रिपोर्ट-अतुल कुमार जैन
शिवपुरी | मुरम के अवैध खनन का पर्दाफाश करने गए पत्रकार देवेंद्र समाधिया पर हुए हमले ने पूरे मीडिया जगत को झकझोर दिया है। शुक्रवार को खनन माफिया गजराज रावत द्वारा न केवल देवेंद्र पर जानलेवा हमला किया गया, बल्कि उन्हें बंधक बनाकर उनकी बाइक भी छीन ली गई। इस गंभीर घटना के विरोध में पत्रकार संगठनों ने शनिवार को एएसपी संजीव मुले को ज्ञापन सौंपा, जिसमें आरोपी पर रासुका (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) के तहत कार्रवाई की मांग की गई।
पत्रकारों के ज्ञापन में पुलिस पर आरोप लगाया गया कि घटना में आरोपी गजराज रावत के खिलाफ लगाई गई धाराएं अपर्याप्त हैं। उन्होंने मांग की कि एफआईआर में बंधक बनाने और लूटपाट की धाराओं को जोड़ा जाए। पत्रकारों का कहना है कि आरोपी आदतन अपराधी है और उसके खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। खनिज विभाग में भी उसके खिलाफ अवैध उत्खनन के कई मामले लंबित हैं। ऐसे में रासुका जैसी सख्त कार्रवाई ही इस घटना के लिए उपयुक्त होगी।

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>>पत्रकारों ने सौंपा ज्ञापन, बोले- “सुरक्षा हमारी प्राथमिकता
>>पत्रकारों पर हमले का विरोध, सुरक्षा कानून की मांग
>>माफिया के खिलाफ सख्ती नहीं तो सड़कों पर उतरेंगे पत्रकार
>>अवैध खनन की रिपोर्टिंग पर हमला, आरोपी पर रासुका की मांग
मीडिया की आवाज़ दबाने की कोशिश :
पत्रकार संगठनों ने इस घटना को मीडिया की स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए कहा कि इससे पत्रकारों के मनोबल पर गहरी चोट पहुंची है। उन्होंने मुख्यमंत्री से पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग की, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। पत्रकारों ने कहा कि यह कानून मीडिया कर्मियों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करेगा और उन्हें निष्पक्षता से अपना कार्य करने में सक्षम बनाएगा।
पुलिस प्रोटेक्शन और निष्पक्ष जांच की मांग :
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि जब भी कोई पत्रकार जोखिम भरी रिपोर्टिंग के लिए जाता है, तो उसे पुलिस सुरक्षा दी जानी चाहिए। इसके अलावा, पत्रकारों के खिलाफ किसी भी शिकायत की निष्पक्ष जांच वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जाए, ताकि निर्दोष पत्रकारों का शोषण न हो।
विशेष सुरक्षा प्रकोष्ठ की स्थापना का आग्रह :
पत्रकारों ने जिले में पत्रकारों पर बढ़ते हमलों को रोकने के लिए एक विशेष सुरक्षा प्रकोष्ठ की स्थापना की भी मांग की। उन्होंने कहा कि यदि इन मांगों पर तुरंत कार्रवाई नहीं होती, तो पत्रकार अपने अधिकारों और सुरक्षा के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे।
उग्र आंदोलन की चेतावनी :








