“नव वर्ष का आगमन हर किसी के जीवन में एक नई शुरुआत का प्रतीक है। आपके जीवन में भी सकारात्मक शुरुआत हो, आप दीर्घायु हों, स्वस्थ और सुखी रहें। निरंतर प्रगति पथ अग्रसर हों। इन्हीं भावनाओं के साथ हमारे समस्त सुधि पाठकों को अंग्रेजी नववर्ष की अनंत शुभकामनाएं। आज हम साल 2025 में प्रवेश कर चुके हैं। यह समय आत्मचिंतन, संकल्प, और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने के लिए एक नई दिशा में कदम उठाने का है। परंतु, दुर्भाग्यवश, भारत में नव वर्ष का उत्सव अब अधिकतर पाश्चात्य संस्कृति की अंधी दौड़, फूहड़ता और शोर-शराबे का पर्याय बन गया है।
विशेषकर युवाओं में पार्टी कल्चर और अनावश्यक खर्चों का बढ़ता चलन चिंताजनक है। देर रात तक पार्टियां, शराब का सेवन, और भौतिकवाद की होड़ भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों को कमजोर कर रहे हैं। ऐसे समय में यह जरूरी हो जाता है कि हम अपने नव वर्ष के जश्न को अर्थपूर्ण और प्रेरणादायक बनाएं।
नव वर्ष: बदलाव की ओर पहला कदम
इस नव वर्ष पर, देश के हर नागरिक, खासकर युवाओं से यह अपील है कि वे अपनी ऊर्जा और उत्साह को समाज के निर्माण और कल्याण में लगाएं। निम्नलिखित पहलें नव वर्ष को सार्थक बना सकती हैं:
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समाज सेवा : समाज के गरीब और वंचित वर्ग की मदद के लिए अपने समय और संसाधन का उपयोग करें। किसी स्कूल में बच्चों को पढ़ाने, वृद्धाश्रमों में समय बिताने, या जरूरतमंदों को खाना बांटने जैसे छोटे-छोटे कदम समाज में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
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प्राणी कल्याण : पशु संरक्षण, उनकी देखभाल, और उनके लिए खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना जैसे कार्य एक नई मानवता का परिचय देते हैं
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पर्यावरण संरक्षण : नव वर्ष का संकल्प पर्यावरण की रक्षा का हो। पौधे लगाएं, कचरे का सही निपटान करें, और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
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संस्कृति और परंपराओं का सम्मान : अपने त्योहारों और विशेष अवसरों को भारतीय मूल्यों और परंपराओं के अनुसार मनाएं। यह न केवल हमारी संस्कृति को बचाएगा, बल्कि युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने में मदद करेगा।
युवाओं की भूमिका :
युवाओं के पास शक्ति, विचार और ऊर्जा का खजाना होता है। यदि यही युवा समाज सेवा, शिक्षा और प्राणी कल्याण के कार्यों में योगदान दें, तो देश में सकारात्मक बदलाव निश्चित है। ऐसे कार्य न केवल उनके आत्मसम्मान को बढ़ाते हैं, बल्कि उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक बनने का अनुभव भी देते हैं।
सरकार और संस्थाओं की जिम्मेदारी :
सरकार और सामाजिक संस्थाओं को भी चाहिए कि वे नव वर्ष के अवसर पर जागरूकता अभियान चलाएं। स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, जो लोगों को समाज सेवा और प्राणी कल्याण के लिए प्रेरित करें।
मतलब यह है कि नव वर्ष का जश्न केवल शोर-शराबे और पाश्चात्य संस्कृति की नकल तक सीमित न हो। यह समय है आत्ममंथन और अपने जीवन को समाज के लिए उपयोगी बनाने का। आइए, 2025 का यह नव वर्ष एक नई सोच और समाज के प्रति नए दायित्वों को निभाने का संकल्प लेकर मनाएं। यही सच्चा उत्सव होगा और भारतीय संस्कृति के अनुरूप भी।
“बदलाव का आरंभ स्वयं से करें, क्योंकि एक छोटे कदम से भी बड़ी क्रांति का जन्म होता है।”








