रिपोर्ट-अतुल जैन
पिछोर, शिवपुरी | पिछोर में सोमवार से किसान अपनी 22 सूत्रीय मांगों को लेकर एसडीएम कार्यालय के सामने धरने पर बैठे। जानकारी अनुसार पिछोर खनियाधाना तहसील के कई ग्रामों के किसान बीते 15- 20 वर्ष से परेशान हैं। सरकार आम लोगों के कामों को निपटाने शिविर लगवा रही है,राजस्व अभियान, विकास यात्रा, आपकी सरकार आपके द्वार, मुख्यमंत्री जन कल्याण अभियान, सुशासन जैसे कई अभियान शिविर आयोजित किए गए लेकिन किसानों के सालों पुराने भूमि दुरुस्तीकरण के मामले अभी भी अधर में है।लेकिन दफ्तर में अफसर-कर्मचारी काम को समय पर पूरा करने में दिलचस्पी नहीं लेते हैं। तहसील कार्यालय में शहर के अलावा दूर दराज के गांवों से लोग सीमांकन, नामांतरण, नकल, प्रमाण पत्र सहित दूसरे कामों के लिए बड़ी संख्या में लोग आते हैं।
सरकार की ओर से हर काम के लिए समय निर्धारित कर रखी है। इसके बाद भी लोगों का काम समय पर नहीं होता, महीनों से सीमांकन, नामांतरण और बंटवारे के मामले लटके हैं। जब से रिकॉर्ड ऑनलाइन कंप्यूटराइज हुआ तब से ज्यादा परेशान हो रहे हैं।तिंधारी गांव के किसान भगवती पुत्र वृगभान लोधी ने बताया कि भाँती उपतहसील में डेढ़ वर्ष पूर्व से नामांतरण की फाइल जमा है, पर आज तक शिविर या अभियान में कुछ नहीं हुआ। ग्राम मुहार के किसान सिया लोधी 6 माह से रिकॉर्ड में दुरूस्ती को लेकर परेशान हैं।

किसान खेमराज लोधी ने बताया कि मैं कई साल से कार्यालय के चक्कर लगा रहा हूं, मेरी भूमि को परिमार्जित नहीं किया जा रहा है। किसान धनिया पुत्री हरदा आदिवासी के भूमि के अभिलेखों में सुधार होना है लेकिन पीड़ित के अनुसार पिता की जमीन को दूसरे के नाम नामांतरण कर दिया है। फाइल खोड़ नायब तहसीलदार के पास जमा है। सारा काम हो गया रिपोर्ट भी तैयार लगी है पर 3 माह हो गए पूरा काम नहीं हो पाया। किसान रामरतन लोधी निवासी गजोरा ने बताया कि भूमि के रिकॉर्ड में दुरुस्तीकरण नहीं हो रहा और वह 6 माह से परेशान हूं।
इनका कहना है…
“पिछोर राजस्व विभाग में जमीनों के कई मामलों में हजारों किसान परेशान है और किसान छोटे छोटे काम जैसे सीमांकन, नामांतरण, दुरस्तीकरण आदि के लिए सालों से भटक रहे है। भ्रष्टाचार चरम पर है और कोई किसी को सुनने तैयार नही है। इन सभी मामलों को लेकर हमने पूर्व में भी 22 मांगों को लेकर ज्ञापन दिया था। जिस पर आज दिनांक तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है अब हमने एसडीएम कार्यालय के पास धरना प्रदर्शन पर बैठ गए हैं। जब तक हमारी मांगे पूरी नहीं होंगी तब तक हम यही धरने पर बैठे रहेंगे।”
मनीराम लोधी, जिला पंचायत“नामांतरण निशुल्क होते है जो शासन के ऑनलाइन का शुल्क है वही लगता है और सीमांकन में भी जो निर्धारित शुल्क है वही लिया जाता है जो अन्य विभागों की मांगे है उन विभागों को हमने पत्र भेजकर अवगत करा दिया गया है कि आप लोग भी कार्यवाही करें।”
शिवदयाल धाकड़, एसडीएम-पिछोर







