रिपोर्ट-प्रेमनारायण राजपूत
रायसेन | प्रशासनिक पद आमतौर पर रुतबे और दूरियों से भरे होते हैं, लेकिन रायसेन के कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने गोहरगंज तहसील के दौरे पर इस धारणा को तोड़ दिया। वे न केवल तहसील प्रशासन की व्यवस्थाओं को परखने पहुंचे, बल्कि आम जनता के बीच खड़े होकर ‘चाय पर चर्चा’ भी की। उनका यह सहज और अपनत्व भरा अंदाज लोगों के दिलों को छू गया।

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जनता के कलेक्टर’ अरुण कुमार विश्वकर्मा: चाय पर चर्चा में किसानों से सीधी बातचीत
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अधिकारियों से बोले जनता को प्राथमिकता देना हमारा काम
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तहसील यात्रा, पर राजस्व अधिकारियों संग समीक्षा बैठक
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जब अफसर नहीं, बल्कि आम आदमी बनकर मिले कलेक्टर!
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गोहरगंज में चायवाले से बात, किसानों से हमदर्दी!
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कुर्सी से नहीं, जनता के बीच रहकर जमीन पर काम करने वाले कलेक्टर चर्चा में
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कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने अधिकारियों को दिए जनहित में कार्य करने के निर्देश
किसानों के बीच बैठकर सुनी ज़मीनी हकीकत
कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जब तहसील परिसर पहुंचे, तो वहां मौजूद किसान और स्थानीय लोग उन्हें देखकर चौंक गए। लेकिन कलेक्टर साहब का अंदाज जरा अलग था—उन्होंने सबसे पहले गेट पर खड़े चौकीदारों से तहसील की सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा की, फिर धीरे-धीरे तहसील के पास चाय की एक साधारण दुकान की ओर बढ़ गए।
वहां पहुंचकर उन्होंने चायवाले से बड़े ही आत्मीय भाव से चाय देने का आग्रह किया। यह सुनते ही वहां खड़े किसान और राहगीर चौंक गए। कोई भी सोच नहीं सकता था कि एक जिला कलेक्टर आम जनता के साथ खड़े होकर चाय पीएगा। उन्होंने वहीं खड़े किसानों को बुलाया
“क्या हाल हैं? आप लोग यहां किस काम से आए हैं? कोई परेशानी हो तो खुलकर बताइए।“
किसान पहले थोड़ा संकोच में थे, लेकिन कलेक्टर की सादगी देखकर खुलकर बातें करने लगे। किसी ने खसरा-खतौनी की समस्या बताई, तो किसी ने प्रधानमंत्री किसान योजना का लाभ न मिलने की शिकायत की।
कलेक्टर ने हर समस्या को गंभीरता से सुना और तत्काल तहसीलदार को समाधान निकालने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि “किसी भी किसान को सरकारी योजनाओं से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए। सरकारी योजनाओं का असली हकदार आम आदमी है, और हमारा कर्तव्य है कि उन्हें इसका लाभ मिले।”
तहसीलदार और अधिकारियों को दिए स्पष्ट निर्देश
इसके बाद, कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने तहसील कार्यालय में एडीएम चंद्रशेखर श्रीवास्तव, तहसीलदार हेमंत शर्मा, ओबैदुल्लागंज नायब तहसीलदार निलेश सरवटे और गौहरगंज नायब तहसीलदार देवेंद्र शुक्ला समेत अन्य राजस्व अधिकारियों के साथ बैठक की।
बैठक में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा—
“जनता को परेशान नहीं करें। हमारा काम है उनकी सहायता करना, न कि उन्हें सरकारी दफ्तरों के चक्कर कटवाना।”
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर किसान और नागरिक को उसकी ज़रूरत की सरकारी सुविधा मिले, और उसे किसी प्रकार की अव्यवस्था का सामना न करना पड़े।
‘चाय पर चर्चा’ ने जीता सबका दिल
बैठक खत्म होने के बाद कलेक्टर साहब फिर से उसी चाय की दुकान पर पहुंचे। उन्होंने चायवाले से कहा, “भाई, तुम कितना कमा लेते हो? कोई तकलीफ तो नहीं?”
चायवाले ने पहले संकोच किया, फिर बोला— “साहब, जैसे-तैसे गुजारा हो रहा है, लेकिन कोई शिकायत नहीं। बस, इतना चाहूंगा कि हमारे बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले।”
कलेक्टर मुस्कुराए और बोले, “ये तो हमारा फर्ज़ है। मैं देखूंगा कि आपके बच्चों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिले।” फिर उन्होंने चायवाले की दुकान का पूरा बिल खुद अदा किया और पास खड़े कुछ किसानों के साथ हंसी-मजाक भी किया।
चाय की चुस्कियों के साथ यह चर्चा सिर्फ एक अनौपचारिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को खत्म करने की एक कोशिश थी।
‘जनता का कलेक्टर’ बनने की राह पर अरुण कुमार विश्वकर्मा
गोहरगंज तहसील के इस दौरे में कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के निर्देश दिए, बल्कि जनता से सीधा संवाद करके यह संदेश दिया कि “अधिकारियों का असली काम जनता की सेवा करना है, न कि सत्ता का रौब दिखाना।”









