NGT के आदेश बेअसर! भोपाल में फल-फूल रहा है थाई मांगुर का धंधा, मत्स्य विभाग की लापरवाही या अफसरों की मिलीभगत, प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल?

SHARE:

रिपोर्ट-आजम खान
भोपाल | भारत सरकार ने वर्ष 2000 में थाई मांगुर मछली (वैज्ञानिक नाम: Clarias gariepinus) के पालन, उत्पादन और बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। इस प्रतिबंध के पीछे मुख्य कारण इस मछली का आक्रामक स्वभाव और पर्यावरण पर इसका नकारात्मक प्रभाव था। यह मछली अत्यधिक मांसाहारी होती है और प्रदूषित पानी में भी तेजी से बढ़ती है, जिससे जल स्रोतों की पारिस्थितिकी असंतुलित हो जाती है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, इस मछली के सेवन से कैंसर, मधुमेह और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

  • सख्त प्रतिबंध के बावजूद भोपाल में बिक रही है थाई मांगुर, कौन है जिम्मेदार?
  • NGT के आदेश बेअसर! मत्स्य विभाग की लापरवाही से भोपाल में फल-फूल रहा है थाई मांगुर का धंधा
  • स्वास्थ्य के लिए खतरनाक : भोपाल में थाई मांगुर मछली की धड़ल्ले से बिक्री जारी!
  • अवैध व्यापार या मिलीभगत? प्रशासन की निष्क्रियता से भोपाल में बढ़ रही थाई मांगुर की बिक्री
  • भोपाल में खुलेआम हो रही है थाई मांगुर की बिक्री
हालांकि, सख्त सरकारी प्रतिबंधों के बावजूद, मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में थाई मांगुर का अवैध उत्पादन और विक्रय बेरोकटोक जारी है। शहर के प्रमुख मछली बाजारों, जैसे कि बुधवारा सिंधी चौराहा और करोंद, में यह प्रतिबंधित मछली खुलेआम बेची जा रही है। इसके अलावा, रायसेन रोड स्थित कई मछली फार्म इस अवैध कारोबार में लिप्त हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि यह सब स्थानीय प्रशासन और मत्स्य विभाग के संज्ञान में होने के बावजूद हो रहा है। अधिकारियों की उदासीनता और लापरवाही ने अवैध कारोबारियों को खुली छूट दे दी है, जिससे आम जनता अनजाने में इस हानिकारक मछली का सेवन कर रही है।

रिश्वतखोरी के चलते थमी प्रशासनिक कार्रवाई?

सूत्रों की मानें तो ये अवैध धंधा प्रशासन की नाक के नीचे खुलेआम फलफूल रहा है। मछली व्यापारी प्रशासनिक अधिकारियों को रिश्वत देकर उनके संरक्षण में बेखौफ होकर इस प्रतिबंधित मछली का विक्रय कर रहे हैं। यही कारण है कि अब तक बड़े स्तर पर छापेमारी या कठोर कार्रवाई देखने को नहीं मिली है। सस्ती कीमत और आसानी से उपलब्धता के कारण भोपाल के लोग इस मछली को खरीद रहे हैं, बिना यह जाने कि यह उनके स्वास्थ्य के लिए कितना खतरनाक हो सकता है।

NGT के निर्देशों की उड़ाई जा रही है धज्जियां

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green Tribunal – NGT) ने भी थाई मांगुर मछली के पालन और बिक्री पर सख्त निर्देश जारी किए हैं। मत्स्य विभाग को आदेश दिए गए हैं कि वे विशेष टीमें गठित कर इस प्रतिबंधित मछली के अवैध उत्पादन और व्यापार पर नजर रखें और जहां भी इसका पालन हो रहा है, वहां इसे पूरी तरह से नष्ट करें।
बावजूद इसके भोपाल में इस अवैध धंधे पर कोई लगाम नहीं लगाई गई है। यह दर्शाता है कि या तो मत्स्य विभाग इस मामले में गंभीर नहीं है या फिर प्रशासनिक भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि कोई कार्रवाई संभव ही नहीं हो पा रही है।

जनता की सेहत से खिलवाड़ कब तक?

