शिकायतों का फुटबॉल मैच खत्म! अब सीएम हेल्पलाइन सहित अन्य शिकायतों में होगी सीधी कार्रवाई, नवागत कलेक्टर श्री विश्वकर्मा ने विभागों को दिए सख्त निर्देश

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संयुक्त रिपोर्ट-राजू अतुलकर एवं राकेश जैन
रायसेन | प्रशासनिक गलियारों में आम शिकायतें अक्सर एक विभाग से दूसरे विभाग में टहलती रहती हैं, जैसे कोई फुटबॉल मैच चल रहा हो। लेकिन अब इस “पाले में डालो” खेल का समय खत्म! रायसेन के नए कलेक्टर अरुण विश्वकर्मा ने साफ शब्दों में कह दिया है—शिकायतों को फुटबॉल न समझें, बल्कि सीधा शिकायतों का फुटबॉल मैच खत्म!
अब सीएम हेल्पलाइन में होगी सीधी कार्रवाई
प्रशासनिक गलियारों में आम शिकायतें अक्सर एक विभाग से दूसरे विभाग में टहलती रहती हैं, जैसे कोई फुटबॉल मैच चल रहा हो। लेकिन अब इस “पाले में डालो” खेल का समय खत्म! रायसेन के नए कलेक्टर अरुण विश्वकर्मा ने साफ शब्दों में कह दिया है—शिकायतों को फुटबॉल न समझें, बल्कि सीधा समाधान करें।
टीएल बैठक में उन्होंने अफसरों को सख्त हिदायत दी कि सीएम हेल्पलाइन में आई शिकायतों को इधर-उधर भेजने की बजाय, व्यक्तिगत रुचि लेकर समयसीमा में निपटाएं। उन्होंने खासतौर पर उन विभागों को लताड़ लगाई जो शिकायतों के निपटारे में फिसड्डी साबित हो रहे हैं।
सीधे जनता से संपर्क—शिकायतों का लाइव स्टेटस चेक!
इस बैठक की दिलचस्प बात ये रही कि कलेक्टर ने शिकायतों का हाल जानने के लिए खुद शिकायतकर्ताओं को फोन लगा दिया। जब स्कूल शिक्षा विभाग की शिकायत की जांच की गई तो एक शिक्षक ने बताया कि उन्हें आठ महीने से डीए एरियर नहीं मिला। इस पर कलेक्टर ने शिक्षा अधिकारी को तुरंत जवाब देने को कहा—लेकिन जब कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो कलेक्टर ने फटकार लगाते हुए तुरंत एक्शन लेने के निर्देश दिए।

इसी तरह, उद्योग विभाग की समीक्षा में जब एक आवेदक से पूछा गया कि क्या उसकी स्वरोजगार योजना की शिकायत पर कोई संपर्क किया गया, तो जवाब आया—”नहीं!” यह सुनकर कलेक्टर ने विभागीय अधिकारी को तुरंत नोटिस जारी करने को कहा।
वन विभाग पर गिरी गाज, अधिकारियों को मिला ‘संदेश’
जब कलेक्टर ने वन विभाग की शिकायतों को देखा, तो पाया कि यहां तो अलग ही खेल चल रहा था—शिकायतों को बिना कारण दूसरे विभागों में ट्रांसफर किया जा रहा था! इस पर नाराजगी जताते हुए कलेक्टर ने सीधे डीएफओ को पत्र लिखने के निर्देश दिए।
विभागीय गतिविधियों की भी हुई कड़ी समीक्षा
बैठक में सिर्फ हेल्पलाइन ही नहीं, बल्कि अलग-अलग सरकारी योजनाओं की भी समीक्षा हुई। प्रधानमंत्री आवास योजना से लेकर आंगनवाड़ी भवनों तक, हर योजना का बारीकी से निरीक्षण हुआ। कलेक्टर ने अमृत सरोवर योजना के तहत बने तालाबों की भी जांच करने के आदेश दिए, ताकि यह पता चले कि तालाब बने हैं या सिर्फ कागजों में ही पानी भरा गया है!
अब ‘ऑन-पेपर’ नहीं, ‘ऑन-ग्राउंड’ होगी कार्रवाई!
कलेक्टर की इस बैठक से साफ संदेश गया है—अब सरकारी फाइलों में शिकायतों को धूल चटाने का दौर खत्म होगा। हर विभाग को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी, वरना एक्शन तय है! रायसेन में अब सीएम हेल्पलाइन असली मददगार बनेगी, न कि “फुटबॉल का मैदान” जहाँ शिकायतें गोल-गोल घूमती रहें!

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Raju Atulkar
Author: Raju Atulkar

"पत्रकारिता सिर्फ पेशा नहीं, जिम्मेदारी भी है…" साल 2015 से कलम की स्याही से सच को उजागर करने की यात्रा जारी है। समसामयिक मुद्दों की बारीकियों को शब्दों में ढालते हुए समाज का आईना बनने की कोशिश। — राजू अतुलकर, तेजस रिपोर्टर डिजिटल

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