चंदेरी-करेरा रेल सर्वे को मिली रफ्तार, लेकिन पिछोर-खनियाधाना बाहर; व्यापार, रोजगार, पर्यटन पर संकट की आशंका
📰 अतुल कुमार जैन
खनियांधाना। क्षेत्रीय विकास की उम्मीदों को पंख देने वाली रेलवे परियोजना अब विवादों में घिरती नजर आ रही है। जहां चंदेरी और करेरा के लिए रेलवे लाइन सर्वे शुरू होने की खबर से इलाके में उत्साह था, वहीं पिछोर और अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की कर्मभूमि खनियाधाना को इस प्रस्तावित रूट से बाहर किए जाने पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि यह केवल एक तकनीकी चूक नहीं, बल्कि क्षेत्रीय संतुलन की अनदेखी है, जो आने वाले वर्षों में विकास की दिशा तय करेगी। यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो पिछोर-खनियाधाना विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह कट सकते हैं।
दशकों पुरानी मांग, फिर भी हाशिए पर
पिछोर और खनियाधाना की जनता लंबे समय से रेल सुविधा की मांग करती आ रही है। कई बार ज्ञापन, आंदोलन और जनप्रतिनिधियों से गुहार के बावजूद अब तक यह सपना अधूरा ही रहा।
अब जब रेलवे सर्वे की प्रक्रिया शुरू हुई, तो लोगों को उम्मीद जगी थी कि इस बार क्षेत्र को न्याय मिलेगा, लेकिन प्रस्तावित रूट से नाम गायब होने से उम्मीदें फिर टूट गईं।
“अब नहीं तो कभी नहीं”—एकजुट होने का आह्वान
खनियाधाना निवासी संजय शर्मा ‘संजू महाराज’ ने कहा कि यह समय राजनीतिक मतभेद भुलाकर एक मंच पर आने का है।
उनका कहना है—
“यदि आज हम एकजुट होकर आवाज नहीं उठाएंगे, तो आने वाली पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी। यह सिर्फ रेल की मांग नहीं, बल्कि क्षेत्र के भविष्य की लड़ाई है।”
स्थानीय संगठनों ने भी साफ कर दिया है कि अब आंदोलन की राह अपनाई जाएगी।
क्यों जरूरी है पिछोर-खनियाधाना को रेल से जोड़ना?
1. व्यापारिक दृष्टि से अहम केंद्र
पिछोर और खनियाधाना जिले के प्रमुख व्यापारिक हब हैं। अनाज मंडियां, कृषि उत्पाद और स्थानीय बाजार यहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।
रेलवे जुड़ने से:
माल परिवहन सस्ता और तेज होगा,
बाहरी बाजारों तक सीधी पहुंच बनेगी,
स्थानीय व्यापारियों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा का मौका मिलेगा
2. रोजगार और पलायन पर सीधा असर
रेलवे कनेक्टिविटी के अभाव में क्षेत्र के युवा रोजगार के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं।
रेल आने से: छोटे-बड़े उद्योग स्थापित होंगे,स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे,युवाओं को अपने ही क्षेत्र में काम मिलेगा
3. खनिज संपदा से बढ़ेगा राजस्व
खनियाधाना और आसपास का क्षेत्र खनिज संपदा से समृद्ध माना जाता है।
लेकिन परिवहन की कमी के कारण इसका पूरा दोहन संभव नहीं हो पा रहा।
रेलवे से: खनिजों का बड़े पैमाने पर परिवहन आसान होगा, उद्योगों को कच्चा माल उपलब्ध होगा, सरकार के राजस्व में भारी वृद्धि होगी
4. पर्यटन और धार्मिक आस्था को मिलेगा बढ़ावा
खनियाधाना ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
जैन तीर्थ गोलकोट और आसपास की प्राकृतिक सुंदरता पर्यटन की अपार संभावनाएं रखती है।
रेलवे जुड़ने पर: देशभर से पर्यटकों का आगमन बढ़ेगा, स्थानीय होटल, व्यापार और सेवाओं को लाभ मिलेगा, क्षेत्र पर्यटन मानचित्र पर उभर सकता है
जनता का स्पष्ट संदेश—अनदेखी बर्दाश्त नहीं
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वे किसी क्षेत्र के विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन अपने क्षेत्र के साथ भेदभाव स्वीकार नहीं करेंगे।
जनता की प्रमुख मांग है कि: रेलवे सर्वे को संशोधित कर चंदेरी-खनियाधाना-पिछोर-करेरा रूट को शामिल किया जाए, ताकि पूरे अंचल का संतुलित और समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।
संघर्ष समिति के गठन की तैयारी, आंदोलन के संकेत
सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र में एक व्यापक संघर्ष समिति के गठन की तैयारी चल रही है, जिसमें व्यापारी, किसान, युवा और सामाजिक संगठन शामिल होंगे।
आने वाले दिनों में: ज्ञापन सौंपे जाएंगे, जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाया जाएगा, जरूरत पड़ने पर आंदोलन और धरना भी किया जाएगा
प्रशासन और सरकार से बड़ी अपेक्षा
जनता ने प्रशासन और सरकार से अपील की है कि वे जनभावनाओं का सम्मान करते हुए इस सर्वे में सुधार करें।
लोगों का कहना है कि रेलवे लाइन केवल लोहे की पटरी नहीं, बल्कि क्षेत्र के विकास, रोजगार और समृद्धि की जीवनरेखा है।
यदि पिछोर और खनियाधाना को इस परियोजना से बाहर रखा गया, तो यह सिर्फ एक क्षेत्र की अनदेखी नहीं, बल्कि विकास के संतुलन पर बड़ा प्रश्नचिह्न होगा।
अब देखना यह है कि सरकार और रेलवे विभाग जनता की इस मजबूत आवाज को कितनी गंभीरता से लेते हैं—
क्योंकि इस बार जनता ने ठान लिया है—हक लेकर रहेंगे।
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Author: Atul Kumar Jain
अतुल कुमार जैन निरंतर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मध्यप्रदेश के शिवपुरी क्षेत्र की जमीनी खबरों, स्थानीय मुद्दों और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर इनकी विशेष पकड़ है। क्षेत्र की हर छोटी-बड़ी हलचल पर इनकी पैनी नजर रहती है। वर्तमान में तेजस रिपोर्टर के साथ जुड़कर शिवपुरी क्षेत्र की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और निष्पक्ष एवं प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से अपनी सशक्त पहचान बना रहे हैं।