स्वास्थ्य और पर्यावरण की दृष्टि से अत्यंत हानिकारक थाई मांगुर का व्यापार यदि यूं ही जारी रहा, तो यह भोपाल और आसपास के इलाकों में एक गंभीर स्वास्थ्य संकट को जन्म दे सकता है। इस स्थिति को देखते हुए आवश्यक है कि मत्स्य विभाग, खाद्य सुरक्षा अधिकारी और स्थानीय प्रशासन तुरंत कार्रवाई करें।
सरकार को भी इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रतिबंध को प्रभावी रूप से लागू किया जाए। भोपालवासियों को भी चाहिए कि वे इस मछली के सेवन से बचें और जागरूकता फैलाएं ताकि इस घातक व्यापार को पूरी तरह समाप्त किया जा सके। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भ्रष्ट अधिकारियों की मेहरबानी से फल-फूल रहे इन अवैध कारोबारियों पर उच्च अधिकारी कोई ठोस कार्रवाई करेंगे या फिर यह मछली व्यापारी बेखौफ होकर लोगों की सेहत से खिलवाड़ करते रहेंगे। क्या प्रशासन की निष्क्रियता इस जानलेवा कारोबार को और बढ़ावा देगी, या फिर कानून का शिकंजा इन पर कसेगा? तेजस रिपोर्टर बहुत जल्द इन मछली माफियाओं और उन्हें संरक्षण देने वाले भ्रष्ट अधिकारियों का पर्दाफाश करेगा। इस अवैध कारोबार के पीछे छिपे चेहरे सामने लाए जाएंगे और कई बड़े खुलासे किए जाएंगे, जिससे जनता को सच्चाई का पता चल सके।
भोपाल में थाई मांगुर मछली की बिक्री केवल एक कानूनी उल्लंघन नहीं, बल्कि एक बड़े स्वास्थ्य संकट का संकेत है। जनता के स्वास्थ्य से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर मत्स्य विभाग और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। भ्रष्टाचार और लापरवाही के चलते इस अवैध कारोबार को बढ़ावा मिल रहा है, जिसे रोकने के लिए प्रशासन को कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है। भोपालवासियों को भी सतर्क रहना चाहिए और इस मछली का सेवन करने से बचना चाहिए। यदि मानवता के आधार पर देखा जाए तो न केवल मांगुर मछली बल्कि किसी भी मछली या अन्य जीवों का सेवन बेहद निंदनीय और क्रूर मानसिकता का परिचायक है।

ये ख़बर आपने पढ़ी देश के तेजी से बढ़ते लोकप्रिय हिंदी न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म 🖱️www.tejasreporter.com पर
📱आज तेजी से बदलते परिवेश में जहां हर क्षेत्र का डिजिटलीकरण हो रहा है, ऐसे में
📰 “दैनिक तेजस रिपोर्टर
🌐 www.tejasreporter.com सटीक समाचार और तथ्यात्मक रिपोर्ट्स लेकर आधुनिक तकनीक से लैस अपने डिजिटल प्लेटफार्म पर प्रस्तुत है। अपने निडर, निष्पक्ष, सत्य और सटीक लेखनी के साथ…
मैं पंकज जैन ✍🏻 और मेरे सहयोगी अब ⏱️24X7 आप तक देश विदेश की महत्वपूर्ण खबरों को पहुंचाने के लिए कटिबद्ध हैं।
सभी अपडेट्स व नोटिफिकेशन प्राप्ति के लिए नीचे दिए गए बेल आइकन पर क्लिक कर अभी सब्सक्राइब करें।
Tejas Reporter
Author: Tejas Reporter

Join us on:

सबसे ज्यादा पड़ गई
Marketing Hack4u