मध्य प्रदेश: 34 हजार प्राइवेट स्कूलों का बंद आह्वान, एसोसिएशन का नए नियमों पर विरोध

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डिजिटल डेस्क
मध्य प्रदेश न्यूज | प्रदेश में प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने एमपी बोर्ड के तहत पहली से आठवीं कक्षा तक के स्कूलों के लिए नए नियमों का विरोध करते हुए प्रदेश के लगभग 34,000 प्राइवेट स्कूलों को आज बंद करने का आह्वान किया है। एसोसिएशन का कहना है कि नए नियम छोटे और मध्यम स्तर के स्कूलों के संचालन के लिए अत्यधिक जटिल और अव्यवहारिक हैं, जिससे स्कूलों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। इस विरोध प्रदर्शन का असर प्रदेश भर में छात्रों की पढ़ाई पर पड़ने की संभावना है, क्योंकि ये स्कूल बंद रहेंगे।

एसोसिएशन की प्रमुख मांगें

प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष का कहना है कि यह नए नियम उन स्कूलों के लिए बहुत समस्याएं उत्पन्न कर रहे हैं, जो पहले से ही आर्थिक और प्रशासनिक दबाव का सामना कर रहे हैं। एसोसिएशन ने मांग की है कि सरकार द्वारा किए गए नियमों में बदलाव किए जाएं। इन मांगों में मुख्य रूप से निम्नलिखित शामिल हैं:

1. रजिस्टर्ड किरायानामा की शर्त हटाई जाए:एसोसिएशन ने मांग की है कि स्कूलों की मान्यता के लिए रजिस्टर्ड किरायानामा की शर्त को हटाकर पहले की तरह नोटरी से प्रमाणित किरायानामा लागू किया जाए। वे यह तर्क देते हैं कि छोटे स्कूलों के लिए रजिस्टर्ड किरायानामा की शर्त को पूरा करना आर्थिक रूप से कठिन हो सकता है।

2. 40,000 रुपये की सुरक्षा निधि की शर्त पर रोक: एसोसिएशन का कहना है कि 40,000 रुपये की सुरक्षा निधि जमा करना छोटे और मध्यम स्तर के स्कूलों के लिए एक बड़ा बोझ है, जिसे हटाया जाना चाहिए। यह राशि उनकी वित्तीय स्थिति के अनुसार अत्यधिक है।

3. शिक्षा का अधिकार (RTE) राशि समय पर दी जाए: एसोसिएशन ने यह भी मांग की है कि शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत मिलने वाली राशि समय पर और पूरी तरह से स्कूलों को दी जाए ताकि स्कूलों की वित्तीय स्थिति में सुधार हो सके।

4. मान्यता शुल्क में वृद्धि समाप्त की जाए: प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन का कहना है कि सरकार ने मान्यता शुल्क में बढ़ोतरी की है, जिसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि इस वृद्धि से स्कूलों पर और ज्यादा दबाव पड़ेगा।

नए नियमों के प्रावधान

मध्य प्रदेश सरकार ने हाल ही में पहली से आठवीं कक्षा तक के स्कूलों के लिए मान्यता के नियमों में कई बदलाव किए हैं। इनमें प्रमुख बदलाव निम्नलिखित हैं:

1. रजिस्टर्ड किरायानामा अनिवार्य किया गया है: पहले, स्कूलों के लिए केवल नोटरी से प्रमाणित किरायानामा आवश्यक था, लेकिन अब सरकार ने इसे बदलकर रजिस्टर्ड किरायानामा अनिवार्य कर दिया है। एसोसिएशन का कहना है कि यह बदलाव छोटे स्कूलों के लिए मुश्किल पैदा करेगा, क्योंकि रजिस्टर्ड किरायानामा प्रक्रिया अधिक महंगी और जटिल है।

2. 40,000 रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट शर्त: नए नियमों के तहत, अब स्कूलों को मान्यता प्राप्त करने के लिए 40,000 रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट जमा करनी होगी। एसोसिएशन के अनुसार, यह राशि छोटे स्कूलों के लिए बहुत बड़ी रकम है, जो उनके लिए एक वित्तीय बोझ बन सकती है।

3. मान्यता शुल्क में वृद्धि: नए नियमों के अनुसार, मान्यता शुल्क में भी वृद्धि की गई है, जो एसोसिएशन के लिए एक और चिंता का विषय है। एसोसिएशन का कहना है कि यह वृद्धि छोटे स्कूलों के लिए अत्यधिक है और उन्हें इससे बचाने के लिए इसे समाप्त किया जाना चाहिए।

विरोध प्रदर्शन और आगे की योजना

प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार इन शर्तों को हटाने की उनकी मांगों पर विचार नहीं करती है, तो वे आगे और भी बड़े विरोध प्रदर्शन की योजना बना सकते हैं। गुरुवार को, एसोसिएशन के सदस्य प्रदेश भर में गांधी प्रतिमाओं के पास जाकर ज्ञापन देंगे और अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाएंगे।

यह प्रदर्शन न केवल स्कूलों के संचालन पर असर डाल रहा है, बल्कि हजारों छात्रों की पढ़ाई में भी रुकावट आ सकती है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और अन्य प्रमुख शहरों में स्कूलों का बंद होना छात्रों और अभिभावकों के लिए एक बड़ी समस्या बन सकती है।
सरकार की प्रतिक्रिया

इस मामले पर सरकार की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, सरकार ने पहले भी यह बयान दिया था कि इन बदलावों का उद्देश्य शिक्षा के स्तर को सुधारना और स्कूलों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। सरकार का कहना है कि यह नए नियम स्कूलों के विकास और छात्रों की भलाई के लिए लागू किए गए हैं, और इन्हें लागू करने से शिक्षा का स्तर बेहतर होगा।

नतीजा

जैसे-जैसे यह मुद्दा बढ़ता जा रहा है, यह देखना होगा कि क्या सरकार इन नए नियमों में कोई बदलाव करती है या एसोसिएशन के विरोध के बावजूद इन्हें लागू करती है। इस विरोध का असर न केवल प्राइवेट स्कूलों के संचालन पर पड़ेगा, बल्कि छात्रों की पढ़ाई पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि ऐसे नियमों के लागू होने से स्कूलों के लिए नए प्रशासनिक और वित्तीय दबावों का सामना करना पड़ेगा।

यदि सरकार और प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के बीच समझौता नहीं होता है, तो यह विवाद और भी अधिक बढ़ सकता है, जिससे शिक्षा क्षेत्र में असमंजस और विरोध का माहौल उत्पन्न हो सकता है।


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Raju Atulkar
Author: Raju Atulkar

"पत्रकारिता सिर्फ पेशा नहीं, जिम्मेदारी भी है…" साल 2015 से कलम की स्याही से सच को उजागर करने की यात्रा जारी है। समसामयिक मुद्दों की बारीकियों को शब्दों में ढालते हुए समाज का आईना बनने की कोशिश। — राजू अतुलकर, तेजस रिपोर्टर डिजिटल

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