नहीं आए। उन्होंने अपनी जगह एक जूनियर अफसर को भेज दिया, जो झूठ बोलकर कलेक्टर को बरगलाने की कोशिश करने लगा। उसने कहा कि साहब सुबह 10 बजे से ही मीटिंग में हैं!
लेकिन तेज-तर्रार कलेक्टर अरुण विश्वकर्मा ने तुरंत ही DE को फोन लगाया और पूछा – “आपकी मीटिंग कब से है?”
जवाब आया – “2 बजे से!“
बस फिर क्या था! कलेक्टर साहब का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने तुरंत आदेश दिया कि जो मातहत अधिकारी झूठ बोल रहा है, उसका एक दिन का वेतन काटा जाए। साथ ही, DE को फटकार लगाते हुए कहा –
“आप जनता के अधिकारी हैं, जनता के लिए काम करना आपकी जिम्मेदारी है! जनसुनवाई में क्यों नहीं आए?“
इतना सुनते ही DE साहब की घिग्घी बंध गई, और वो फोन पर ही “जी सर, जी सर!” कहकर माफी मांगने लगे। लेकिन कलेक्टर साहब ने साफ कर दिया कि जनता के काम में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
इस फटकार का असर ऐसा हुआ कि सिर्फ 10 मिनट में ही DE खुद जनसुनवाई में हाजिर हो गए।








