रिपोर्ट-अतुल कुमार जैन
शिवपुरी | बेटियों को अब घर की कमजोर कड़ी मानने का समय बीत चुका है। वे न केवल माता-पिता का सहारा बन रही हैं, बल्कि समाज में स्थापित रूढ़ियों को भी तोड़ रही हैं। शिवपुरी के तारकेश्वरी कॉलोनी में शुक्रवार को ऐसा ही एक प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जब एक बेटी ने अपने पिता के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाई और अपनी कर्तव्यनिष्ठा से समाज में बेटियों की शक्ति का परिचय दिया।

तारकेश्वरी कॉलोनी के निवासी मनोज भसीन (55), जो पोस्ट ऑफिस से जुड़ी एक एजेंसी में खाते खोलने और जमा राशि का कार्य संभालते थे, का गुरुवार को हार्ट अटैक के कारण आकस्मिक निधन हो गया। उनके परिवार में दो बेटियां हैं—बड़ी बेटी मानसी, जो दिल्ली में नौकरी करती हैं, और छोटी बेटी रितिका, जो चेन्नई की एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। मनोज भसीन ने अपने जीवन में दोनों बेटियों को बेटे के समान मानते हुए उनका पालन-पोषण किया।
चेन्नई से आई बेटी ने निभाई अंतिम कर्तव्य की जिम्मेदारी
पिता के निधन की खबर सुनते ही बड़ी बेटी मानसी दिल्ली से तुरंत शिवपुरी पहुंच गईं, जबकि रितिका को चेन्नई से आने में समय लगा। शुक्रवार की सुबह जब रितिका शिवपुरी पहुंची, तो उन्होंने परिजनों से कहा कि वह अपने पिता का अंतिम संस्कार करेंगी। समाज और परिवार ने इस निर्णय का पूर्ण समर्थन किया।
रीति-रिवाजों के साथ दी मुखाग्नि
शव यात्रा के दौरान दोनों बहनों की आंखें नम थीं, लेकिन रितिका ने अपने कर्तव्य को निभाने में कोई कमी नहीं छोड़ी। मुक्तिधाम में रीति-रिवाजों के साथ उन्होंने अपने पिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान परिजन और आसपास के लोग बेटियों के साहस की सराहना करते नजर आए।








